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कमाई में लिंग-जाति-धर्म आधारित भेदभाव:देश में महिलाओं और पुरुषों में रोजगार असमानता 100% तक; मुस्लिमों में 17% बेरोजगारी बढ़ी

10 दिन पहले
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भारत में आज भी जाति, धर्म और लिंग के आधार पर कितना भेदभाव हो रहा है, इस बात का अंदाजा ऑक्सफैम इंडिया की नई 'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' से लगाया जा सकता है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिसर्चर्स के मुताबिक लैंगिक भेदभाव के चलते ग्रामीण इलाकों में रोजगार असमानता 100% है। वहीं, शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 98% है।

महिलाओं से 2.5 गुना ज्यादा कमाते हैं पुरुष
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक जैसी शिक्षा और अनुभव के बावजूद पुरुष महिलाओं से 2.5 गुना ज्यादा कमाते हैं। इससे दोनों लिंग के वेतन में 93% का अंतर आ जाता है। गांवों में रोज कमाने वाले पुरुष हर महीने महिलाओं की तुलना में औसत 3,000 रुपए ज्यादा कमाते हैं। पुरुषों और महिलाओं के बीच कमाई में अंतर का 91.1% क्रेडिट भेदभाव को जाता है। उधर, मासिक वेतन पाने वाली औरतों की कम कमाई का 66% कारण जेंडर डिस्क्रिमिनेशन है।

SC/ST समुदाय के साथ भेदभाव
रिपोर्ट में दलित और आदिवासियों की कमाई की तुलना भी सामान्य वर्ग से की गई है। इसके अनुसार, शहर में SC और ST कैटेगरीज के नियमित कर्मचारियों की औसत कमाई 15,312 रुपए है, जबकि सामान्य वर्ग के लोगों की कमाई 20,346 रुपए है। इसका मतलब सामान्य वर्ग के लोग SC/ST समुदाय के लोगों से 33% ज्यादा कमाते हैं।

इसके अलावा खुद का बिजनेस करने वाले सामान्य वर्ग के लोगों की कमाई SC/ST समुदाय के लोगों से एक तिहाई ज्यादा है। रिसर्चर्स का दावा है कि SC/ST समुदाय से होने के बावजूद खेतिहर मजदूरों को सामान्य वर्ग की तुलना में एक चौथाई कम लोन मिलता है।

कोरोना में सबसे ज्यादा मुसलमान बेरोजगार हुए
2020 से शुरू हुई कोरोना महामारी के पहले क्वार्टर में ही मुस्लिमों के बीच बेरोजगारी 17% तक बढ़ गई। 2019-20 में 15 साल या उससे ज्यादा उम्र की शहरी मुस्लिम आबादी में से 15.6% के पास नियमित वेतनभोगी नौकरियां थीं। ठीक इसी वक्त गैर-मुसलमानों में 23.3% लोग नियमित वेतनभोगी नौकरी कर रहे थे। शहरी मुसलमानों को 68% मामलों में सांप्रदायिक भेदभाव की वजह से रोजगार कम मिला है।

कमाई की बात की जाए तो शहरी इलाकों में गैर-मुसलमान हर महीने 20,346 रुपए कमाते हैं, लेकिन मुसलमान 13,672 रुपए ही कमा पाते हैं। खुद का बिजनेस करने वाले गैर-मुस्लिम हर महीने औसत 15,878 रुपए कमा रहे हैं, तो वहीं मुस्लिम 11,421 रुपए ही कमाते हैं।

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