• Hindi News
  • National
  • Swami Vivekananda birthday his learning on 7 big issues of the current era and call for youth power

आज युवा दिवस / आजादी की मांग हो या राष्ट्र निर्माण, 125 वर्ष बाद भी सही लगते हैं मौजूदा दौर के 7 बड़े मुद्दों पर स्वामी विवेकानंद के विचार

Swami Vivekananda birthday his learning on 7 big issues of the current era and call for youth power
X
Swami Vivekananda birthday his learning on 7 big issues of the current era and call for youth power

  • विवेकानंद ने कहा था- ब्राह्मण हो या संन्यासी, किसी की भी बुराई को क्षमा नहीं मिलनी चाहिए
  • ‘कुछ भी संशय हो तो सबकुछ ईश्वर के सामने कह दो, तुरंत ही तुम्हें अदम्य साहस का आभास होगा’

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2020, 08:15 AM IST

नेशनल डेस्क. आज स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है, जिसे युवा हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। स्वामी जी ने युवाओं से जुड़े कई मुद्दों पर भारत और अमेरिका में ओजस्वी व्याख्यान दिए। 125 साल पहले उनकी कही बातें मौजूदा दौर में भी सही लगती हैं, चाहे वह नागरिकता कानून हो या फिर जेएनयू हिंसा जैसा मुद्दे। 19 नवम्बर 1894 को विवेकानंद जी ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुए एक पत्र लिखा था। इस पत्र के अंश जो आज के 7 बड़े मुद्दों के समाधान का रास्ता दिखाते हैं।

आज के 7 बड़े मुद्दों पर 125 साल पहले के 7 विचार

  1. नए भारत का निर्माण

    भारत को उठना होगा, शिक्षा का विस्तार करना होगा, स्वहित की बुराइयों को ऐसा धक्का देना होगा कि वह टकराती हुई अटलांटिक महासागर में जा गिरे। ब्राह्मण हो या संन्यासी, किसी की भी बुराई को क्षमा नहीं मिलनी चाहिये। अत्याचारों का नामोनिशान न रहे, सभी को अन्न अधिक सुलभ हो। धैर्य रखो तभी सफलता तुम्हारे हाथ आयेगी। काम करो, काम करो… औरों के हित के लिये काम करना ही जीवन का लक्षण है। हां! एक बात पर सतर्क रहना, दूसरों पर अपना रौब जमाने की कोशिश न करना। दूसरों की भलाई में काम करना ही जीवन है। एक ऐसे उपनिवेश की स्थापना करो जहां सद्विचार वाले लोग रहें, फिर यही मुट्ठीभर लोग सारे संसार में अपने विचार फैला देंगे।

  2. नए समाज का निर्माण

    हे बच्चो, सबके लिये तुम्हारे हृदय में दर्द हो। तुम गरीब, मूर्ख, पददलित मनुष्यों के दु:ख का अनुभव करो, समवेदना से तुम्हारा हृदय भरा हो। यदि कुछ भी संशय हो तो सबकुछ ईश्वर के समक्ष कह दो, तुरन्त ही तुम्हे शक्ति, सहायता और अदम्य साहस का आभास होगा। प्रयत्न करते रहो। अकिंचन प्रयत्न करते चलो। चरित्र ही, कठिनाइयों की संगीन दीवारें तोड़कर अपना रास्ता बना लेता है। परोपकार ही जीवन है, परोपकार न करना ही मृत्यु है। मुझे विश्वास है कि यह संभव है और एक दिन ऐसा जरूर होगा। समाज को पुनः गठित करने की कोशिश करो। उत्साह से हृदय भर लो और सब जगह फैल जाओ।

  3. आजादी की मांग

    आजादी के बिना किसी प्रकार की उन्नति संभव नहीं है। हमारे पूर्वजों ने धार्मिक चिंता में हमें आजादी दी थी और उसी से हमें आश्चर्यजनक बल मिला है, पर उन्होने समाज के पैर बड़ी-बड़ी जंजीरों से जकड़ दिए और उसके फलस्वरूप हमारा समाज, थोड़े शब्दों में यदि कहें तो ये भयंकर और पैशाचिक हो गया है। दूसरों को हानि न पहुंचाते हुए, मनुष्य को विचार और उसे व्यक्त करने की आजादी मिलनी चाहिये एवं उसे खान-पान, पोशाक, पहनावा, विवाह-शादी हर एक बात में आजादी मिलनी चाहिये। अपने धर्म पर अधिक जोर देकर और समाज को आजादी देकर यह करना होगा।

