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कोरोना की जांच का नया तरीका:80 सेकंड में इलेक्ट्रिक नाक से होगी कोरोना की जांच, रियलटाइम में 94 फीसदी तक सटीक परिणाम देेने का दावा

12 दिन पहले
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नई जांच विकसित करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है, हर बीमारी की एक खास खुशबू होती है। नाक में ट्यूब को लगाकर कोविड की खुशबू का पता लगाया जाता है। - Dainik Bhaskar
नई जांच विकसित करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है, हर बीमारी की एक खास खुशबू होती है। नाक में ट्यूब को लगाकर कोविड की खुशबू का पता लगाया जाता है।
  • इजरायल के विजमैन इंस्टीट्यूट ने विकसित किया कोविड के जांच का नया तरीका

कोरोना की जांच के लिए इजरायल के वैज्ञानिकों ने नई तकनीक विकसित की है। अब 'इलेक्ट्रिक नाक' से कोरोना की जांच की जा सकेगी। मरीज को सिर्फ इसे नाक से लगाकर सूंघना होगा और 80 सेकंड में रिपोर्ट आ जाएगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना की नई जांच से 94 फीसदी तक सटीक रिपोर्ट मिलती है।

ऐसे काम करती है 'इलेक्ट्रिक नाक'
इस जांच को तैयार करने वाले इजरायल के विजमैन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है, यह 3डी-प्रिंटेड इलेक्ट्रिक नोज है। इसे कोरोना के मरीजों की नाक में लगाया जाता है। मरीज की नाक में मौजूद रसायन की खुशबू की जांच करने के बाद इलेक्ट्रिक नोज बताती है, मरीज पॉजिटिव है या नहीं।

शोधकर्ताओं का कहना है, हर बीमारी की एक खास किस्म की खुशबू होती है जो शरीर के मेटाबॉलिक प्रोसेस को बदलती है। यही फॉर्मूला नई जांच को तैयार करने में इस्तेमाल किया गया है।

नई जांच की टेस्टिंग गाड़ियों में बैठे लोगों पर की गई। इसका एक फायदा यह भी है कि जांच मरीज खुद कर सकता है और दूर बैठा एक शख्स मॉनिटर पर देखकर बता सकता है कि रिपोर्ट पॉजिटिव है या निगेटिव।
नई जांच की टेस्टिंग गाड़ियों में बैठे लोगों पर की गई। इसका एक फायदा यह भी है कि जांच मरीज खुद कर सकता है और दूर बैठा एक शख्स मॉनिटर पर देखकर बता सकता है कि रिपोर्ट पॉजिटिव है या निगेटिव।

इलेक्ट्रिक नोज को पेन-3 नाम दिया गया
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस इलेक्ट्रिक नोज को पेन-3 नाम दिया गया है। इलेक्ट्रिक नोज एक लम्बी ट्यूब से मिलकर बनी है। इसमें खास तरह के सेंसर लगे हैं जो नाक में मौजूद वायरस का पता लगाते हैं।

रियलटाइम टेस्ट से सटीक परिणाम का दावा
वैज्ञानिकों का कहना है, इससे कोरोना की रियलटाइम जांच की जा सकती है और 94 फीसदी तक सटीक परिणाम पता चलते हैं। शोधकर्ता प्रो. नोएम सोबेल के मुताबिक, पेन-3 को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह नाक में मौजूद वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स की जांच कर सके।

503 लोगों की हुई जांच
पेन-3 की मदद से 503 लोगों की जांच की गई। जिसमें से 27 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। प्रोफेसर सोबेल का कहना है, जांच की इस तकनीक का प्रयोग ऐसी जगह पर किया जा सकता है जहां भीड़ अधिक इकट्ठा होती है। इसके अलावा एयरपोर्ट पर जांच के लिए भी इलेक्ट्रिक नोज का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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