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रंग-बिरंगे होते थे डायनासोर:रिसर्च में दावा- जुरासिक पार्क में दिखाए गए फीके रंग नहीं, चमकीले रंगों के होते थे डायनासोर

लंदन7 महीने पहले
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हजारों साल पहले विलुप्त हो चुके डायनासोर के ऊपर आज भी शोध किए जा रहे हैं। अब तक हमने फिल्मों में देखा है कि डायनासोर ग्रे और ब्राउन जैसे फीके रंग के होते हैं। हालांकि, एक नई रिसर्च में ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि पंख वाले डायनासोर चमकीले और खुले रंग के हुआ करते थे।

साल 1996 में पहली बार पंखों वाले डायनासोर के फॉसिल्स (जीवाश्म) मिले थे। तब वैज्ञानिकों ने इनमें कुछ बेहद छोटे गोलाकार के स्ट्रक्चर नोटिस किए थे। उनका कहना था कि ये स्ट्रक्चर डायनासोर पर बैक्टीरिया के फॉसिल्स हैं। पर ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के रिसर्चर जेकब विनथर की मानें तो ये दावा पूरी तरह गलत है।

बैक्टीरिया नहीं, ये रंग के फॉसिल्स थे

ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि डायनासोर चमकीले और खुले रंग के हुआ करते थे।
ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि डायनासोर चमकीले और खुले रंग के हुआ करते थे।

विनथर का कहना है कि ये किसी बैक्टीरिया के फॉसिल्स नहीं, बल्कि स्याही के फॉसिल्स हैं। बता दें कि इससे पहले विनथर ने स्क्विड और ऑक्टोपस के पूर्वजों पर काफी रिसर्च की है। उस दौरान उन्होंने पाया कि इन फॉसिल्स के ऊपर बेहद छोटे स्ट्रक्चर असल में उस स्याही के फॉसिल्स हैं, जो इन जीवों की त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार है। ये दिखने में बेहद छोटी गेंदों की तरह होते हैं।

विनथर के मुताबिक, ये गेंदें मेलेनोसोम हैं, जो मेलेनिन की बूंदें हैं। मेलेनिन एक पिगमेंट होता है जो जानवरों में बाल, त्वचा, आंखों और पंखों के रंग के लिए जिम्मेदार होता है। स्क्विड और ऑक्टोपस के बाद अब डायनासोर में भी मेलेनोसोम की ही पुष्टि हुई है।

कई आकारों के हो सकते हैं पिगमेंट के फॉसिल्स

डायनासोर के पिगमेंट केवल गोलाकार नहीं, बल्कि कई आकारों में संरक्षित रह सकते हैं।
डायनासोर के पिगमेंट केवल गोलाकार नहीं, बल्कि कई आकारों में संरक्षित रह सकते हैं।

लंबे समय से दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मानना था कि जानवरों का पिगमेंट फॉसिल नहीं बन सकता, लेकिन इस रिसर्च से ये पता चलता है कि डायनासोर के साथ-साथ उनके पिगमेंट भी पूरी तरह संरक्षित रह सकते हैं। इस पिगमेंट की मदद से हम डायनासोर के असली रंग का भी पता लगा सकते हैं। दरअसल, पिगमेंट केवल गोलाकार नहीं, बल्कि कई आकारों में संरक्षित रह सकते हैं। हर आकार अलग-अलग रंग को दर्शाता है।

तो आखिर किस रंग के थे डायनासोर?

दुनिया में पहली बार जिस पंखों वाले डायनासोर की खोज हुई थी, वो धारीदार पूंछ के साथ एक रकून जैसा दिखता था।
दुनिया में पहली बार जिस पंखों वाले डायनासोर की खोज हुई थी, वो धारीदार पूंछ के साथ एक रकून जैसा दिखता था।

विनथर की मानें तो बड़े, मोटे आकार के मेलेनोसोम नीले या ग्रे रंग को दर्शाते हैं। वहीं पतले, लंबे आकार के मेलेनोसोम इंद्रधनुषी रंगों को दर्शाते हैं।

विनथर कहते हैं कि जुरासिक पार्क फिल्म के किचन सीन में बच्चों के पीछे भागता हुआ वेलोसिरैप्टर डायनासोर असल में इंद्रधनुषी रंग का था। उसके पंखों और त्वचा का रंग मोर या हमिंगबर्ड के रंगों की तरह चमकीला होगा। हालांकि, फिल्म में उसके रंग को काफी फीका दिखाया गया।

वहीं दुनिया में पहली बार जिस पंखों वाले डायनासोर की खोज हुई थी, वो धारीदार पूंछ के साथ एक रकून जैसा दिखता था। उसकी त्वचा का रंग प्राकृतिक रूप से कैमोफ्लाज था। इस डायनासोर का नाम सिनोसॉरोप्टेरिक्स है।

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