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ट्रेनों में विस्फोट से होने वाली घटनाओं पर नजर रखेगा सिपाही डॉग ड्यूक, संभाली कमान

आरपीएफ व जीआरपी की संयुक्त चेकिंग के दौरान ड्यूक से पूरी मदद ली जा रही है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 18, 2018, 07:17 AM IST

  • ट्रेनों में विस्फोट से होने वाली घटनाओं पर नजर रखेगा सिपाही डॉग ड्यूक, संभाली कमान

    अम्बाला. रेलवे स्टेशन पर आने वाली गाड़ियों व यात्रियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अब सिपाही ड्यूक को सौंप दी गई है। नए स्निफर डॉग ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के साथ मिलकर अपनी ड्यूटी भी शुरू कर दी है। 26 जनवरी को देखते हुए आरपीएफ व जीआरपी की संयुक्त चेकिंग के दौरान ड्यूक से पूरी मदद ली जा रही है।

    जेम्स की मौत के बाद आया ड्यूक
    अम्बाला मंडल की सुरक्षा में तैनात जेम्स वह स्निफर डाॅग था, जिसने 12 अक्टूबर, 2011 में कैंट स्टेशन पर खड़ी लावारिस इंडिका कार में विस्फोटक की पहचान की थी। साल 2016 में जेम्स की मौत हो गई थी। जेम्स का पूरे सम्मान के साथ संस्कार किया गया। जेम्स की मौत के बाद कैंट रेलवे स्टेशन सहित मंडल के अन्य स्टेशनों की सुरक्षा के लिए दो स्निफर भाइयों को 2 महीने की उम्र में ही खरीदा गया।

    डेढ़ साल के ड्यूक ने जून 2017 में सिपाही रैंक से शुरू की नौकरी
    ड्यूक ने जून 2017 में आरपीएफ में बताैर सिपाही तैनाती पाई है। वह अभी डेढ़ वर्ष का ही है और उसका वजन लगभग 34 किलो है। वह रोजाना 400 से 500 रुपए की स्पेशल डाइट खाता है और उसका वेतन 10 हजार रुपए है। उसके लिए आरपीएफ बैरक में एक स्पेशल कमरा बनाया गया है, जहां गर्मी में कूलर व सर्दी में हीटर की व्यवस्था की गई है। पूरे एक साल तक इसकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट देखी जाएगी। परफार्मेंस ठीक रहने पर अगले साल पदोन्नति दी जाएगी। ड्यूक की सेवानिवृत्ति आयु 10 वर्ष है। ड्यूक स्निफर डॉग है, जो तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के पडनूर श्वान प्रशिक्षण केंद्र से नौ माह का प्रशिक्षण लेकर वापस लौटा है। इसकी खासियत है कि यह ट्रेन की बोगी अथवा प्लेटफॉर्म पर किसी बैग में रखे विस्फोटक को सूंघकर पहचान कर लेता।

    विस्फोटक मिलते ही वहीं बैठ जाता है
    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से आतंकियों द्वारा ऐसे विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो कुत्ते के भौंकने मात्र से ही फट जाता है। इसलिए ड्यूक को ऐसा प्रशिक्षण दिया गया है कि वह विस्फोटक को सूंघते ही चुपचाप वह इसके पास बैठ जाएगा और किसी भी प्रकार की आवाज नहीं निकालेगा।

    अमेरिका व इंग्लैंड में मिलती है यह नस्ल
    ड्यूक लेब्राडोर रैट्रिबर नस्ल का डॉग है। इस किस्म के डॉग अमेरिका व इंग्लैंड में ही पाए जाते हैं। ड्यूक चंडीगढ़ का है। आरपीएफ अधिकारी सुखदेव राज सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ की जिस कैनल से इसे खरीदा गया है, वहां इसकी मां को भी स्पेशल डाइट दी जाती थी। जन्म के दो माह बाद ही आरपीएफ इसे 25 हजार में खरीदकर साथ ले आई थी। एक माह रखने के बाद इसे प्रशिक्षण केंद्र भेजा गया। उसके साथ मुख्य ट्रेनर दीपचंद एवं सहायक ट्रेनर राकेश कुमार को भी प्रशिक्षण दिया गया है।

    अम्बाला मंडल में दो स्पेशलिस्ट डाॅग हैं। पहला स्निफर एनेक्स चंडीगढ़ व दूसरा स्निफर अम्बाला में तैनात है। यह बहुत ही ट्रेंड स्निफर हैं जो कहीं भी छिपे विस्फोटक को आसानी से ढूंढ निकालते हैं और इशारे से इसकी जानकारी अपने ट्रेनर को देते हैं। -कमलजोत बराड़, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, अम्बाला मंडल।

    फर्स्ट एसी में करते हैं सफर
    ड्यूक स्निफर को रेलवे की तरफ से वीआईपी सुविधा दी गई है। उसकी विशेष डाइट का ध्यान रखा जाता है, उसके सफर का भी ध्यान रखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने के लिए रेलवे की तरफ से फर्स्ट एसी रेलवे पास की सुविधा दी गई है। लोकल स्थान पर जाने के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल होता है।

    दोनों भाई तैनात हैं सुरक्षा में| ट्रेनर दीपचंद व राकेश ने बताया कि स्टेशन, ट्रेनों व यात्रियों की सुरक्षा में तैनात ड्यूक का एक भाई भी है जो चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर तैनात है। दोनों को एक ही समय पर आरपीएफ ने स्पेशल कैनल से खरीदा था।

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