अमेरिका में अनजान बीमारी से दम तोड़ रहे परिंदे:पक्षियों की आंखों की रोशनी छीन रही रहस्यमय बीमारी, दिशा भूलने और थकान के कारण उड़ भी नहीं पा रहे

5 महीने पहले
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अमेरिका में पूर्वी इलाके में एक रहस्यमय बीमारी से पक्षियों की मौतें हो रही हैं। वैज्ञानिक अब तक इस बीमारी का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई है कि जिस तरह स्टारलिंग्स, ब्लू जेज़, ग्रैकल्स जैसे पक्षियों की मौत हो रही है, वह पक्षियों की महामारी का संकेत हो सकता है। आमतौर पर साल्मोनेला और क्लामायिडया बैक्टीरिया के संक्रमण से पक्षियों में ऐसी मौतें होती हैं, लेकिन वैज्ञानिक का मानना है कि इस बार मौतों की वजह ये बैक्टीरिया नहीं हैं।

इस बीमारी से पक्षियों की मौत के मामले 2 महीने पहले वर्जिनिया, वाशिंगटन और मैरीलैंड में सामने आए थे। लेकिन अब यह केंटकी, डेलावेयर और विस्कॉन्सिन तक फैल चुकी है। इस अजीब बीमारी से मारे गए पक्षियों का पोस्टमॉर्टम यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन में किया जा रहा है। यहां टॉक्सिकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर लीजा मार्फी कहती हैं कि अब तक की गई जांचों में मौत की वजह पता नहीं चल पाई है।

पक्षी विज्ञानी मरने वाली चिड़ियों की जांच करके बीमारी का पता लगाने में जुटे हैं।
पक्षी विज्ञानी मरने वाली चिड़ियों की जांच करके बीमारी का पता लगाने में जुटे हैं।

मौतों का कनेक्शन पक्षियों के दिमाग से
एनिमल वेलफेयर लीग ऑफ अर्लिंग्टन संस्था की प्रवक्ता चेलेसी जोन्स कहती हैं, 'मई में इस बीमारी की जानकारी मिली थी। हमने मरे हुए पक्षियों की जांच की, तो पता चला कि उनकी पलकों के पीछे सफेद रंग का क्रस्ट जमा था। इस वजह से उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। कई पक्षी दिशा नहीं तय कर पा रहे थे, उन्हें दिशाभ्रम हो रहा था। थकान के कारण वे उड़ नहीं पा रहे थे। इससे साफ है कि उन्हें ऐसी बीमारी परेशान कर रही है, जिसका कनेक्शन दिमाग से है। यानी ये समस्या न्यूरोलॉजिकल है।'

ज्यादा प्रभावित इलाकों का सर्वे हो रहा
चेलेसी का कहना है कि वे अब तक वे ऐसे 300 पक्षियों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं। आशंका जताई जा रही है कि इससे कई गुना ज्यादा पक्षी मर चुके हैं। मृत पक्षियों को जांच के लिए वर्जिनिया के डिपार्टमेट ऑफ वाइल्डलाइफ रिसोर्सेज भेजा गया है। यह संस्थान जियोलॉजिकल सर्वे की टीम के साथ कर कर रहा है। इससे पता चल सकेगा कि अमेरिका के कौन-कौन से हिस्सों में इस बीमारी का संक्रमण फैल चुका है।

लोगों को पक्षियों से दूर रहने की सलाह
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC ने पक्षियों की मौत के लिए एवियन इन्फ्लुएंजा, वेस्ट नाइल, हर्पीज, पॉक्स जैसे वायरस या यलो फीवर को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है। कई पक्षियों की आंखों की रोशनी जाने के बाद उनमें न्यूकैसल डिजीज वायरस की जांच हुई, लेकिन उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। यह जांच इसलिए भी हुई, क्योंकि यही वायरस पक्षियों में कंजक्टिवाइटिस के लिए जिम्मेदार होता है।

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अधिकारियों का कहना है कि जहां भी ऐसी रहस्यमय मौतें हो रही हैं, वहां लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करना चाहिए। अभी बीमारी का पता नहीं चल पाया है इसलिए पक्षियों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

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