  4. प्रयत्न और परिवर्तन

    जब चारों ओर अंधकार ही अंधकार था तब भी मैं प्रयत्न करने को कहता था, अब तो कुछ प्रकाश नजर आ रहा है। अतः अब भी यह कहूंगा कि प्रयत्न करते रहो। वत्स, उरोमा अनंत नक्षत्र रचित आकाश की ओर भयभीत दृष्टि से मत देखो, वह हमें कुचल डालेगा। धीरज धरो, फिर तुम देखोगे कि कई घंटों में वह सब का सब तुम्हारे कदमों के नीचे आ गया है। धीरज धरो, न धन से काम होता है, न यश काम आता है, न विद्या; प्रेम से ही सबकुछ होता है। प्राचीन धर्म से पौरोहित्य की बुराइयों को हटा दो, तभी तुम्हे संसार का सबसे अच्छा धर्म मिल पाएगा।

  5. सच्ची शिक्षा महत्व

    शिक्षा सिर्फ संघर्ष से लड़ने के लिए तैयार नहीं करती और न ही इंसान को सिर्फ मजबूत बनाती है। यह सही मायने में इंसान को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाती है। सच्ची शिक्षा इंसान का विकास करती है यह सिर्फ शब्दों का संग्रहण नहीं है। यह सही मायने में वो है जो इंसान के इरादों को मजबूत बनाती है क्योंकि जानकारी तो किताबों को पढ़कर भी पाई जा सकती है। किताबें आपको शिक्षित नहीं करती है ये आपको विचारों से रूबरू कराती है। शब्दों से आप विचार विकसित होते हैं। अगर आपने इन विचारों को अपने जीवन में अपनाया और अपनी शख्सियत में शामिल किया तो सही मायने में आप उस इंसान से ज्यादा शिक्षित हो जो सिर्फ शब्दों का संग्रह करना जानता है।

  6. कर्मशक्ति और प्रेरणा

    हे वीर हृदय युवाओं, साहसी बच्चों, आगे बढो- चाहे धन आए या न आए, आदमी मिलें या न मिलें, तुम्हारे पास प्रेम है। क्या तुम्हे ईश्वर पर भरोसा है ? बस आगे बढो, तुम्हे कोई नहीं रोक सकेगा। सतर्क रहो। जो कुछ असत्य है, उसे पास न फटकने दो। सत्य पर दृढ़ रहो तभी हम सफल होंगे शायद थोड़ा अधिक समय लगे पर हम सफल होंगे। इस तरह काम करते जाओ कि मानों मैं कभी था ही नही। इस तरह काम करो कि तुम पर ही सारा काम निर्भर है। भविष्य की सदी तुम्हारी ओर देख रही है- भारत का भविष्य तुम पर निर्भर है।

  7. सत्य की स्वीकार्यता

    “हे भाग्यशाली युवा, अपने महान कर्तव्य को पहचानों। इस अद्भुत सौभाग्य को महसूस करो। इस रोमांच को स्वीकार करो। मैं चाहता हूं कि हममें किसी प्रकार की कपटता, कोई दुरंगी चाल न रहे, कोई दुष्टता न रहे। मैं सदैव प्रभु पर निर्भर रहा हूं- सत्य पर निर्भर रहा हूं, जो कि दिन के प्रकाश की तरह उज्ज्वल है। मरते समय मेरी विवेक बुद्धि पर ये धब्बा न रहे कि मैंने नाम या यश पाने के लिये ये कार्य किया। दुराचार की गंध या बदनीयती का नाम भी न रहने पाए। किसी प्रकार का टालमटोल या छिपे तौर पर बदमाशी या गुप्त शब्द हमारे अंदर न रहें। गुरु का विशेष कृपा पात्र होने का दावा भी न करें। यहां तक कि हममें कोई गुरु भी न रहे।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना