अलर्ट करने वाली रिसर्च:घंटों टीवी देखने की आदत से दिमाग सिकुड़ सकता है, याद्दाश्त और सोचने समझने की क्षमता भी घट जाती है

6 महीने पहले
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  • अल्बामा और कोलम्बिया यूनिवर्सिटी की रिसर्च में शोधकर्ताओं ने किया दावा
  • कहा- लगातार बैठे रहने से फिजिकल एक्टिविटी घटती है, नतीजा दिमाग पर असर होता है

घंटों टीवी देखने की आदत का सीधा असर दिमाग पर पड़ सकता है। दिमाग सिकुड़ सकता है। याद्दाश्त और सोचने-समझने की क्षमता कम हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है, लगातार बैठे रहने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, नतीजा इसका असर दिमाग पर होता है।

यह दावा बर्मिंघम की अल्बामा यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क की कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी संयुक्त रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च 50 से 70 साल की उम्र के लोगों पर की है। इनकी टीवी देखने की आदत का दिमाग पर क्या असर पड़ा है, इसे रिसर्च में समझने की कोशिश की गई है।

सोचने-समझने की क्षमता 6.9% घटी
45 से 64 साल की उम्र में टीवी देखने की आदत को कंटोल में रखते हैं तो भविष्य में ब्रेन स्वस्थ रहता है। शोधकर्ताओं का कहना है, रिसर्च में शामिल 10,700 लोगों के ब्रेन को स्कैन किया गया। ये टीवी कब और कितना देखने हैं, इसे जुड़े सवाल-जवाब किए गए। इनका मेमोरी, लैंग्वेज और ब्रेन स्पीड टेस्ट लिया गया। रिसर्च में सामने आया कि 70 साल की उम्र में लम्बे समय तक टीवी देखने वालों की सोचने-समझने की क्षमता 6.9 फीसदी तक घट गई।

स्टडी में शामिल लोगों का कहना था, फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज करने पर भी उनकी टीवी देखने की आदत में कोई बदलाव नहीं आया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान सामने आया कि जो टीवी अधिक देखते हैं उनके ब्रेन में मौजूद ग्रे मैटर में कमी आई, जबकि कम टीवी देखने वालों के ब्रेन में ऐसा नहीं था।

क्या होता है ग्रे मैटर
ब्रेन में मौजूद ग्रे मैटर ही इंसान को मसल्स कंट्रोल करने, सुनने, देखने, मेमोरी और मस्तिष्क से जुड़े दूसरे काम करने में मदद करता है। ग्रे मैटर एक तरह का ब्लैक टिश्यू है जो ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड में पाया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है, जिस इंसान में यह अधिक होता है उसकी सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से बेहतर होती है।

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