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तीसरी लहर की तैयारी:कोरोना से बचाव में प्रोटीन की जरूरत, पर 73% भारतीयों में इसकी कमी; जानिए रिकवरी के लिए ये क्यों है जरूरी

4 महीने पहले
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देश के 16 शहरों में हुए एक सर्वे के मुताबिक 73% भारतीयों में प्रोटीन की कमी है और 93% लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है। जबकि कोरोना काल में प्रोटीन की ज्यादा जरूरत है। संक्रमण के बाद कमजोर हो चुकी मांसपेशियों और रोगों से लड़ने वाले इम्यून सिस्टम के लिए एक्सपर्ट प्रोटीन लेने की सलाह दे रहे हैं। प्रोटीन की कमी होने पर मरीज थकान, कमजोरी, चलने-फिरने में दिक्कत और अनिद्रा से जूझ रहे हैं।

एक्सपर्ट का कहना है, शरीर में हुए डैमेज को रिपेयर करने का काम प्रोटीन ही करता है, लेकिन 90% लोग यही नहीं जानते कि रोजाना कितना प्रोटीन लेना चाहिए। इसमें सबसे ज्यादा 95% से अधिक महिलाएं शामिल हैं। नतीजा, 71% भारतीयों की मांसपेशियां कमजोर हैं।

हर साल 24 से 30 जुलाई के बीच नेशनल प्रोटीन वीक मनाया जाता है। इस मौके पर जानिए प्रोटीन कैसे काम करता है, रोजाना कितना प्रोटीन लेना चाहिए और डाइट में इसकी मात्रा अधिक या कम होने पर क्या फायदे-नुकसान हो सकते हैं।

प्रोटीन क्या है और कितना लें?

जिस तरह एक बिल्डिंग को तैयार करने के लिए ईंटों का होना जरूरी है, उसी तरह शरीर के लिए प्रोटीन अहम है। इसीलिए इसे बिल्डिंग ब्लॉक्स ऑफ लाइफ भी कहा जाता है। शरीर के विकास के लिए प्रोटीन का होना जरूरी है। ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) का कहना है कि रोजाना कम से कम 48 ग्राम प्रोटीन लेना जरूरी है, लेकिन भारतीयों के खानपान में प्रोटीन की मात्रा इससे काफी कम है।

औसतन, एक इंसान का जितना वजन होता है, उसे उतने ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। जैसे- आपका वजन 60 किलो है तो रोजाना डाइट में 60 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए।

प्रोटीन कैसे काम करता है, अब इसे समझें

प्रोटीन एक ग्रीक शब्द प्रोटीयोज से मिलकर बना है, जिसका मतलब है प्राइमरी यानी सबसे जरूरी। प्रोटीन अमीनो एसिड की छोटी-छोटी चेन से मिलकर बना होता है। आसान भाषा में समझें तो यह स्किन और मांसपेशियों में होने वाली टूट-फूट को रिपेयर करता है। इंसान के शरीर में एक लाख तरह के प्रोटीन होते हैं। इनमें हीमोग्लोबिन, किरेटिन और कोलेजन जैसे प्रोटीन शामिल हैं। जिनका शरीर के अलग-अलग हिस्सों से कनेक्शन है।

भारतीयों में प्रोटीन की कमी के 4 बड़े कारण

  • भारतीयों की थाली में फैट-स्टार्च अधिक: बीएमजे जर्नल में पब्लिश रिसर्च रिपोर्ट कहती है, भारतीयों की थाली में स्टार्च और फैट अधिक व प्रोटीन कम होता है। 91% शाकाहारियों में प्रोटीन की कमी देखी गई है।
  • जागरूकता की कमी: ज्यादातर भारतीयों को इसकी जानकारी नहीं रहती कि रोजाना डाइट में कितना प्रोटीन लें। वर्किंग वुमन और हाउसवाइव्स में 70-80% तक प्रोटीन की कमी रहती है।
  • थाली में चावल और गेहूं अधिक: भारतीयों की थाली में चावल और गेहूं अधिक होता है जबकि दालों का प्रयोग कम किया जाता है। एक शाकाहारी इंसान की डाइट में दालों का होना जरूरी है। 2016 में दालों को सुपरफूड घोषित किया गया था।
  • प्रोटीन को लेकर भ्रम: 70% महिलाएं मानती हैं, फल और सब्जियों में प्रोटीन होता है। वहीं, 73% शहरी आबादी के मुताबिक, पत्तेदार सब्जियों में प्रोटीन अधिक होता है। ऐसे भ्रम भी प्रोटीन की कमी का कारण बनते हैं।

अब प्रोटीन के फायदे और नुकसान भी जान लीजिए

प्रोटीन लेना जरूरी है, क्योंकि यह रोगों से लड़ने वाले इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। हड्डियों और मांसपेशियों को स्ट्रॉन्ग बनाने का काम भी यही प्रोटीन करता है। यह हार्मोन का लेवल नहीं बिगड़ने देता। इसके साथ बाल, नाखून और स्किन को सेहतमंद रखता है। गर्भवती और बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए यह बेहद जरूरी है ताकि बच्चे का विकास बेहतर हो सके।

एक रिसर्च में साबित भी हुआ है कि यह मेटाबॉलिज्म सुधारकर मोटापा कंट्रोल करता है। साथ ही थकावट दूर करने का भी काम करता है।

प्रोटीन की मात्रा जरूरत से ज्यादा लेते हैं, तो कई तरह का खतरा भी बढ़ता है। इसकी अधिक मात्रा बढ़ने लेने पर शरीर इसे बाहर नहीं निकाल पाता, इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। प्रोटीन अधिक लेने पर किडनी फेल और स्टोन होने का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा वजन बढ़ना, सांसों में बदबू आना, कब्ज होने के साथ कैंसर और हृदय रोगों की आशंका भी रहती है।

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