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ओमिक्रॉन पर चौंकाने वाली रिसर्च:पहली बार चूहों में म्यूटेट होकर इंसानों में ट्रांसफर हुआ था नया वैरिएंट, चीनी वैज्ञानिकों का खुलासा

19 दिन पहले

दुनिया भर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है। चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन चूहों में म्यूटेट होकर इंसानों तक पहुंचा है। ये रिसर्च साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित हुई है। जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के इस कॉन्सेप्ट को 'होस्ट जंपिंग' कहा जाता है।

ऐसे हुए ओमिक्रॉन में म्यूटेशन्स

ओमिक्रॉन की शुरुआती जांच में वैज्ञानिकों ने इस वैरिएंट में करीब 50 म्यूटेशन्स देखे थे। अकेले स्पाइक प्रोटीन में ही 32 म्यूटेशन्स मौजूद थे। स्पाइक प्रोटीन ही वायरस को हमारे शरीर के सेल्स (कोशिकाओं) के अंदर प्रवेश करवाता है। ओमिक्रॉन के तेजी से फैलते संक्रमण का कारण इसके म्यूटेशन्स को बताया जाता है। ऐसे में वैज्ञानिकों के मन में ये सवाल उठा कि आखिर ये ओमिक्रॉन आया कहां से?

चूंकि इंसानों और मैमल्स (स्तनधारी जानवरों) के शरीर में कोई भी वायरस इतना ज्यादा म्यूटेट नहीं होता है, वैज्ञानिकों को आशंका हुई कि ओमिक्रॉन असल में होस्ट जंपिंग का मामला है।

आगे की जांच में ये बात सामने आई कि ओमिक्रॉन में मिलने वाले म्यूटेशन्स चूहों में वायरस के म्यूटेशन्स से मिलते-जुलते हैं। साथ ही, ओमिक्रॉन के म्यूटेशन्स चूहों के शारीरिक वातावरण के अनुकूल हैं। यानी ओमिक्रॉन वैरिएंट चूहों के शरीर में आसानी से जीवित रह सकता है।

चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार, ओमिक्रॉन के म्यूटेशन्स चूहों के शारीरिक वातावरण के अनुकूल हैं।
चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार, ओमिक्रॉन के म्यूटेशन्स चूहों के शारीरिक वातावरण के अनुकूल हैं।

पहले इंसानों से चूहों में, फिर चूहों से इंसानों में

रिसर्च में ये दावा किया गया है कि ओमिक्रॉन का बिना म्यूटेशन वाला रूप (मूल रूप) पहले इंसानों से चूहों में ट्रांसफर हुआ। इसके बाद इस वैरिएंट में तेजी से म्यूटेशन्स हुए ताकि ये चूहों को गंभीर रूप से संक्रमित कर सके। फिर ये म्यूटेटिड और घातक वैरिएंट वापस चूहों से इंसानों में ट्रांसफर हुआ। होस्ट जंपिंग की यह प्रक्रिया ओमिक्रॉन के इंटर-स्पीशीज (अंतराजाति) इवोल्यूशन को दर्शाती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा ही कुछ इबोला वायरस और पोलियो वायरस के मामलों में भी देखा गया था। जहां इंसानों में इन वायरस के ज्यादा म्यूटेशन्स नहीं हुए, वहीं जानवरों में ये तेजी से म्यूटेट हुए।

ओमिक्रॉन मात्र 42 दिनों में 110 देशों में फैल चुका है।
ओमिक्रॉन मात्र 42 दिनों में 110 देशों में फैल चुका है।

रिसर्च से पहले हो रही थी इन तीन थ्योरीज पर चर्चा

ओमिक्रॉन की उत्पत्ति कैसे हुई? इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं। चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च से पहले इन तीन थ्योरीज पर विचार किया जा रहा था।

पहली थ्योरी की माने तो ओमिक्रॉन की उत्पत्ति एक ऐसे व्यक्ति में हुई है, जो लंबे समय तक कोरोना से पीड़ित था। दूसरी थ्योरी कहती है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट ऐसी आबादी में इवोल्व हुआ है, जिसमें जीनोम सीक्वेंसिंग न के बराबर हुई है। तीसरी थ्योरी में कहा गया था कि ओमिक्रॉन सबसे पहले चूहे जैसे जानवर में पनपा होगा और उसके बाद ये इंसानों में आया। अब आखरी थ्योरी सच साबित हुई है।

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