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रहस्यमय मशरूम:मेघालय में मिला हरे रंग की रोशनी से जगमगाने वाला मशरूम, जानिए, यह इतना क्यों चमक रहा है

2 महीने पहले
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दुनियाभर में ऐसे चमकने वाले मशरूम की 97 प्रजातियां हैं। फोटो साभार : स्टीफेन एक्सफोर्ड - Dainik Bhaskar
दुनियाभर में ऐसे चमकने वाले मशरूम की 97 प्रजातियां हैं। फोटो साभार : स्टीफेन एक्सफोर्ड
  • मेघालय के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में मिला हरी रोशनी बिखेरने वाला यह मशरूम
  • ऐसे चमकदार मशरूम को आम भाषा में बायोल्युमिनेसेंट भी कहते हैं

मेघालय में खास तरह के मशरूम की प्रजाति मिली है। यह हरे रंग की चमकदार रोशनी से जगमग नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे रहस्यमय मशरूम बता रहे हैं। दरअसल, मशरूम की इस प्रजाति का नाम रॉरीडोमाइसीज़ फिलेस्टाचीडस है। नॉर्थ-ईस्ट में मशरूम से जुड़ा एक प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इस दौरान मशरूम की 600 अन्य प्रजातियां भी सामने आई हैं।

अगस्त में पहली बार देखा गया था

हरे रंग की रोशनी बिखेरने वाले मशरूम को पहली बार मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में एक झरने के पास देखा गया था। इसके बाद यह पश्चिमी जयंतिया हिल्स जिले में भी मिला। इसे आम भाषा में बायोल्युमिनेसेंट कहते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में अब तक ऐसे चमकने वाले बायोल्युमिनेसेंट मशरूम की 97 प्रजातियां मौजूद हैं।

यह मशरूम इतना चमकता क्यों है
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की मायकोलॉजिस्ट सामंथा करूनार्थना कहती हैं, कुछ जानवर, पौधे, बैक्टीरिया और मशरूम ऐसे होते हैं जो प्रकाश बिखेरते हैं। आमतौर ये समुद्र में पाए जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं तो जमीन पर मिलते हैं। ये जीव कितना प्रकाश बिखेरेंगे यह उनमें मौजूद केमिकल पर निर्भर करता है।

हाल ही मिले मशरूम में खास तरह का एंजाइम ल्युसीफेरेज पाया जाता है। जो ऑक्सीजन से मिलने पर हरा रंग बनाता है। मशरूम में एक्स्ट्रा एनर्जी होने पर यह बाहर हरे प्रकाश के रूप में निकलती है।

मशरूम की यह प्रजाति बांस के पेड़ के इर्द-गिर्द उगती है। फोटो साभार : स्टीफेन एक्सफोर्ड
मशरूम की यह प्रजाति बांस के पेड़ के इर्द-गिर्द उगती है। फोटो साभार : स्टीफेन एक्सफोर्ड

कैसे शुरू हुआ प्रोजेक्ट
मशरूम की अलग-अलग प्रजातियों का पता लगाने के लिए नॉर्थ-ईस्ट के चार राज्यों में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। इसमें मेघालय, असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। प्रोजेक्ट की शुरुआत बालीपुरा फाउंडेशन ने कुन्मिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के साथ मिलकर की।

15 सालों से मशरूम पर काम कर रहे फोटोग्राफर ने ली फोटो

इस प्रोजेक्ट से जुड़े फोटोग्राफर स्टीफेन एक्सफोर्ड कहते हैं, हम जहां भी मशरूम के लिए जानकारी इकट्‌ठा करने जाते हैं लोगों से चमकने वाले मशरूम के बारे में जरूर पूछते हैं। मेघालय में भी हमने ऐसा ही किया और इस तरह हम वहां तक पहुंचे। फोटोग्राफर स्टीफन पिछले 15 सालों से मशरूम पर काम कर रहे हैं।

स्टीफेन कहते हैं, मशरूम की जांच और जीन की सिक्वेंसिंग करने पर पला चला कि रॉरीडोमाइसीज़ परिवार से ताल्लुक रखता है लेकिन यह बांस के पेड़ पर उगता है इसलिए इसका नाम बांस से जोड़ा गया है। इसी पेड़ पर यह पहली बार देखा गया था।

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