कोख में ही विकसित हुआ ट्यूमर:नवजात के दिल पर मिला दुर्लभ ट्यूमर, फेफड़ों पर इसका दबाव बढ़ा और जन्म के समय बच्चे का सांस लेना मुश्किल हुआ; सर्जरी करके हटाया गया

6 महीने पहले
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नवजात में ट्यूमर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो दिन के नवजात के दिल पर दुर्लभ ट्यूमर पाया गया। सर्जरी करके ट्यूमर को हटाया गया। बच्चे की सर्जरी दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में की गई। डॉक्टर्स का कहना है, बच्चा जन्म के समय ही ट्यूमर के साथ पैदा हुआ था। इस दुर्लभ ट्यूमर को 'इंट्रापेरिकार्डियल टेराटोमा' कहते हैं। इसकी पुष्टि तब ही हो गई थी जब बच्चा मां की कोख में था।

ट्यूमर के कारण बीपी कम हो रहा था
हॉस्पिटल के सीनियर पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डॉ. राजेश शर्मा कहते हैं, नवजात की हालत नाजुक होने के कारण तत्काल सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। बच्चे के ट्यूमर का आकार उसके हार्ट से भी बड़ा था। इसके कारण उसका ब्लड प्रेशर कम हो रहा था। नवजात को हार्ट-लंग मशीन पर रखने के बाद उसकी सर्जरी की गई।इस तरह ट्यूमर को अलग किया गया।

ईसीजी से बच्चे के हार्ट पर नजर रखी गई
डॉक्टर्स के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के 20 हफ्ते में मां का अल्ट्रासाउंड करते समय बच्चे में ट्यूमर का पता चला था। यह ट्यूमर हार्ट की सतह पर निकला हुआ था। ट्यूमर की पुष्टि होने के बाद हर हफ्ते बच्चे की मॉनिटरिंग की जा रही थी। ईसीजी के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही थी ट्यूमर के कारण बच्चे के हार्ट पर बुरा असर तो नहीं पड़ रहा।

इसलिए जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत हुई
जन्म के समय बच्चे का वजन 3.2 किलो था लेकिन उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। सांस की नली के जरिए उसे ऑक्सीजन दी गई और वेंटिलेटर पर रखा गया। सीटी एंजियो की रिपोर्ट में सामने आया 7 सेंटीमीटर के हिस्से में यह ट्यूमर था। ट्यूमर बड़ा होने के कारण यह हार्ट और फेफड़ों को दबा रहा था। ट्यूमर के कारण फेफड़े प्रभावित हो रहे थे, इसलिए उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।

भविष्य में बच्चे का रेग्युलर ईसीजी करना जरूरी
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के कंसल्टेंट सर्जन डॉ. अशोक मारवाह कहते हैं, ट्यूमर को हटाने के बाद हार्ट और फेफड़ों पर इसका कोई बुरा असर नहीं देखा गया, लेकिन भविष्य में समय-समय पर बच्चे की ईसीजी कराकर फॉलोअप लेना जरूरी है। सर्जरी के बाद बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया है और अच्छी रिकवरी देखी जा रही है।

डॉक्टर्स का कहना है, ऐसे मामलों में डिलीवरी के दौरान खतरा बढ़ जाता है क्योंकि ट्यूमर का असर हार्ट और फेफड़े पर पड़ रहा था।

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