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अमेरिकी रिसर्च में दावा:रीढ़ की हड्डी में परेशानी मेंटल हेल्थ पर असर डालती है, इससे एंग्जाइटी और डिप्रेशन का खतरा

मिशिगनएक महीने पहले
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आपकी मेंटल हेल्थ खराब होने के पीछे चिंता के अलावा भी कई वजहें हो सकती हैं। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में बताया है कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी से जूझ रहे 80% लोगों को मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी होती हैं।

ऐसे हुई रिसर्च

इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने दो तरह के एडल्ट्स के डेटा का एनालिसिस किया। पहले वो जिन्हें रीढ़ की हड्डी में चोट या परेशानी थी। इनकी संख्या 9 हजार से ज्यादा थी। दूसरे वो जिन्हें इस तरह की कोई समस्या नहीं थी। इनकी संख्या 10 लाख से ज्यादा थी।

वैज्ञानिकों ने पाया कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को नींद न आने और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं थीं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को नींद न आने और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं थीं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को चिंता संबंधी विकारों से लेकर नींद न आने और ब्रेन फॉग तक की समस्याएं थीं। वैसे तो एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी परेशानियां स्पाइनल चोट का रिजल्ट नहीं होतीं, लेकिन स्वस्थ लोगों की तुलना में ऐसे लोगों में ये बीमारियां ज्यादा हो सकती है।

क्रोनिक पेन भी मानसिक बीमारियों का कारण

रिसर्च में कहा गया है कि रीढ़ की हड्डी में क्रोनिक पेन यानी लंबे समय तक रहने वाला दर्द भी इंसान में मानसिक बीमारियां पैदा कर सकता है। कई लोगों में रीढ़ की हड्डी में चोट से नहीं बल्कि लंबे समय तक रहने वाले दर्द से मेंटल हेल्थ प्रॉबलम्स देखी गईं।

रिसर्च में बताया है कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी से जूझ रहे 80% लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं।
रिसर्च में बताया है कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी से जूझ रहे 80% लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं।

क्या है इन परेशानियों का समाधान?

वैज्ञानिकों का कहना है कि डॉक्टर्स को रीढ़ की हड्डी की समस्या से जूझ रहे मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि मरीज में मेंटल हेल्थ प्रॉबलम्स के कोई लक्षण दिखते हैं तो उन्हें प्रेरित करना चाहिए कि वे बीमारी का इलाज करवाएं।

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