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भूलने की बीमारी बनती जा रही महामारी:रिसर्च में दावा- डिमेंशिया की दवाएं बेअसर; इलाज नहीं, बचाव पर ध्यान देना हाेगा

स्पेन5 महीने पहले
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बुजुर्गों में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) महामारी की तरह फैल रहा है। डॉक्टरों के लिए चिंताजनक यह है कि इससे जुड़ी बीमारी अल्जाइमर के इलाज की क्रेनेजुमाब जैसी दवा बेअसर साबित हुई है। दवा पर हाल के ट्रायल काे लेकर यूनिवर्सिटी काॅलेज ऑफ लंदन के साइकियाट्रिस्ट और डिमेंशिया प्रिवेंशन से जुड़े लैंसेट आयोग के प्रमुख डॉ. गिल लिविंगस्टन ने भी अपनी राय दी है।

डिमेंशिया से बचने के तरीके अपनाना जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि दवाओं के अलावा हमें दूसरे विकल्पों के बारे में भी सोचना चाहिए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दवाओं के अलावा हमें दूसरे विकल्पों के बारे में भी सोचना चाहिए।

डॉ. लिविंगस्टन ने कहा, ‘यह निराशाजनक है। अच्छा होता कि हमारे पास डिमेंशिया पर कारगर दवाएं हाेतीं, लेकिन एकमात्र रास्ता दवा ही नहीं हैं। हमें इसके विकल्पों के बारे में सोचना हाेगा।’ स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का कहना है कि डिमेंशिया से बचाव के दूसरे तरीकों पर काम करना हाेगा। डिमेंशिया के जोखिम वाले कारणाें काे खत्म करने पर ज्यादा ध्यान देना हाेगा।

रिसर्च में पाया गया है कि 40% डिमेंशिया का कारण युवा अवस्था में ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, उम्र बढ़ने के साथ कम सुनाई देना, कम या धुंधला दिखाई देना आदि हैं। अब इलाज से ज्यादा बचाव के लिए ध्यान देना जरूरी है।

डिमेंशिया के 62% केस आंख की रोशनी से जुड़े

एक रिसर्च में सामने आया है कि डिमेंशिया के 62% केस आंख की के धुंधला पड़ने से जुड़े हैं।
एक रिसर्च में सामने आया है कि डिमेंशिया के 62% केस आंख की के धुंधला पड़ने से जुड़े हैं।

अमेरिका में आंखों की राेशनी गायब हाेने पर की गई स्टडी में पता चला कि डिमेंशिया के 62% केस आंख की राेशनी के धुंधला पड़ने से जुड़े हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि आंखों काे स्वस्थ रखकर हर साल एक लाख लाेगाें काे डिमेंशिया से बचाया जा सकता है। डॉ. जोशुआ एर्लिच ने कहा कि आंखों की जांच और समय रहते इलाज करके डिमेंशिया काे राेका जा सकता है।

5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया के शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो दुनिया में 5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। इनमें से 60% मरीज लो या मिडिल इनकम देशों में रहते हैं। भूलने की बीमारी के ज्यादातर मरीज बुजुर्ग ही होते हैं। WHO के मुताबिक, साल 2030 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 7.8 करोड़ हो जाएगी। वहीं, साल 2050 तक यह आंकड़ा 13.9 करोड़ पर पहुंच जाएगा।