दुनिया में मंकीपॉक्स का कहर:यूरोप में 2 हफ्ते में 3 गुना मामले बढ़े, अब तक 67 देशों में 6000+ मरीज मिले

3 महीने पहलेलेखक: आयुषी गोस्वामी
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दुनियाभर में मंकीपॉक्स का कहर दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बयान जारी करते हुए कहा कि 15 जून के बाद से यूरोप में मंकीपॉक्स के मामलों में 3 गुना इजाफा हुआ है। 6 मई को ब्रिटेन में इसका पहला केस मिलने के बाद पूरे यूरोप में अब तक लगभग 5,000 से ज्यादा लोगों में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है।

मंकीपॉक्स ने लिया महामारी का रूप

हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क ने मंकीपॉक्स को महामारी घोषित किया है, हालांकि WHO ने फिलहाल इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी कहने से इनकार कर दिया है। Monkeypoxmeter.com के डेटा के मुताबिक, अब तक 67 देशों में इसके 6,157 कंफर्म व संदिग्ध मरीजों की पहचान हुई है। मंकीपॉक्स से ग्रस्त टॉप 10 देशों में ब्रिटेन, स्पेन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल, कनाडा, नीदरलैंड्स, इटली और बेल्जियम शामिल हैं।

मंकीपॉक्स किसे बना रहा अपना शिकार?

WHO के लिए यूरोप के रीजनल डायरेक्टर डॉ. हांस क्लूग ने बताया कि मंकीपॉक्स वायरस इन तीन तरह के लोगों को अपना शिकार बना रहा है…

  • इस साल हुए आउटब्रेक के 99% मरीज पुरुष हैं।
  • ज्यादातर पुरुष वो हैं जो दूसरे पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं।
  • अधिकतर मरीजों की उम्र 21 से 40 साल के बीच है।

क्लूग ने बताया कि यूरोप में अब तक केवल एक मरीज को ही इंटेन्सिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती करने के जरूरत पड़ी। साथ ही इस इलाके में मंकीपॉक्स से एक भी इंसान की मौत दर्ज नहीं की गई है। ज्यादातर मरीजों में शरीर पर मवाद से भरे दानों को मुख्य लक्षण के तौर पर पाया गया।

यूरोप में मंकीपॉक्स के 5,000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
यूरोप में मंकीपॉक्स के 5,000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

वायरस के DNA में मिले 50 म्यूटेशंस

मंकीपॉक्स के मामलों में इजाफा होता देख पूरी दुनिया अलर्ट मोड पर है। वैज्ञानिक तरह-तरह की रिसर्च कर बीमारी के तेजी से फैलने की वजह का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में वायरस के 2018 के DNA और 2022 के DNA की तुलना की गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि चार साल में DNA में 50 म्यूटेशंस हो चुके हैं। ये संभावित बदलाव से 6-12 गुना ज्यादा है।

बीमारी अब पहले जैसी नहीं रही

लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने लंदन में रहने वाले मंकीपॉक्स के 54 मरीजों की जांच की। ये सभी वे पुरुष हैं जो पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं। इनमें से केवल 2 मरीजों को अंदाजा नहीं था कि वे किसी संक्रमित के संपर्क में आए हैं।

मरीजों में से एक चौथाई HIV पॉजिटिव और एक चौथाई किसी यौन रोग से संक्रमित थे। सभी मरीजों में मुख्य लक्षण मवाद से भरे दाने थे। 94% लोगों में यह दाने प्राइवेट पार्ट्स में थे। यानी, वायरस सेक्स के दौरान स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट से संक्रमण फैल रहा है। रिसर्चर्स के अनुसार इससे पहले अफ्रीका में हुए आउटब्रेक्स में यह दाने हमेशा हाथ पर होते थे, जिसका मतलब था कि मरीज ने संक्रमित व्यक्ति या जानवर को छुआ है।