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256 में से 56 में ही लगे सीसीटीवी कैमरे और आखिरी दिन तक स्कूलों में नहीं बने सेफ्टी क्लब

भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी कभी गुरुग्राम का रेयान इंटरनेशनल स्कूल तो कभी यमुनानगर के स्वामी विवेकानंद स्कूल...

Danik Bhaskar

Feb 01, 2018, 03:10 AM IST
भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी

कभी गुरुग्राम का रेयान इंटरनेशनल स्कूल तो कभी यमुनानगर के स्वामी विवेकानंद स्कूल में हुई वारदात। दिन-प्रतिदिन स्कूलों में इस तरह की चौंका देने वाली घटनाएं बढ़ रही है। जबकि स्कूल, पेरेंट्स और प्रशासन बच्चों में सेल्फ डिफेंस, जागरुकता और मानसिक विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। हालांकि 256 में से 56 स्कूलों में ही सीसीटीवी लग पाए। स्कूलों में सेफ्टी क्लब बनाने की आिखरी तारीख 31 जनवरी भी निकल गई और किसी ने इस ओर ध्यान तक नहीं दिया।

आखिर कमी कहां है, जब इसे लेकर भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि आधुनिकता की इस दौड़ में इन बच्चों के माता-पिता वाट्सएप और फेसबुक की दुनिया में बिजी हो गए तो टीचर्स बच्चों का सही तरीके से मार्गदर्शन नहीं कर पा रहे। यही तीन मेजर कारण है कि हर किसी के बीच खुद को अकेला महसूस कर रहे बच्चे चाइल्ड क्राइम की तरफ बढ़ रहे हैं।

बच्चों पर काम कर रहे चार कमेटियां| बच्चों के साथ होने वाले अपराध या उनके मानसिक विकास के साथ-साथ स्कूलों पर नकेल कसने के लिए जिले में चार कमेटियां काम कर रही हैं। इनमें चाइल्ड लाइन, बाल संरक्षण अधिकार आयोग, राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी काम कर रही है।

ये हो चुके हादसे






. बच्चों का मानसिक स्तर कैसे विकसित हो सकता है?

डॉ. केएस राणा

मनोरोग विशेषज्ञ

माता-पिता, टीचर्स ही बढ़ा सकते हैं।

. बच्चों के प्रति पेरेंट्स की भागीदारी क्या है?

पेरेंट्स वाट्सएप और फेसबुक छोड़कर बच्चों पर ध्यान दें।

. बच्चों के प्रति टीचर्स की जिम्मेदारी क्या है?

बच्चों को टीचर द्वारा अच्छे व बुरे की शिक्षा देना जरूरी।

. कैसे सुधारें जाएं हालात?

पेरेंट्स की जागरुकता और स्कूलों में सख्त नियम होने चाहिए।

600 में से 25% शिकायतें हुई दर्ज

चाइल्ड लाइन के डायरेक्टर गुरदेव सिंह मंडेर का कहना है कि जनवरी से दिसंबर 2017 तक 600 से अधिक शिकायतें पहुंची। इनमें बाल मजदूरी, टीचर द्वारा बच्चे को तंग करना, मारपीट, लापता, गलत काम होने के साथ कई तरह की शिकायतें आई।

टीम ने एक्सपर्ट्स से ये पूछे सवाल

उमा शर्मा

डीईओ, शिक्षा विभाग

स्कूलों में काउंसलर भी रखे जाएं।

पेरेंट्स बच्चों को पूरा समय दें। उनका ध्यान रखें।

टीचर्स को बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखनी चाहिए।

स्कूलों में काउंसलर रोजाना नैतिकता की शिक्षा दें।

परमजीत बड़ौला

सदस्य, एससीपीआरसी, हरियाणा

बच्चों को फ्रैंडली माहौल देना होगा।

बच्चे संस्कारों को भूल रहे हैं। बच्चों को टाइम देना होगा।

अपने बच्चाें की तरह टीचर्स को देखरेख करनी होगी।

पेरेंट्स और बच्चों को कस्टमर के तौर पर ट्रीट न करें स्कूल।

डॉ. सीमा तंवर

काउंसर, आर्मी पब्लिक स्कूल कैंट

बच्चों को असुरक्षित महसूस न होने दें।

पर्सनल अटेंशन जरूरी है। बच्चों पर ध्यान देना होगा

बच्चों, पेरेंट्स व टीचर्स के लिए काउंसलर जरूरी।

पेरेंट्स बच्चों को टाइम दें। बच्चे हर बात पेरेंट्स से शेयर करें।

अभी सचेत नहीं ग्रामीण स्कूल

मुलाना, साहा, बराड़ा, नारायणगढ़ और शहजादपुर के कुछ प्राइवेट स्कूलों में जहां अभी तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। बराड़ा खंड शिक्षा अधिकारी वीणा कुमारी का कहना है कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए आदेश नहीं आए हैं।

अजय गुप्ता

प्रधान, पेरेंट्स एसोसिएशन

समाज के बदलाव की जानकारी भी दें।

मोबाइल की बजाए बच्चों की तरफ पूरा ध्यान देना चाहिए।

टीचर्स को बच्चों में नैतिकता का ज्ञानवर्धन करना होगा।

परिजन व टीचर्स बच्चों की परिस्थिति को भांपें।

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