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मलेरिया भी महामारी से कम नहीं:2024 तक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तैयार कर सकती है मलेरिया की वैक्सीन क्योंकि हर 30 सेकंड में इससे एक बच्चे की मौत

एक वर्ष पहले
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  • ब्रिटिश वैज्ञानिक एड्रियन हिल का दावा, 2024 तक अंतिम ह्यूमन ट्रायल पूरा होने के बाद आ सकती है वैक्सीन
  • कहा, वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल अगले साल 4,800 अफ्रीकी बच्चों पर किया गया जाएगा

मलेरिया की वैक्सीन 2024 तक आ सकती है। यह दावा ब्रिटेन के जाने माने साइंटिस्ट एड्रियन हिल ने किया है। जेनर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर एड्रियन के मुताबिक, इसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तैयार कर रही है। मलेरिया की वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल अगले साल 4800 अफ्रीकी बच्चों पर किया जाएगा। इससे पहले हुए क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बेहतर रहे हैं।

एड्रियन के मुताबिक, 2024 तक अंतिम ह्यूमन ट्रायल पूरा होने के बाद वैक्सीन आ सकती है।

मलेरिया की वैक्सीन क्यों जरूरी, ये भी जान लीजिए

1. मलेरिया से हर साल 4 लाख से ज्यादा मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल मलेरिया से 4 लाख से अधिक मौतें होती हैं। 2019 में यह आंकड़ा 4,09,000 था। दुनिया की आधी आबादी को मच्छर से फैलने वाली इस बीमारी का खतरा है।

2. हर 30 सेकंड में एक बच्चे की मलेरिया से मौत
UNICEF के मुताबिक, मलेरिया बच्चों के लिए सबसे बड़ा किलर साबित हो रहा है। दुनियाभर में हर 30 सेकंड में एक बच्चे की मौत मलेरिया से हो रही है। इसके 90 फीसदी मामले अफ्रीका (सहारा) से हैं। इनमें 65 फीसदी जिन बच्चों की मौत हुई, उनकी उम्र 5 साल से कम थी।

3. जहां गर्भवती महिलाएं और बच्चे वहां खतरा ज्यादा
WHO के मुताबिक, मलेरिया का संक्रमण ऐसे क्षेत्रों में अधिक फैलता है जहां गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे हैं। इनमें संक्रमण जल्दी फैलता है और हालत नाजुक होती है। नतीजा मौत के आंकड़े बढ़ते हैं।

4. मलेरिया पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी है
प्रो. एड्रियन कहते हैं, मलेरिया एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी है। अभी कई तरह की दवाओं से मलेरिया का इलाज किया जा रहा है, लेकिन जल्द ही हर साल मलेरिया से होने वाली 5 लाख मौतों को रोका जा सकेगा। इस साल अफ्रीका में कोरोना से ज्यादा मौतें मलेरिया से होंगी।

5. भारत में मामले घटे लेकिन खतरा कम नहीं
WHO की 2019 में जारी रिपोर्ट कहती है, भारत में मलेरिया के मामले घट रहे हैं। 2017 की तुलना में 2018 में यहां मलेरिया के मामले 28 फीसदी तक घटे हैं। भारत मलेरिया से प्रभावित दुनिया के 4 प्रमुख देशों की लिस्ट से बाहर आ गया है।

एक्सपर्ट्स कहते हैं, मामले घटे हैं लेकिन लगातार बचाव करने और अलर्ट रहने की जरूरत है, क्योंकि इसकी वैक्सीन अभी तक आई नहीं है। इसका खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है।

मलेरिया की खोज करने वाले सर रोनाल्ड रॉस के बारे में 6 बड़ी बातें

  • ब्रिटिश डॉक्टर सर रोनाल्ड रॉस ने 20 अगस्त 1897 में कलकत्ता (अब कोलकाता) के प्रेसिडेंसी जनरल हॉस्पिटल में इंसानों में मलेरिया की खोज की।
  • डॉ. रोनाल्ड रॉस ने मच्छर की आंत में मलेरिया के रोगाणु का पता लगाकर यह तथ्य स्थापित किया था कि मच्छर मलेरिया का वाहक है
  • रोनाल्ड रॉस का जन्म 13 मई 1857 को अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में हुआ था, यानी देश में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू होने के सिर्फ तीन दिन बाद।
  • IMS में दाखिले के बाद इनको कलकत्ता या बॉम्बे के बजाय सबसे कम प्रतिष्ठित मद्रास प्रेसीडेंसी में काम करने का मौका मिला। वहां, उनका ज्यादातर काम मलेरिया पीड़ित सैनिकों का इलाज करना था।
  • सिकंदराबाद की भीषण गर्मी, अत्यधिक उमस और खुद मलेरिया के शिकार होते हुए भी उन्होंने एक हजार मच्छरों का डिसेक्शन किया।
  • रॉस 1888 में इंग्लैंड लौट गए, मलेरिया की खोज के लिए उन्हें 1902 में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया।

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