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ब्रिटेन में मरीज घटे, ट्रायल का टेंशन बढ़ा:ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी अब ब्राजील में कोरोना पीड़ितों पर वैक्सीन का ट्रायल करेगी

2 वर्ष पहले
  • ब्राजील की हेल्थ रेग्युलेट्री एजेंसी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को 2 हजार वॉलंटियर पर वैक्सीन का ट्रायल करने की अनुमति दी
  • ब्राजील में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा एक दिन में 1349 को पार कर गया है, यह रोजाना मौत की संख्या बढ़ रही है

ब्रिटेन और यूरोपीय देशों में घटते कोरोना के मरीजों के कारण कई देशों वैक्सीन का ट्रायल अटक रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी अब अपनी वैक्सीन के ट्रायल के लिए ब्राजील जाएगी। ब्राजील में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा एक दिन में 1349 को पार कर गया है। यहां रोजाना होने वाली मौतों  की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 

शोधकर्ता ब्राजील में करेंगे वॉलंटियर्स का चुनाव
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ब्राजील हेल्थ रेग्युलेट्री एजेंसी ने क्लीनिकल ट्रायल के लिए 2 हजार वॉलंटियर्स का अप्रूवल दिया है। जल्द ही हमारे शोधकर्ता वहां जाकर 2 हजार वॉलंटियर चुनेंगे। इस ट्रायल में ब्राजील भी शामिल होगा।

ट्रायल मील का पत्थर साबित होगा
ब्राजील के साओ पाउलो में होने वाले ट्रायल की फंडिंग कर रहे लेमन फाउंडेशन की एक्जीग्यूटिव डायरेक्टर डेनिस मिज्ने का कहना है कि यह ट्रायल ब्राजील के लिए मील का पत्थर साबित होगा। ट्रायल के लिए जिन 2 हजार लोगों को चुना जाना है उनमें से ज्यादातर हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर हैं जो कोरोना से जूझ रहे हैं। 
ट्रायल रुकने का डर था
हाल ही में वैक्सीन तैयार करने वाले ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े जेनर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टहडर एड्रियन हिल ने कहा था कि ट्रायल के लिए 10 हजार लोगों की जरूरत है। अगर ब्रिटेन में मामले घटने के कारण पर्याप्त लोग नहीं मिले तो ट्रायल रोकना पड़ सकता है।

ब्रिटेन के वारविक बिजनेस स्कूल की ड्रग एक्सपर्ट आयफर अली का कहना है कि लोगों का ट्रायल में शामिल होना जरूरी है, ऐसे में संक्रमण का रिस्क लेना होगा। अगर कोरोनावायरस अस्थायी तौर पर खत्म हो गया तो पूरी मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। ऐसी स्थिति में ट्रायल उन क्षेत्रों में शिफ्ट करना होगा, जहां कम्युनिटी संक्रमण के मामले दिख रहे हैं, जैसे ब्राजील और मैक्सिको।

ऐसा इबोला के समय भी हुआ था
कोरोना के मामले ब्रिटेन, यूरोप और अमेरिका में अधिक थे, अब संक्रमण फैलने की दर गिर रही है। ट्रायल के लिए पर्याप्त मरीज नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति 2014 में इबोला के समय भी पश्चिमी अफ्रीका में बनी थी। वैक्सीन महामारी के अंतिम दौर में तैयार हुई थी और टेस्टिंग के लिए मरीज नहीं मिल रहे थे।

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