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कोरोना की बढ़ती रफ्तार:लक्षण न होने पर भी तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन, कुछ मामलों में इसकी गति डेल्टा के मुकाबले 7 से 12 गुना ज्यादा

9 दिन पहले
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दक्षिण अफ्रीका में हुई दो रिसर्चों में वैज्ञानिकों ने कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के तेजी से फैलने की वजह का खुलासा किया है। उनके अनुसार, जिन लोगों में ओमिक्रॉन के कोई भी लक्षण नहीं होते, उनसे संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है। कुछ मामलों में ये खतरा कोरोना के दूसरे वैरिएंट्स की तुलना में 7 से 12 गुना ज्यादा होता है।

पहली रिसर्च में कोरोना पॉजिटिविटी रेट मिला 31%

पहली रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि दिसंबर महीने में दक्षिण अफ्रीका में कोरोना पॉजिटिव पाए गए अधिकतर लोगों को वायरस के कोई लक्षण नहीं थे। ऐसे मामले पिछली कोरोना लहरों की तुलना में काफी ज्यादा थे।

ये रिसर्च एचआईवी के मरीजों पर मॉडर्ना कंपनी की कोरोना वैक्सीन के असर को जांचने के लिए की गई थी। रिसर्च में शामिल 230 लोगों में से 31 फीसदी लोग कोरोना पॉजिटिव निकले। इन सैंपल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग में 56 मामले ओमिक्रॉन के निकले। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोरोना के पिछले वैरिएंट्स में असिम्प्टोमेटिक (बिना लक्षण वाला) ट्रांसमिशन रेट 1 से 2.6 फीसदी तक ही होता था। ये ओमिक्रॉन के असिम्प्टोमेटिक ट्रांसमिशन रेट से 7 से 12 गुना कम है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन की लहर में अधिकतर लोगों को लक्षणों का अनुभव नहीं हो रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन की लहर में अधिकतर लोगों को लक्षणों का अनुभव नहीं हो रहा है।

वैक्सीन लगवाने के बावजूद बन सकते हैं ओमिक्रॉन के कैरियर

दूसरी रिसर्च जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन के असर को जांचने के लिए हुए थी। वैज्ञानिकों ने पाया कि जहां बीटा और डेल्टा वैरिएंट के समय असिम्प्टोमेटिक ट्रांसमिशन रेट 2.6 फीसदी था, वहीं ओमिक्रॉन के दौरान ये बढ़कर 16 फीसदी तक हो गया है।

इस रिसर्च में 577 ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें कोरोना के खिलाफ वैक्सीन लग चुकी थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन लगने के बावजूद इन लोगों को ओमिक्रॉन हुआ और ये वैरिएंट के कैरियर बन गए। लक्षणों का पता न चलने पर आबादी में संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया।

संक्रमण के कोई लक्षण नहीं, ऐसे में क्या करें?

वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमिक्रॉन की लहर में अधिकतर लोगों को लक्षणों का अनुभव नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर आपको इन्फेक्शन होगा भी तो पता नहीं चलेगा। इस स्थिति में लगातार मास्क पहनना, हाथ धोना, भीड़-भाड़ में न जाना और वैक्सीन या बूस्टर डोज लगवाना ही कोरोना से बचने के उपाय हैं।

दक्षिण अफ्रीका में नवंबर महीने के आखिरी हफ्ते में कोरोना के मामलों में तेज उछाल आया था। 24 नवंबर को देश ने ओमिक्रॉन के पहले केस को डिटेक्ट कर दुनिया को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि, अब यहां ओमिक्रॉन के नए मामले कम हो गए हैं और ऐसा माना जा रहा है कि नए वैरिएंट के कारण आई कोरोना लहर पिछले वैरिएंट्स की तरह घातक नहीं है।

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