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अब चलते-फिरते बनेगी बिजली:लकड़ी की जमीन पर इंसानों की चहलकदमी से बनेगी बिजली, इससे एलईडी बल्ब जलाए जा सकेंगे, जानिए इससे कैसे तैयार होती है इलेक्ट्रिसिटी

23 दिन पहले
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अब लकड़ी की फर्श से बिजली बनाई जा सकेगी। इस फर्श पर लोगों की चहलकदमी बिजली पैदा होगी। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐसा वुडन नैनोजेनरेटर तैयार किया है, जिस पर पैर पड़ते ही बिजली पैदा होती है। इससे एलईडी लाइट बल्ब जलाए जा सकते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है, लकड़ी आसानी से और सस्ती कीमत पर मिलने के कारण इस नैनोजेनरेटर को घरों में लगाना किफायती भी साबित होगा।

लकड़ी की फर्श से ऐसे बनती है बिजली
जर्नल मैटर में पब्लिश रिसर्च कहती है, बिजली तैयार करने का काम नैनोजेनरेटर करता है। इस नैनोजेनरेटर को तैयार करने में लकड़ी के दो टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। लकड़ी के एक तरफ पॉलीडीमेथाइलसिलोक्सेन (PDMS) और दूसरी तरफ जियोलिटिक इमिडेजोलेट फ्रेमवर्क-8 (ZIF-8) की लेयर चढ़ाई गई है।

ये दोनों केमिकल बिजली जनरेट करने के दौरान इलेक्ट्रॉन के आकर्षित करने और छोड़ने के लिए जिम्मेदार हैं। इसमें लकड़ी का एक हिस्सा पॉजिटिव और एक निगेटिव चार्ज की तरह काम करता है।

इन लकड़ी के दोनों टुकड़ों को दो इलेक्ट्रोड के बीच में रखा गया है। जब इस लकड़ी पर कोई इंसान चलता है तो इन्हें एनर्जी मिलती है और चार्ज हो जाते हैं। इससे ही बिजली पैदा होती है। इस बिजली का इस्तेमाल एलईडी बल्ब को जलाने में किया जा सकता है। विज्ञान की भाषा में इसे ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट कहते हैं।

प्रोटोटाइप तैयार किया गया

शोधकर्ताओं का कहना है, नैनोजेनरेटर एक प्रोटोटाइप है। भविष्य में इसे कमरों में लगाया जा सकेगा और चल-फिरते बिजली पैदा की जा सकेगी। इस तरह बिजली पैदा करने में कितना खर्च आएगा, शोधकर्ताओं ने यह साफ नहीं किया है। यह रिसर्च स्विटजरलैंड की ईटीएच जूरिख, चीन की चॉन्गकिंग यूनिवर्सिटी और नॉर्थवेस्टर्न की इलिनॉयस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है।

इसलिए लकड़ी का चुनाव किया
शोधकर्ताओं का कहना है, लकड़ी सस्ता, बेहतरीन और आसानी से उपलब्ध होने वाला मैटेरियल है। ये इंटीरियर के हिसाब से भी खूबसूरत दिखती है। भविष्य में तैयार होने वाली स्मार्ट बिल्डिंग्स में ऐसे एनर्जी हार्वेस्टिंग फ्लोर लगाकर बिजली बनाई जा सकेगी। नैनोजेनरेटर के ऊपर और नीचे एक-एक लकड़ी की एक्स्ट्रा लेयर होने के कारण यह सीधेतौर पर इंसान से टच नहीं होता।

शोधकर्ता कहते हैं, लकड़ी न होने पर इस नैनोजेनरेटर को तैयार करना काफी मुश्किल साबित होगा। लकड़ी इसलिए जरूरी है क्योंकि यह ट्राइबोन्यूट्रल होती है और इसमें से एक भी इलेक्ट्रॉन खोने का खतरा नहीं होता।

किस तरह की लकड़ी इसके लिए सबसे बेहतर है, इस पर भी रिसर्च की गई। रिसर्च में सामने आया कि नैनोजेनरेटर को तैयार करने के लिए स्प्रस नाम की लकड़ी बेहतर है। यूरोप में सबसे ज्यादा इसी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। यह वहां सस्ती और आसानी से उपलब्ध है।

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