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दुनिया का सबसे दुर्लभ समुद्री जीव:धरती पर इनकी संख्या केवल 10; अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा- इन्हें अब भी बचाया जा सकता है

19 दिन पहले
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दुनिया के सबसे दुर्लभ जीवों में से एक वैक्विटा पॉरपॉइज को विलुप्त होने वाले जीवों की लिस्ट में शामिल किया गया है। विश्व में इनकी संख्या केवल 10 रह गई है। यह पृथ्वी पर सबसे दुर्लभ समुद्री स्तनधारी जीव है। हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक नई स्टडी के मुताबिक, इन्हें अब भी विलुप्त होने से बचाया जा सकता है।

पहले जान लें, क्या है वैक्विटा पॉरपॉइज?

वैक्विटा पॉरपॉइज एक समुद्री स्तनधारी जीव है।
वैक्विटा पॉरपॉइज एक समुद्री स्तनधारी जीव है।

वैक्विटा एक समुद्री स्तनधारी जीव है, जो विलुप्त होने की कगार पर है। ग्रे और सिल्वर कलर के ये जीव मेक्सिको देश के गल्फ ऑफ कैलिफोर्निया में पाए जाते हैं। इनकी लंबाई अधिकतम 5 फीट होती है और वजन 54 किलोग्राम तक होता है। शिकारियों के जाल में फंसने के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है।

क्यों कम हो रही वैक्विटा की आबादी?

वैक्विटा दो वजहों से विलुप्त होने की कगार पर है। पहला- शिकारियों के जाल में फंसना और दूसरा- तोतोआबा मछली का खत्म होना। दरअसल, वैक्विटा के खाने का मेन सोर्स तोतोआबा मछली ही है। शिकारियों के जाल में फंसने के कारण इसकी आबादी भी खत्म होती जा रही है। यह भी दुर्लभ मछलियों की कैटेगरी में आ गई है।

वैक्विटा को अब भी बचाया जा सकता है

वैज्ञानिकों के अनुसार, वैक्विटा की कम संख्या को देखते हुए उसे विलुप्त होने वाले जीवों की लिस्ट में शामिल करना एक गलती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, वैक्विटा की कम संख्या को देखते हुए उसे विलुप्त होने वाले जीवों की लिस्ट में शामिल करना एक गलती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की रिसर्चर जैकलीन रॉबिनसन कहती हैं कि वैक्विटा को विलुप्त होने से अब भी बचाया जा सकता है। अगर हम उनके रहने की जगह से जाल हटा दें, तो ये उनके लिए एक जीवनदान बन सकता है। रॉबिनसन के अनुसार, वैक्विटा की कम संख्या को देखते हुए उसे विलुप्त होने वाले जीवों की लिस्ट में शामिल करना एक गलती है। यदि हम चाहें तो इस जीव को बचा सकते हैं।

साइंस जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, वैक्विटा की प्रजाति अभी जेनेटिकली कमजोर नहीं हुई है। वैज्ञानिकों की मानें तो अगले 50 सालों में ये अपनी आबादी बढ़ा सकते हैं। बस इंसानों को इन्हें सर्वाइव करने का एक मौका देना होगा।

DNA पर रिसर्च कर आबादी का अंदाजा लगाया

रॉबिनसन कहती हैं कि इस प्रजाति को बचाना आसान नहीं होगा। इसकी वजह स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों के बीच होने वाला विवाद है।
रॉबिनसन कहती हैं कि इस प्रजाति को बचाना आसान नहीं होगा। इसकी वजह स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों के बीच होने वाला विवाद है।

वैज्ञानिकों ने 1985 से 2017 के बीच पकड़े गए वैक्विटा के DNA पर रिसर्च की। इनका DNA आज के जिंदा जीवों से मेल खाता है। इसके बाद एक कंप्यूटर मॉडल की मदद से इस बात का अंदाजा लगाया कि बेहतर माहौल मिलने पर आखिर कितने सालों बाद इनकी आबादी बढ़ सकती है।

प्रजाति को बचाने में आ सकती हैं बाधाएं

रिसर्चर्स के अनुसार, इस जीव की प्रजाति काफी समय से दुर्लभ है, जिस कारण इसके DNA में जेनेटिक बदलाव काफी कम हो गए हैं। रॉबिनसन कहती हैं कि इस प्रजाति को बचाना आसान नहीं होगा। इसकी वजह स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों के बीच होने वाला विवाद है।

साथ ही, मेक्सिको सरकार को भी डिप्लोमैटिक समस्याओं से जूझना होगा। बता दें कि देश में इसके पहले भी मछलियों के जाल पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्थानीय मछुआरों ने इस फैसले का काफी विरोध किया था।

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