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वैक्सीन विवाद पर रूसी स्वास्थ्य मंत्री की सफाई:हमारी वैक्सीन पर लगे आरोप बेबुनियाद, यह बाजार में बढ़ते कॉम्पिटीशन से प्रेरित; टीके का पहला पैकेज अगले दो हफ्तों के अंदर उपलब्ध होगा

5 महीने पहले
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रूसी स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको मुताबिक, वैक्सीन पर लगे आरोप निराधार और तर्कहीन हैं - Dainik Bhaskar
रूसी स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको मुताबिक, वैक्सीन पर लगे आरोप निराधार और तर्कहीन हैं
  • मिखायल के मुताबिक, वैज्ञानिकों को हमारी वैक्सीन से इसलिए दिक्कत हो रही है क्योंकि वे चिढ़ रहे हैं
  • अमेरिकी हेल्थ एंड ह्यूमन सेक्रेट्री एलेक्स एजर के मुताबिक, वैक्सीन से जुड़ा डाटा पारदर्शी होना जरूरी, यही प्रमाणित करेगा कि वैक्सीन कितनी सुरक्षित है और लोगों को बीमारी बचा पाएगी या नहीं

रूसी सरकार ने अपनी वैक्सीन पर उठते सवालों को खारिज किया है। दुनियाभर के विशेषज्ञ इस वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं लेकिन इन पर सफाई देते हुए रूसी स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने कहा, हमारी वैक्सीन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं। यह आरोप बाजार में बढ़ते कॉम्पिटीशन से प्रेरित हैं। ये आरोप निराधार और तर्कहीन हैं। मिखायल के मुताबिक, वैज्ञानिकों को हमारी वैक्सीन से इसलिए दिक्कत हो रही है क्योंकि वे चिढ़ रहे हैं

वैक्सीन का पहला पैकेज दो हफ्तों में मिल जाएगा
मुराशको इंटरफैक्स समाचार एजेंसी से कहा, वैक्सीन का पहला पैकेज अगले दो हफ्तों के अंदर उपलब्ध होगा। वैक्सीन के ये डोज विशेषतौर पर डॉक्टरों के लिए होंगे। अक्टूबर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।

गंभीरता से देखना होगा, क्या यह प्रभावी है : एम्स डायरेक्टर
एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अगर रूस की वैक्सीन सफल होती है, तो हमें गंभीरता से देखना होगा कि क्या यह सचमुच सुरक्षित और प्रभावी है। उन्होंने कहा, भारत में वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है। वैक्सीन की सुरक्षा और साइड इफेक्ट की जांच करना जरूरी है।

वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के दस्तावेजों ने सवालों का दायरा बढ़ाया

दुनियाभर में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी पर सवाल उठ रहे हैं। 11 अगस्त को दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के दौरान पेश किए दस्तावेजों से कई खुलासे हुए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, इसे जानने के लिए पूरी क्लीनिकल स्टडी हुई ही नहीं।

डेली मेल की खबर के मुताबिक, ट्रायल के नाम पर 42 दिन में मात्र 38 वॉलंटियर्स को वैक्सीन की डोज दी गई। ट्रायल के तीसरे चरण पर भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

रूसी सरकार का दावा था कि वैक्सीन के कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखे, जबकि दस्तावेज बताते हैं कि 38 वॉलंटियर्स में 144 तरह के साइड इफेक्ट देखे गए हैं। ट्रायल के 42 वें दिन भी 38 में से 31 वॉलंटियर्स इन साइडइफेक्ट से जूझते दिखे। वॉलंटियर्स को डोज लेने के बाद कई तरह दिक्कतें हुईं।

WHO का कहना है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया, ऐसे में इस वैक्सीन की सफलता पर भरोसा करना मुश्किल है।
WHO का कहना है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया, ऐसे में इस वैक्सीन की सफलता पर भरोसा करना मुश्किल है।

WHO ही नहीं, दुनियाभर के विशेषज्ञ सवाल उठा रहे

  • रशियन वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन से पहले वहां के विशेषज्ञों ने इसकी सुरक्षा और साइडइफेक्ट की आशंका जताई थी। मॉस्को की एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल ट्रायल ऑर्गोनाइजेशन (ACTO) ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखा था।
  • मॉस्को एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल ट्रायल ऑर्गोनाइजेशन की एग्जीक्युटिव डायरेक्टर स्वेतलाना जावीडोवा के मुताबिक, क्यों सभी कार्पोरेशन नियमों का पालन कर रहे हैं लेकिन रशिया के लोग नहीं? क्लीनिकल ट्रायल की गाइडलाइन हमारे खून में हैं जिसे कभी नहीं बदला जा सकता है। कोई भी अप्रमाणित वैक्सीन इंसानों को लगने के बाद क्या होगा, हम नहीं जानते।
  • WHO ने कहा है, रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है, ऐसे में इस वैक्सीन की सफलता और सुरक्षा पर भरोसा करना मुश्किल है। वैक्सीन उत्पादन के लिए कई गाइडलाइंस बनाई गई हैं, जो टीमें भी ये काम कर रहीं हैं, उन्हें इसका पालन करना ही होगा।
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर फ्रांसुआ बैलक्स कहते है, रशिया का ऐसा करना शर्मनाक है। यह बेहद घटिया फैसला है। ट्रायल की गाइडलाइन को नजरअंदाज करके वैक्सीन को बड़े स्तर पर लोगों को देना गलत है। इंसान की सेहत पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा।
  • जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान के मुताबिक, रशियन वैक्सीन की पर्याप्त जांच नहीं की गई। इसे लोगों को देना खतरनाक साबित हो सकता है। वैक्सीन सबसे पहले बने, इससे ज्यादा जरूरी है यह सुरक्षित हो।
  • अमेरिका के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फॉकी ने वैक्सीन पर सवाल उठाते हुए कहा, बिना पूरे ट्रायल हुए वैक्सीन को बांटने की तैयारी करना समस्या को और बढ़ा सकता है। नेशनल जियोग्राफिक को दिए इंटरव्यू में डॉ. एंथनी ने कहा, मैं उम्मीद करता हूं रशिया ने वाकई में वैक्सीन को प्रमाणित कराया हो और यह सुरक्षित साबित हो।
  • अमेरिकी हेल्थ एंड ह्यूमन सेक्रेट्री एलेक्स एजर के मुताबिक, सबसे जरूरी बात है कि वैक्सीन से जुड़ा हर डाटा पारदर्शी हो। यही इसे प्रमाणित करेगा कि वैक्सीन कितनी सुरक्षित है और लोगों को बीमारी बचा पाएगी या नहीं।

कुछ देश रूसी वैक्सीन के पक्ष में भी

दुनिया के कुछ देश रूसी वैक्सीन के पक्ष में भी हैं, वे इसे सपोर्ट कर रहे हैं। रूस की वैक्सीन पर उठते सवालों के बीच फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने इस पर भरोसा जताया है। उनका कहना है, जब भी वैक्सीन आएगी तो जनता के बीच जाकर पहले मैं इसे लगवाउंगा। वैक्सीन का पहला प्रयोग मुझ पर करें। मुझे कोई दिक्कत नहीं। रशिया ने हाल ही में रोड्रिगो को वैक्सीन लगवाने का ऑफर दिया था जिसे उन्होंने स्वीकार किया है।

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