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एस्ट्रोनॉट सामंथा क्रिस्टोफोरेटी:ये इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की पहली यूरोपीय महिला कमांडर बनेंगी, 28 सितंबर को कार्यभार संभालेंगी

11 दिन पहले
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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के क्रू मेंबर्स जल्द ही बदलने वाले हैं। इस साल अक्टूबर में जाने वाली क्रू-5 के साथ उनकी कमांडर के तौर पर अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्टोफोरेटी होंगी। ऐसा कर वे इस पद को संभालने वाली पहली यूरोपीय महिला बन जाएंगी। फिलहाल एक्सपेडिशन-67 क्रू के सदस्य रूसी एस्ट्रोनॉट ओलेग आर्टेमयेव ISS के कमांडर हैं।

अपने नाम की घोषणा के बाद 45 साल की सामंथा ने कहा, "मैं कमांडर के पद पर अपनी नियुक्ति से विनम्र हूं। अंतरिक्ष में और पृथ्वी पर कक्षा में एक बहुत ही सक्षम टीम का नेतृत्व करने के लिए मेरे पास जो अनुभव है, उसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हूं।"

कमान संभालने के बाद इटली की सामंथा ISS की 5वीं यूरोपीय कमांडर बन जाएंगी।
कमान संभालने के बाद इटली की सामंथा ISS की 5वीं यूरोपीय कमांडर बन जाएंगी।

अभी अमेरिकी सेगमेंट की लीडर हैं सामंथा
इस साल अप्रैल में ISS पहुंचने के बाद से ही सामंथा वहां अमेरिकी सेगमेंट को लीड कर रही हैं। इसमें यूरोपीय, कनाडाई, जापानी और अमेरिकी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कमान संभालने के बाद इटली की सामंथा ISS की 5वीं यूरोपीय कमांडर बन जाएंगी। इससे पहले यूरोपीय देशों के फ्रैंक डी विन्न, अलेक्जेंडर गर्स्ट, लुका परमिटानो और थॉमस पेसक्वेट स्पेस स्टेशन के कमांडर रह चुके हैं।

सोशल मीडिया स्टार हैं सामंथा
सामंथा टिकटॉक, ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी पॉपुलर हैं। वे अंतरिक्ष में रहकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के कुछ मजेदार पल शेयर करती रहती हैं। ट्विटर पर उनके 10 लाख फॉलोअर्स हैं, तो वहीं फेसबुक और टिकटॉक पर 6-6 लाख फॉलोअर्स हैं। टिकटॉक पर अब तक उनके वीडीयोज को करोड़ों बार देखा जा चुका है।

सामंथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मजेदार वीडियोज शेयर करती रहती हैं।
सामंथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मजेदार वीडियोज शेयर करती रहती हैं।

ISS कमांडर की नियुक्ति कैसे होती है?
यह फैसला अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा, रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस, जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा, यूरोपीय स्पेस एजेंसी ईएसए और कनाडाई स्पेस एजेंसी मिलकर लेती हैं। ISS का कमांडर क्रू मेंबर्स के काम और सेहत के लिए जिम्मेदार होता है। वह पृथ्वी पर मौजूद टीमों के साथ लगातार कम्युनिकेट करता है और इमरजेंसी की स्थिति में फैसले लेता है।

क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन?
ISS एक फुटबॉल फील्ड जितनी बड़ी स्पेस लैब है, जो 420 किमी की ऊंचाई पर धरती के चक्कर लगाती रहती है। इसका वजन 450 टन है। इसे नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था। इस प्रोजेक्ट में अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, स्पेन, नॉर्वे, नीदरलैंड्स, इटली, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क और बेल्जियम शामिल हैं। ब्राजील 2007 में इस प्रोग्राम से अलग हो गया था। अब रूस भी 2024 के बाद इसे छोड़ने की तैयारी में है।

ISS में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 6-8 लोग 6 महीने तक रह सकते हैं। इस पर पृथ्वी से उड़ान भरने वाले बड़े-बड़े अंतरिक्ष यान उतारे जाते हैं। अब तक 19 देशों के 200 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS का दौरा किया है।

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