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चिट्‌टी में लिखा जमानत नहीं मिल रही, फरार हुए 9 बाल बंदी

हम कैदी हैं, जो भाग रहे हैं। क्योंकि हमारी जमानत नहीं हो रही है और हम यहां रहकर बहुत दुखी हो गए हैं।

Danik Bhaskar | Feb 12, 2018, 06:48 AM IST

अंबाला. हम कैदी हैं, जो भाग रहे हैं। क्योंकि हमारी जमानत नहीं हो रही है और हम यहां रहकर बहुत दुखी हो गए हैं। बस, यही एक चिट्ठी के तौर पर पुलिस के हाथ एक अहम सुराग लगा है, जो बाल बंदियों ने 20 फीट ऊंची दीवार फांदने से पहले शनिवार रात छोड़ा है। मगर इस पर यकीन करना उतना ही मुश्किल है, जितना जेल मैनुअल इजाजत देता है। मैनुअल के मुताबिक बाल बंदी अपने पास पेन नहीं रख सकते, क्योंकि इससे किसी भी समय अनहोनी का डर बना रहता है। क्या है पूरा मामला...

- अब ऐसे में सवाल उठता है कि उनके पास चिट्ठी लिखने के लिए पेन कहां से आया? इस पर साजिश का हिस्सा यह हो सकता है कि कहीं बंदियों के फरार होने के बाद खुद की गर्दन बचाने के लिए कर्मचारियों ने ही तो चिट्ठी नहीं लिख दी।

- असल में शनिवार रात जुवेनाइल होम के कमरा नंबर दो में बंद नौ बंदी लकड़ी की सीढ़ी का सहारा लेकर फरार हो गए। उस समय कमरे में 24 बाल बंदी कैद थे। बाकी 15 बंदियों ने जानते हुए भी भागने का प्रयास नहीं किया।

- आखिर नौ ही क्यों भागे, इसे लेकर भी सवाल बना हुआ है। जो फरार हुए हैं, वह संगीन जुर्म में बंद हैं। शनिवार रात करीब डेढ़ से पांच बजे के बीच हुई वारदात पर किसी का ध्यान नहीं गया। खुलासा भी रविवार सुबह छह बजे हुआ।

सीढ़ी छिपाकर नहीं रखी
सबसे पहले इस वारदात का वार्डर सुरेश जिम्मेदार हैं। जिसने ड्यूटी पर रहते हुए पूरी व्यवस्था को चैक नहीं किया। दीवार के साथ लगी सीढ़ी को छिपाकर नहीं रखा। और तो और ड्यूटी पर रहते हुए सो गया। न ही ध्यान दिया।

लोहे का पाइप चुराया और खराब सीसीटीवी का उठाया फायदा

-दिसंबर 2017 को जुवेनाइल होम में फोन कॉल सुविधा शुरू हुई, इससे बंदी परिवारवालों से बातचीत करने लगे। इसी बीच होम में रेनोवेशन का काम शुरू हो गया। यही नहीं सीसीटीवी भी खराब हो गए।

- इसका फायदा उठाकर कहीं न कहीं बंदियों ने फोन पर बाहरी लोगों से संपर्क करके भागने का प्लान बनाया और रेनोवेशन के दौरान लोहे का पाइप अपने पास रख लिया। शनिवार रात आई तो उन्होंने वारदात को अंजाम दे दिया, क्योंकि वे यह जानते थे कि उनकी करतूत सीसीटीवी में कैद होने वाली नहीं है।

ड्यूटी पर आराम फरमाता रहा
इस वारदात का दूसरा जिम्मेदार पुलिसकर्मी राजकपूर है, जो ड्यूटी पर जागने की बजाए आराम फरमाता रहा। यही नहीं उसने ड्यूटी पर मौजूद अन्य कर्मचारियों के गायब रहने पर भी सवाल नहीं उठाया।

सीसीटीवी नहीं कराए ठीक
जुवेनाइल होम के सुपरिंटेंडेंट भूपिंद्र सिंह तीसरे जिम्मेदार हैं। जिन्होंने कैमरों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया। यह भी सोचना जरूरी नहीं समझा कि अकेला वार्डर कैसे इस व्यवस्था को संभालेगा। क्योंकि यहां ज्यादा बच्चे हैं।

समय से एक्शन नहीं लिया
वारदात की चौथी जिम्मेदार डीपीओ बलजीत कौर हैं। जिन्होंने पत्राचार के बावजूद सीसीटीवी कैमरों को मेंटेन करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया। आठ जनवरी की वारदात पर एक्शन नहीं लिया।