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इसलिए नहीं तपा नौतपा:खगोलीय घटना से बादल बनने के कारण नहीं तपा 'नौतपा', ग्रहण की तरह नौतपा को वैज्ञानिक रूप से समझने की जरूरत: सारिका घारू

नई दिल्ली17 दिन पहले
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सारिका घारू का कहना है, संभवत: एक हजार साल भारत के मध्यभाग में तीव्र गर्मी होने से इसे नौतपा का नाम दिया गया। - Dainik Bhaskar
सारिका घारू का कहना है, संभवत: एक हजार साल भारत के मध्यभाग में तीव्र गर्मी होने से इसे नौतपा का नाम दिया गया।

नौतपा विदाई की बेला में है। तूफान और बादलों ने बाधा बनकर न लू चलने दी और न तपिश का रिकॉर्ड बढ़ाया। नौतपा के शुरु होते ही लोग ऐसी मानसिक तैयारी में जुट जाते हैं जैसे कड़कड़ाती ठंड के बाद अगले ही दिन पसीने छूटने वाले हों। लेकिन हर साल 25 मई से 2 जून तक पड़ने वाले नौतपा की खगोलीय घटना में जब बादल आ जाते हैं तो लगता है कि नौतपा बन गया लेकिन तपा नहीं।

ऐसे हुई थी नौतपा की शुरुआत
नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने एक मॉडल की मदद से नौतपा का विज्ञान बताया। सारिका घारू कहती हैं, जब सूर्य की परिक्रमा करते हुए 365 दिन बाद पृथ्वी उसी स्थिति में आ जाती है जबकि सूर्य के पीछे वृषभ तारामंडल का रोहिणी तारे में आ जाता है। इसके पहले के नौ दिन नौतपा कहलाते हैं।

वर्तमान में हर साल 25 मई को सूर्य के पीछे रोहिणी तारा आ जाता है। सूर्य के पीछे रोहिणी तारा आने से नौतपा की शुरुआत सन् 1000 में 11 मई को हुई थी। सन् 1200 को 13 मई और 1400 में 17 मई से नौतपा शुरू हुआ था। संभवतः एक हजार साल पहले इस अवधि में भारत के मध्यभाग में तीव्र गर्मी होने से इसे नौतपा का नाम दिया गया होगा।

मानसून पहुंचने से पहले मौसम में बदलाव
सारिका ने बताया कि पृथ्वी के अक्ष के 26,000 सालों में घूमने की घटना के कारण यह लगभग हर साल 100 साल में रोहिणी तारे के सामने आने की तारीख आगे बढ़ती जा रही है। वर्तमान समय में यह घटना अब हर साल 25 मई को होने लगी है। 1 जून को केरल में मानसून पहुंचने के पहले मध्यभारत में भी मौसम में बदलाव आने लगता है। हवाएं चलने लगती हैं। कई बार तूफान भी आ जाते हैं इसलिए नौतपा में बादलों के छा जाने से अब यह अंग्रेजी के शब्द 'नो' (नहीं) तपा में बदलता दिखता है।

सारिका ने बताया कि आने वाली पीढ़ी के लिए नवतपा कम ही तपेगा क्योंकि रोहिणी तारे के सीध में आने की घटना स्वतंत्रता प्राप्ति के 300 साल पूरे होने पर 2247 में 29 मई को आरंभ हुआ करेगा। समय के साथ यह जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में भी हुआ करेगा। ऐसे में संभवत: इसका नाम नौतपा से बदलकर नववर्षा हो सकता है।