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  • Scientists Convert Used Plastic Bottles Into Vanilla Flavouring Says University Of Edinburgh Research

प्लास्टिक वेस्ट अब बेकार नहीं:दुनिया में पहली बार प्लास्टिक के कचरे से बनाया गया वनीला फ्लेवर, इसका इस्तेमाल फूड और फार्मा इंडस्ट्री में हो सकेगा

3 महीने पहले
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  • एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ई-कोली बैक्टीरिया संग किया प्रयोग
  • कहा, प्लास्टिक वेस्ट से बहुमूल्य केमिकल बनाने का पहला उदाहरण

वैज्ञानिकों ने पहली बार प्लास्टिक के कचरे से आइसक्रीम में मिलाया जाने वाला वनीला फ्लेवर तैयार किया है। इसे तैयार करने में जेनेटिकली मोडिफाइड बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया गया है।

प्लास्टिक को वनीला (वेनिलीन) में कन्वर्ट करने वाली एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जोएना सैडलर का कहना है, प्लास्टिक के कचरे से बहुमूल्य केमिकल बनाने का यह पहला उदाहरण है।

प्लास्टिक कचरा अब बेकार नहीं
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के स्टीफन वॉलेस का कहना है, हमारी रिसर्च उस सोच को चुनौती देती है जो मानते हैं प्लास्टिक का कचरा एक समस्या हैं। यह कार्बन का नया सोर्स है जिससे कई उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

वनीला फ्लेवर कैसे बना और यह कितने काम का है

  • ग्रीन केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, सबसे पहले वैज्ञानिकों ने ई-कोली बैक्टीरिया के जीनोम में बदलाव किया। फिर प्लास्टिक से तैयार टेरिप्थेलिक एसिड को बैक्टीरिया की मदद से 79 फीसदी तक वेनिलीन में बदला।
  • वैनिलीन का इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों के अलावा कॉस्मेटिक में किया जाता है। इसके अलावा फार्मा इंडस्ट्री, साफ-सफाई करने वाले प्रोडक्ट और हर्बीसाइड को तैयार करने में भी होता है।
  • दुनियाभर में वनीला बीन्स की डिमांड बढ़ रही है। 2018 में डिमांड 37 हजार टन थी, जो सप्लाई के मुकाबले कहीं अधिक ज्यादा थी। कई प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने के कारण इसकी मांग अधिक है।
  • दुनियाभर में सप्लाई होने वाले वेनिलीन का 85 फीसदी हिस्सा जीवाश्म ईधन से तैयार किया जाता है। शेष 15 फीसदी दूसरे तरीकों से बनाया जाता है।

मात्र 14 फीसदी प्लास्टिक रिसायकल होता है
दुनिया में हर मिनट 10 लाख बोतलें बेची जाती हैं। इसमें से मात्र 14 फीसदी ही रिसायकल की जाती हैं। वर्तमान में रिसायकल की जाने वाली बोतलों से कपड़े और कार्पेट ही तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन नई खोज के बाद अब वनीला फ्लेवर भी बनाया जा सकेगा।

वेनिलीन तैयार करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि अब बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के कचरे पर काम किया जा सकेगा। इससे तैयार होने वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल परफ्यूम में भी किया जा सकेगा।