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चिंता नींद उड़ा देती है:रात में परेशानियों को लिखकर दिन में विचार करें, स्लीप क्वालिटी बेहतर होगी

4 दिन पहले
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अच्छी नींद स्वस्थ शरीर और स्वस्थ दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। जब आप बहुत कम सोते हैं तो दिमाग का लचीलापन या इनपुट समझने की क्षमता प्रभावित होती है। मस्तिष्क दिन में सीखी गई बातों का ढंग से एनालिसिस नहीं कर पाता है। इसके अलावा अच्छी नींद मस्तिष्क में बनने वाले हानिकारक केमिकल्स को भी दूर करती है। लगातार कम नींद से डिप्रेशन, हाई बीपी, माइग्रेन आदि का खतरा बढ़ता है। जल्दी बीमार होने और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

नींद को प्रभावित करती है चिंता
नींद आने पर ही बिस्तर पर लेटें। बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद भी यदि नींद नहीं आ रही तो बिस्तर छोड़ दें। दरअसल लेटे हुए जागने से शरीर धीरे-धीरे इसका आदी हो जाता है। फिर नींद आना और कठिन हो जाता है। हल्का संगीत सुनें, मेडिटेशन करें जब लगे कि नींद आ रही है तो सोने के लिए जाएं।

दिन में करें परेशानियों पर विचार
अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक एरिक प्रथेर के अनुसार समस्याओं को लेकर रात में चिंतित होने के बजाय दिन का एक समय निर्धारित कर लें। जैसे किसी बात को लेकर चिंतित हों उसे नोट कर लें या हल के लिए परेशान हुए बिना केवल उसके बारे में सोचें।

यदि आप लगातार ऐसे करते हैं तो रात में चिंता नहीं होगी। यदि ऐसा होता भी है तो खुद को याद दिलाएं कि इसके लिए आपने दिन का समय तय कर रखा है। इसके अलावा रात में सोने के लिए लगभग दो घंटे पहले से मानसिक रूप से तैयारी शुरू कर दें।

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