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देश की पहली जेंडर न्यूट्रल वैक्सीन गार्डेसिल-9 लॉन्च:सर्वाइकल कैंसर की वजह बनने वाले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के 9 वैरिएंट्स से बचाएगी गार्डेसिल-9; जानिए यह वैक्सीन क्यों है जरूरी

15 दिन पहले
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सर्वाइकल कैंसर के मामलों को रोकने के लिए देश की पहली जेंडर न्यूट्रल HPV वैक्सीन गार्डेसिल-9 लॉन्च की गई है। इसे MSD फार्मा ने तैयार किया है। दावा किया गया है कि यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर की वजह बनने वाले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के 9 तरह के वैरिएंट्स पर असरदार साबित होगी।

वैक्सीन के नाम में न्यूट्रल जेंडर शब्द का प्रयोग किया गया है, इसका मतलब है यह लड़के और लड़कियों दोनों के लिए है। सर्वाइकल कैंसर के मामले लड़कियों में ही सामने आते हैं लेकिन इसे लड़कों को भी लगवाने की सलाह दी गई है।

क्या होता है सर्विकल कैंसर, किस उम्र के लोगों को लगेगी यह वैक्सीन और लड़कों को क्यों यह वैक्सीन लगाने की सलाह दी गई है....जानिए इन सवालों के जवाब-

क्या होता है सर्वाइकल कैंसर?
मुम्बई के जसलोक हॉस्पिटल की मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अंजना सैनानी कहती हैं, सर्वाइकल कैंसर की वजह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। एक से अधिक पार्टनर के साथ संबंध बनाने पर इस वायरस के संक्रमण का खतरा रहता है। वेजाइना से किसी तरह की ब्लीडिंग होने, अधिक लिक्विड डिस्चार्ज होने, गंध आने और सेक्स के दौरान दर्द होने पर अलर्ट हो जाएं। ऐसे लक्षण दिखने पर पैप स्मियर, सर्वाइकल बायोप्सी, पेट का अल्ट्रासाउंड कराकर इसकी जांच करा सकती हैं।

यह कैंसर लड़कियों में होता है फिर लड़कों को वैक्सीन लगवाने की सलाह क्यों?
यह वैक्सीन 9 से 26 साल की लड़कियाों और 9 से 15 साल के लड़कों को लगाई जाएगी। MSD इंडिया की एमडी रेखा ए खान का कहना है, सवाईकल कैंसर का वायरस सिर्फ महिलाओं ही नहीं, पुरुषों को भी प्रभावित करता है। इसलिए कंपनी ने न्यूट्रल जेंडर वैक्सीन लॉन्च की है, यह दोनों के लिए है। भारत में भी सर्वाइकल कैंसर के मामले कम नहीं है, इसलिए लोगों को इसकी जरूरत है।

सवाईकल कैंसर के मामले तो सिर्फ लड़कियों में सामने आते हैं फिर यह वैक्सीन पुरुषों को क्यों दी जाएगी। इसका जवाब है कि पुरुष इस कैंसर के ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के वाहक हो सकते हैं। भले ही लड़कों को यह कैंसर न हो, लेकिन इनकी वजह से यह लड़कियों तक पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए लड़कों को वैक्सीन लगवाने की बात कही गई है।

अब बात सर्वाइकल कैंसर के मरीजों की
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कहता है, सवाईकल कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे कॉमन कैंसर है। 2018 में इसके दुनियाभर में 570,000 मामले सामने आए। cancerindia.org के मुताबिक, दूसरे देशों के मुकाबले सवाईकल कैंसर से सबसे ज्यादा मौतों के मामले भारतीय महिलाओं में अधिक सामने आ रहे हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 2018 में जितने सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आए हैं, उनमें से एक तिहाई तो सिर्फ भारत और चीन को मिलाकर हैं। चीन में इस कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं, वहीं भारत में सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

देश में 2018 में सर्वाइकल कैंसर के 97,000 मामले सामने आए और 60,000 मौतें हुईं। वहीं, चीन में 1,06,000 मामले सामने आए और 48 हजार मौतें हुईं। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 30 से 49 साल की उम्र वाली 30% से भी कम महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की जांच कराती हैं।

ऐसे करें बचाव

वुमन हेल्थ जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर महिलाएं इसकी जांच नहीं कराती हैं। इसलिए यह कैंसर फैलता है और जानलेवा हो जाता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि बिना कंडोम कई व्यक्तियों के साथ यौन संबंध न बनाएं। हर तीन साल में एक बार पैप स्मियर टेस्ट जरूर कराएं। धूम्रपान और सिगरेट से दूरी बनाएं और फल-सब्जियों को डाइट में अधिक शामिल करें। इसका टीका लगवाना न भूलें और मोटापा कंट्रोल में रखें।

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