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मंकीपॉक्स को लेकर सख्त हुई सरकार:मरीज के संपर्क में आने वालों की 21 दिन निगरानी; कल केरल में मिला पहला केस

नई दिल्ली7 महीने पहले
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गुरुवार को केरल के कोल्लम में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें विदेश से आने वाले यात्रियों की टेस्टिंग, मरीज के संपर्क में आए लोगों की निगरानी और इलाज करने की प्रक्रिया का भी जिक्र है।

यात्रा करने वालों के लिए गाइडलाइन

  • विदेश से लौटे यात्रियों को बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचना होगा।
  • उन्हें जिंदा या मृत जंगली जानवरों और चूहे, गिलहरी, बंदरों के संपर्क में आने से बचना होगा।
  • यात्रियों को जंगली जानवरों का मीट न खाने और अफ्रीका के जानवरों से बनी क्रीम, लोशन और पाउडर जैसी चीजों का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।
  • बीमार लोगों या संक्रमित जानवरों के संपर्क में आए बिस्तर व कपड़ों से दूर रहना होगा।

संदिग्ध मरीज कौन कहलाएगा?
वे लोग जो पिछले 21 दिनों में मंकीपॉक्स से ग्रस्त देशों की यात्रा कर लौटे हैं और उनमें बीमारी के लक्षण हैं, उन्हें संदिग्ध मरीजों की लिस्ट में शामिल किया जाएगा। लक्षणों में शरीर पर मवाद से भरे दाने, तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और सूजी हुई लिंफ नोड्स शामिल हैं। संदिग्ध मरीज किसी भी उम्र या जेंडर का हो सकता है।

संभावित मरीज कौन कहलाएगा?
वह व्यक्ति जो संदिग्ध मरीज के संपर्क में आया हो या संक्रमित मरीज की छुई हुई चीजों या उसके फिजिकल कॉन्टैक्ट में आया हो, वह मंकीपॉक्स का संभावित मरीज हो सकता है। सरकार के अनुसार, ऐसे लोगों पर संपर्क में आने के अगले 21 दिन नजर रखी जाएगी।

क्या है मंकीपॉक्स?
मंकीपॉक्स बीमारी एक ऐसे वायरस के कारण होती है, जो स्मॉल पॉक्स यानी चेचक के वायरस के परिवार का ही सदस्य है। मंकीपॉक्स 1958 में पहली बार एक बंदर में पाया गया था, जिसके बाद 1970 में यह 10 अफ्रीकी देशों में फैल गया था।

2022 में हुए आउटब्रेक में इसका सबसे पहला केस ब्रिटेन में 6 मई को पाया गया, जिसके बाद देखते ही देखते इसका संक्रमण 70 से ज्यादा देशों में फैल गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो इस साल मंकीपॉक्स के सबसे ज्यादा शिकार वे पुरुष हो रहे हैं, जो पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं। हालांकि, इसे अब तक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) यानी यौन रोग नहीं माना गया है।