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  • Lung Cancers In Non smokers Could Be A Result Of Natural Processes And NOT Secondhand Smoke, NIH Study Finds

नेशनल कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिसर्च:धूम्रपान न करने वालों में क्यों होता है फेफड़ों का कैंसर, वैज्ञानिकों ने बताई वजह, कहा; DNA का डैमेज होना या कैंसर फैलाने वाले तत्व हैं कारण

18 दिन पहले
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धूम्रपान न करने वालों को भी फेफड़ों का कैंसर होता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसका पता लगने के लिए रिसर्च की है। रिसर्च रिपोर्ट कहती है, धूम्रपान न करने वाले लोगों में प्राकृतिक तौर पर कैंसर पनपता है।

इसे समझने के लिए अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट ने 232 ऐसे लोगों पर रिसर्च की जो कैंसर से जूझ रहे थे लेकिन उन्होंने कभी भी धूम्रपान नहीं किया था। इन मरीजों के कैंसर वाले ट्यूमर से सैम्पल लिया गया। इस सैम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई।

क्या कहती है जांच रिपोर्ट
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि यह फेफड़ों के कैंसर का नया प्रक्रार है जो शरीर में अपने आप विकसित हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है, इसकी वजह है 'म्यूटेशनल सिग्नेचर' यानी DNA में किसी तरह गड़बड़ी होने से ऐसा हुआ या फिर मरीज किसी कैंसर फैलाने वाले तत्व के संपर्क में आया। इसका सटीक कारण पता लगाने के लिए इस पर और रिसर्च किए जाने की जरूरत है।

नेचर जेनेटिक्स में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, जिन 232 नॉन-स्मोकर्स को फेफड़ों का कैंसर हुआ था उनमें से मात्र 28 फीसदी मरीज सेकंडहैंड स्मोक के दायरे में आए थे। अन्य 72 फीसदी मरीज कैंसर के कौन से रिस्क फैक्टर से परेशान हुए, यह सामने नहीं आ पाया है। ऐसे मरीजों में कैंसर प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ।

इससे पहले सामने आई एक रिसर्च में सामने आया था कि धूम्रपान न करने वालों में कैंसर की वजह सेकंड हैंड स्मोक और प्रदूषण था। इनसे निकलने वाले जहरीले तत्व शरीर में पहुंचकर कैंसर की वजह बनते हैं।

लंग्स कैंसर: आवाज का बदलना भी कैंसर का इशारा

  • लक्षण: लम्बे समय तक खांसी, बलगम आना या इसमें से खून आने पर अलर्ट हो जाएं। सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और आवाज का बदलना भी कैंसर का इशारा है।
  • बचाव: इस कैंसर से बचने के लिए तम्बाकू से दूरी बनाएं। किसी तरह का लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
  • जांच: इस कैंसर से जुड़े लक्षण दिखने पर चेस्ट एक्सरे, एचआरसीटी स्कैन, लंग बायोप्सी या ब्रॉन्कोस्कोपी जांच कराएं।

20 फीसदी नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के मामले

दुनियाभर में हर साल 20 लाख से अधिक लोग फेफड़ों के कैंसर से जूझते हैं। इनमें 2 लाख मामले तो सिर्फ अमेरिका में सामने आते हैं। दूसरे कैंसर के मुकाबले इससे मौतें भी ज्यादा होती हैं। दुनियाभर में हर साल 18 लाख लोग लंग कैंसर के कारण दम तोड़ देते हैं।

अमेरिकी एजेंसी सीडीसी के मुताबिक, अमेरिका में प्रतिवर्ष हर 1 लाख लोगों में से औसतन 54 नए लंग कैंसर के मामने सामने आते हैं। इनमें से 35 मरीजों की मौत हो जाती है।

लंग कैंसर का सीधा कनेक्शन धूम्रपान से है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है, इसके मामले उन लोगों में भी बढ़ रहे हैं जो धूम्रपान यानी स्मोकिंग नहीं करते हैं। ऐसे कैंसर के 10 से 20 फीसदी मामले नॉन-स्मोकर्स में दिखते हैं। ऐसे नॉन-स्मोकर्स कैंसर के मरीजों में ज्यादातर युवा और महिलाएं हैं।

लंग कैंसर का नया प्रकार सामने आया
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया टेरेसा कहती हैं, रिसर्च के दौरान हमें लंग कैंसर का ऐसा नया प्रकार देखने को मिला है जो नॉन-स्मोकर्स में होता है। उम्मीद है भविष्य में इस कैंसर के लिए कुछ नया ट्रीटमेंट तैयार किया जा सकेगा।

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