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150 अस्पतालों के 350 डाॅक्टर हड़ताल कर स्वास्थ्य मंत्री विज को सौंपेंगे ज्ञापन

इंडियनमेडिकलएसोसिएशन के आह्वान के बाद जिले के कई डाॅक्टरों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। सुबह 9 से दोपहर 12...

Danik Bhaskar | Nov 16, 2016, 02:05 AM IST
इंडियनमेडिकलएसोसिएशन के आह्वान के बाद जिले के कई डाॅक्टरों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक यह डाॅक्टर लगभग तीन घंटों तक हड़ताल पर रहेंगे जिसे सत्याग्रह का नाम दिया गया है। इसके बाद यह स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के नाम लिखा एक ज्ञापन सौंपेंगे जिसके जरिए सरकार के संज्ञान में यह मामला दिया जाएगा।

अम्बाला कैंट में आईएमए के प्रधान प्रभाकर शर्मा ने बताया कि अम्बाला में एसोसिएशन के साथ लगभग 150 अस्पतालों के 350 डाॅक्टर जुड़े हुए हैं। पिछले काफी समय से डाॅक्टर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार को पिछले साल मांग पत्र दिया गया था जिसमें डाॅक्टरों ने अपनी परेशानियों का जिक्र किया था। सरकार ने 6 हफ्तों में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था परंतु एक साल बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। डाॅक्टर नहीं चाहते कि किसी को परेशानी हो इसलिए केवल ओपीडी का काम रोका गया है। लूंबा अस्पताल के पास हड़ताल स्थल का चयन किया गया है। यहां पर तीन घंटे तक धरना देने के बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल को रेस्ट हाउस में जाकर ज्ञापन सौंपेंगे।

इन मांगों को लेकर करेंगे हड़ताल

डाॅक्टरप्रभाकर ने बताया कि डाॅक्टर चाहते हैं समस्याओं का निदान जल्दी से जल्दी हो ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर तरीके से चलती रहें।

{ एमसीआई को भंग किया जाएगा। एनएमसी लागू होने से डाॅक्टरों का रोल खत्म हो जाएगा। वोटिंग आदि के अधिकार भी छीन लिए जाएंगे। ब्यूरोक्रेसी और राजनेताओं का दखल बढ़ेगा।

{ डाॅक्टरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों और तोड़फोड़ मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो।

{ आयुर्वेद और यूनानी आदि डाॅक्टरों को एलोपैथिक दवाइयां इस्तेमाल करने का अधिकार हो।

{ एमबीबीएस पास करने के बाद रखी जा रही प्रस्तावित परीक्षा ली जाए।

{ इलाज के दैारान हुई मौत और अन्य मामलों में मुआवजे के प्रावधान पर पुनर्विचार किया जाए। मरीज को उसकी इनकम के हिसाब से मुआवजा देने की बजाए एक लिमिट में हो।

{ पीसी पीएनडीटी एक्ट यानी लिंग जांच आदि के तहत जो लोग इसका गलत उपयोग कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई का प्रावधान हो। कई बार क्लेरिकल मिस्टेक हो जाने पर भी अस्पतालों पर कार्रवाई कर दी जाती है जो ठीक नहीं।

{ जो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट बिल छोटे अस्पतालों पर लागू हो क्योंकि छोटे अस्पतालों के डाॅक्टरों के पास तो बड़े लेवल के डाॅक्टर हैं और ही संसाधन। इस पर पुनर्विचार हो। कई सर्टिफिकेट लेने पड़ेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं में इंस्पेक्टर राज हो जाएगा।