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कॉफी की बढ़ती डिमांड पूरा करने का नया विकल्प:वैज्ञानिकों ने लैब में तैयार की आर्टिफिशियल कॉफी, यह बिल्कुल ओरिजनल जैसी;  इस नए तरीके से दुनियाभर में पेड़ों की कटाई भी रोकी जा सकेगी

19 दिन पहले
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  • फिनलैंड के वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने लैब में विकसित की यह नई कॉफी
  • इसे अरेबिका की पत्तियों से तैयार किया, दुनियाभर में कॉफी का 56% तक प्रोडक्शन इसी से होता है

दुनियाभर में कॉफी की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए वैज्ञानिकों ने लैब में आर्टिफिशियल कॉफी तैयार की है। वैज्ञानिकों का दावा है, यह स्वाद और खुशबू में ओरिजनल कॉफी जैसी ही है। इस कॉफी को फिनलैंड के वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर ने लैब में विकसित किया है। फिनलैंड उन देशों में शामिल है, जहां कॉफी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

सेल्युलर एग्रीकल्चर से तैयार हुई कॉफी
लैब में कॉफी को तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने इसके सबसे फेमस पौधे अरेबिका को चुना। अरेबिका की कोशिकाओं के सैम्पल्स लिए गए। कोशिकाओं के सैम्पल से लैब में जेनेटिकली इंजीनियर्ड कॉफी तैयार की गई।

कोशिकाओं से कॉफी तैयार करने के इस तरीके को सेल्युलर एग्रीकल्चर कहते हैं। आसान भाषा में समझें तो पौधों की कोशिकाओं को एक्सट्रैक्ट करके इसे तैयार किया गया है। इसी तरीके से वैज्ञानिक लैब में कृत्रिम मांस और दूध को तैयार कर चुके हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है, दुनियाभर में कॉफी का 56 फीसदी तक प्रोडक्शन अरेबिका पौधे की मदद से होता है। इसीलिए लैब में कॉफी तैयार करने के लिए इसी पौधे का इस्तेमाल किया गया है।

नई कॉफी की खुशबू और टेस्ट ओरिजनल जैसी
शोधकर्ता डॉ. हीको रिशर कहते हैं, हमारी टीम ने इस कॉफी की खुशबू और स्वाद की जांच की। जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई। इसकी खुशबू आश्चर्यचकित करती है, यह बिल्कुल ओरिजनल कॉफी जैसी है। नए तरीके से तैयार कॉफी को पीने का अनुभव शानदार रहा है।

कॉफी के 'अरेबिका' की पत्तियों को एक्सट्रैक्ट करके कॉफी तैयार की गई।
कॉफी के 'अरेबिका' की पत्तियों को एक्सट्रैक्ट करके कॉफी तैयार की गई।

कोशिकाओं से कॉफी तैयार करने का आइडिया 47 साल पुराना
पौधे की कोशिकाओं से भी कॉफी तैयार की जा सकती है। इसका आइडिया 1974 में प्लांट साइंटिस्ट पी एम टाउंसले ने दिया था। फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 47 साल पुराने इस आइिडए पर काम किया और लैब में कॉफी तैयार की।

वैज्ञानिकों का कहना है, लैब में कॉफी तैयार करने का नया तरीका बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन करने में मदद करेगा।
वैज्ञानिकों का कहना है, लैब में कॉफी तैयार करने का नया तरीका बड़े स्तर पर इसका प्रोडक्शन करने में मदद करेगा।

नए तरीके से पेड़ों की कटाई को रोका जा सकेगा
रिसर्च कहती है, लैब में कॉफी तैयार करने का नया तरीका इसके प्रोडक्शन के लिए नया विकल्प साबित होगा। दुनियाभर में कॉफी की डिमांड बढ़ने के कारण इसके नए पौधे लगाने के लिए पुराने दूसरे पेड़ काटे जा रहे हैं और जमीन की डिमांड बढ़ रही है। कॉफी की डिमांड के कारण तेजी से बढ़ती वनों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है। लैब में अधिक मात्रा में कॉफी तैयार करके वनों की कटाई को रोका जा सकेगा।

सेल्युलर एग्रीकचर तकनीक से तैयार कॉफी खुशबू और स्वाद के मामले में ओरिजनल कॉफी जैसी ही है।
सेल्युलर एग्रीकचर तकनीक से तैयार कॉफी खुशबू और स्वाद के मामले में ओरिजनल कॉफी जैसी ही है।

2025 तक मार्केट में उपलब्ध कराने का दावा
शोधकर्ता रिशर कहते हैं, इस नई कॉफी को बड़े स्तर पर मार्केट में उपलब्ध कराने के लिए मात्र 4 साल का वक्त लगेगा। एप्रूवल के बाद 2025 तक यह कॉफी मार्केट में उपलब्ध हो पाएगी। अमेरिकी लोगों तक इसे पहुंचाने के लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की अनुमति जरूरी होगी।

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