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शौचालय की निर्माण सामग्री के बोझ से गिरा छज्जा, दबने से पिता-पुत्र की मौत

बाइक को एक मकान की नीचे खड़ी की थी कि तभी मकान का जर्जर हो चुका छज्जा अचानक उन पर गिर गया।

bhaskar news | Last Modified - Jan 03, 2018, 07:55 AM IST

  • शौचालय की निर्माण सामग्री के बोझ से गिरा छज्जा, दबने से पिता-पुत्र की मौत
    बहादुरगढ़. सामान्य अस्पताल में विलाप करता मृतक का बेटा।

    बहादुरगढ़.जर्जर भवन के नीचे बाइक खड़ा करना मुकंदपुर निवासी सोमबीर को भारी पड़ा, क्योंकि मकान का छज्जा गिरने से उसके साथ-साथ उसके बेटे प्रवीण की भी मौत हो गई। वह बहादुरगढ़ के हरदयाल स्कूल में वैन का चालक है। स्कूल में अवकाश होने के कारण वह घर से यहां दवाई लेने आया था। इस बीच वह किसी से मिलने के लिए लाइन पार शिवम अस्पताल के पास उसने बाइक को एक मकान की नीचे खड़ी की थी कि तभी मकान का जर्जर हो चुका छज्जा अचानक उन पर गिर गया।

    छज्जे पर शौचालय बनाया गया था। इस कारण वह कमजोर हो गया था। छज्जा गिरने से पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। छज्जा गिरने की आवाज सुनते ही स्थानीय लोग वहां एकत्र हो गए व दोनों को उठाकर साथ के प्राइवेट अस्पताल में पहुंचाया जहां डाक्टरों ने बेटे प्रवीण को मृत घोषित कर दिया गया व सोमबीर का इलाज शुरू हो गया। शाम को इलाज के दौरान सोमबीर की भी मौत हो गई। लाइन पार थाना पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ घर की जर्जर हालत पर लापरवाही बरतने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। मौके पर पहुंचे मुकंदपुर गांव के सरपंच पति मंजीत ने बताया कि गांव में जैसे ही हादसे की खबर मिली तो गांव के लोग बहादुरगढ़ में पहुंच गए। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवाया गया है।

    शहर में कई जर्जर भवन, नप ने आज तक नहीं की कोई कार्रवाई

    बहादुरगढ़ शहर में स्थित खतरनाक इमारतों में रहने वालों की जान को कितना खतरा है या फिर उनके भवन से किसको खतरा हो सकता है इसके बारे में प्रशासन ने आज कर कोई कार्रवाई नहीं की। शायद प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा था। जो आज पूरा हो गया। लोगों को खतरनाक इमारतों से हटाने के लिए सरकार व इससे जुड़ी एजेंसियों ने आज कर कोई निर्णय नहीं लिया कि खतरनाक भवनों में रहने वालों को हटाने के लिए उनके पानी और बिजली कनेक्शन काट दिए जाए। या फिर उन्हें किसी मकान की मरम्मत तक किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इस बारे में नप के सचिव मुकेश व भवन अधिकारी विवेक जैन ने कहा कि जल्द ही कंडम भवनों की लिस्ट तैयार की जाएगी।

    नप में कार्रवाई को लेकर तालमेल नहीं

    खतरनाक बिल्डिंगों के रिपेयरिंग और रीडिवेलपमेंट के भी अलग-अलग नियम कानून है। इसी तरह से निजी इमारतों के लिए अलग नियम हैं। पर पीडब्लडी व नगर परिषद में कंडम हो गए भवनों को लेकर किसी तरह का कोई तालमेल नहीं है। हर कोई अपने-अपने हिसाब से चलता है। ऐसे में संकट आता है कि यदि भवनों को कंडम घोषित करने का सिलसिला शुरू किया गया तो मकान मालिक को कहां भेजे।

    भवनों की कैटिगरी :

    बिल्डिंगों बाइलॉज में तीन कैटिगरी तय की जाती है जिसे सरकारी भाषा में सी-1, सी-2 और सी-3 नाम दिया गया है। इसका मतलब यह है कि सी-1 कैटिगरी की बिल्डिंग को तत्काल गिराई जाए। सी-2 का मतलब है मीडियम स्तर, जिसकी रिपेयरिंग कराना जरूरी है। सी-3 का मतलब रिपेयरिंग की संभावनाएं है। बहादुरगढ़ के नगर परिषद में एक भी भवन खतरनाक इमारत में शामिल नहीं है। जिन स्कूलों का भवन नया बनाना होता है उनकी भवनों को जरुर पीडब्लडी द्वारा कडंम घोषित करवाया जाता है।

    जर्जर भवन मालिक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया गया है। यह भवन किसका है इसकी पहचान की जा रही है। इसका मालिक दिल्ली में रहने वाला बताया गया है। सोमबीर व प्रवीण के शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए अस्पताल भिजवा दिया गया है। -कुलबीर सिंह, थाना प्रभारी लाइन पार

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Web Title: Father-Sons Death By Suppressing
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