क्या खुशियों का कोई फॉर्मूला है:खुशी के लिए 3 चीजें सबसे कीमती; परिवार, दोस्त और सेहत

नई दिल्ली13 दिन पहले
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क्या खुशियों का कोई फॉर्मूला है... क्या उसका कोई पता है? इन दो मुश्किल सवालों का जवाब है आपका मन। खुशी आपके मन में है, उसे बाहर नहीं अंदर तलाशने की जरूरत है। आज नो निगेटिव मंडे की सालगिरह पर पढ़िए खुशी के बारे में विज्ञान और मनोविज्ञान क्या कहता है... कैसे जीवन ऊर्जा का सबसे बड़ा जरिया है...

रोज कोई तीन चीजें लिखें, जिसके लिए आप शुक्रगुजार हैं
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट वॉल्डिंगर का कहना है कि कभी सोचा है कि किसी की घोर प्रशंसा महज एक आलोचना करने से क्यों बेकार हो जाती है? अच्छी-भली शानदार लंबी छुट्टियों का मजा आखिरी दिन किसी छोटी-सी बात पर हुए झगड़े से क्यों बर्बाद हो जाता है? खाने के आसपास मंडराती एक मक्खी क्यों बेहतरीन से बेहतरीन खाने का आनंद छीन लेती है? इसकी वजह ये है कि हमारा दिमाग नकारात्मक चीजों को जल्दी नोटिस करता है।

प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट वॉल्डिंगर का कहना है कि रोज कोई तीन चीजें लिखें, जिसके लिए आप शुक्रगुजार हैं, इससे आप जिंदगी की सकारात्मक चीजों पर फोकस करने लगेंगे।
प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट वॉल्डिंगर का कहना है कि रोज कोई तीन चीजें लिखें, जिसके लिए आप शुक्रगुजार हैं, इससे आप जिंदगी की सकारात्मक चीजों पर फोकस करने लगेंगे।

इसका समाधान ये है कि कृतज्ञता जताएं। रोज कोई तीन चीजें लिखें, जिसके लिए आप शुक्रगुजार हैं। इससे आप जिंदगी की सकारात्मक चीजों पर फोकस करने लगेंगे। फिर भी लगे कि जिंदगी में कुछ सकारात्मक है ही नहीं तो ‘काउंटरफैक्चुअल थिंकिंग’ अपनाएं। इसके लिए ‘अगर ये न हो तो’ फॉर्मूले का सहारा लें। इसमें आपको खुद से ऐसी चीजें पूछनी हैं, जैसे- अगर सबसे अच्छा दोस्त आपके पास न होता तो? अगर खाने को कुछ नहीं मिलता तो? ऐसे आप महसूस करेंगे कि आपके पास शुक्रिया कहने के लिए कितनी सारी चीजें हैं? हम उन दिनों के लिए कभी शुक्रगुजार नहीं होते, जब बीमार या दर्द में नहीं होते। उन रातों के लिए कभी धन्यवाद नहीं कहते, जब बारिश में सिर पर छत होती है। उन सुबहों के लिए आभार नहीं जताते, जो जिंदगी में नया दिन लाती हैं।

सोशल मीडिया के झूठे दोस्तों से दूरी और जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें
येल यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक लौरी सैंटोस जो साइंस ऑफ हैप्पीनेस पढ़ाती हैं। उनका कहना है कि बच्चों को खुशी का पाठ पढ़ाते-पढ़ाते कब मैं बर्नआउट (काम के तनाव का शिकार) हो गई, पता नहीं चला। उदासी, चिड़चिड़ापन और थकावट जैसे लक्षण दिखने लगे। मैंने ब्रेक लिया और पति के साथ कैम्ब्रिज शिफ्ट हो गई। अगर आप ये सोच रहे हैं कि हैप्पीनेस की प्रोफेसर होने के बावजूद मैं कैसे बर्नआउट हो गई, तो बता दूं कि आप क्या करते हैं? उससे इसका कोई लेना-देना नहीं है। कोई भी बर्नआउट हो सकता है। मैकेंजी हेल्थ इंस्टीट्यूट सर्वे-2022 के मुताबिक, अमेरिका में करीब 30% कर्मचारी बर्नआउट हैं।

मनोवैज्ञानिक लौरी सैंटोस का कहना है कि आपकी खुशियां छीनने वाली हर चीज पर तो नियंत्रण नहीं है, पर खुद को खुश रखना आपके हाथ में हो सकता है।
मनोवैज्ञानिक लौरी सैंटोस का कहना है कि आपकी खुशियां छीनने वाली हर चीज पर तो नियंत्रण नहीं है, पर खुद को खुश रखना आपके हाथ में हो सकता है।

हमारा दिमाग भी हमें भ्रमित करता है। ऐसी चीजें करने को उकसाता है, जिससे कुछ देर के लिए तो खुशी मिल सकती है, पर वह टिकाऊ नहीं होती। लोगों को लगता है कि पैसा, स्टेटस व अच्छे ग्रेड्स से खुशी मिल जाएगी। लेकिन साइंस कहती है कि नींद, कसरत, अच्छा खान-पान खुशी दे सकते हैं। आपकी खुशियां छीनने वाली हर चीज पर तो नियंत्रण नहीं है, पर खुद को खुश रखना आपके हाथ में हो सकता है। अपनी एक अलग पहचान बनाइए। खास तौर से उन कामों में, जिनमें आप बेहतर नहीं हैं। इसके अलावा नियमित टहलें और अपने चहेतों के साथ वक्त गुजारें। झूठे दोस्तों से जैसे-सोशल मीडिया और जरूरत से ज्यादा खरीदारी से बचें।