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चार साल में स्नैचिंग के 271 केस, 89 ही सॉल्व कर पाई पुलिस, 39 हुए बरी

कैंट की गले सेे चेन छीनने के बाद आपबीती बतातीं हुई महिला।

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:05 AM IST

चार साल में स्नैचिंग के 271 केस, 89 ही सॉल्व कर पाई पुलिस, 39 हुए बरी
कैंट की गले सेे चेन छीनने के बाद आपबीती बतातीं हुई महिला।

अम्बाला में स्नैचिंग का बढ़ता ग्राफ...

250

200

64

150

100

2014

2015

2016

2017

58

इस साल अब तक

82

67

2018 (अब तक)

16

नवनीत शर्मा | अम्बाला. लगातार बढ़ रही स्नैचिंग की वारदातों से पब्लिक, खासतौर पर महिलाएं और सीनियर सिटीजन खौफ खाए बैठे हैं। पुलिस के लिए हर स्नैचिंग सिर्फ एक केस है, लेकिन प्रभावितों के लिए बेशकीमती हैं। जिन 12 लोगों के घर जाकर टीम ने मुलाकात की, उनमें से एक का भी सामान अभी तक रिकवर नहीं हुआ है। स्नैचर सेक्टर-9 में रहने वाली एक महिला की तीसरी बार चेन झपट चुके हैं और पुलिस उनकी एक भी चेन वापस नहीं दिला पाए। खास बात यह है कि स्नैचिंग के दौरान जिनके दस्तावेज गायब हुए, वह भी आज तक बनवा नहीं पाए क्योंकि प्रशासन की सीढ़ियां उन्हें रास्ता नहीं देतीं...

तकरीबन केसों में पुलिस फेल

कोई बैग छीने तो तुरंत बैठ जाएं नीचे

16

1. अगर कोई आपका बैग स्नैच कर रहा है तो झपट्टा पड़ते ही नीचे बैठ जाएं, स्नैचर तुरंत नीचे गिर जाएगा और आपका बैग खींच नहीं पाएगा।

1.

पुलिस के साथ जुड़ा स्नैचर-ज्वेलर का नेक्सस, तोड़ना मुश्किल

76 स्नैचर दबोचे, सिर्फ 3 ज्वेलर

चेन छीनने वाले स्नैचर अपने घर में सोने का गोदाम नहीं बना रहे हैं। जाहिर है स्नैचिंग के बाद वह छीनी गई चेन ज्वेलर को बेचते हैं। पुलिस स्नैचर्स को तो पकड़ती है, लेकिन चोरी की चेन खरीदने वाले ज्वेलर्स पर नकेल नहीं कसती। अभी तक के रिकॉर्ड के मुताबिक पुलिस अगर ज्वेलर्स के पास पहुंचती है तो उन्हें स्नैचर्स द्वारा बेची गई चेन के बदले चेन देने की बात कहती है और उसकी जुर्म से रिहाई की सांठ-गांठ करके चलती बनती है। अभी तक पुलिस यही रवैया अपना रही है।

स्नैचिंग के मुकाबले केस सॉल्व होने का रेट आधा...

पल्सर सवार स्चैनरों से खुद रखनी होगी हिफाजत क्योंकि पुलिस के लिए यह सिर्फ एक केस है

जिधर से स्नैचर झपट्‌टा मारे, उसी तरफ मारें कुहनी

2. चेन स्नैचिंग में भी अगर झपट्टा पड़े, तो जिस तरफ से झपट्टा पड़े उसी तरफ का हाथ आगे बढ़ाकर तुरंत कोहनी मारें। ऐसे में स्नैचर अपने इरादे में नाकाम हो सकता है।

ऐसे होती है ज्वेलर्स से डील...

ऐसी चेन को गलाकर ज्वेलर तुरंत सोने का टुकड़ा बना देता है।

पुलिस स्नैचर को दबोचकर उससे पूछताछ करती है तो वह ज्वेलर का पता बताता है।

पुलिस उस ज्वेलर तक पहुंचती है, लेकिन उसे अरेस्ट नहीं किया जाता।

उसे इसी शर्त पर छोड़ा जाता है कि वह उसी वजन की चेन दे जो स्नैच हुई थी।

...क्योंकि पुलिस नहीं तोड़ पाती स्नैचर-ज्वेलर के बीच सांठगांठ की कड़ी

शोर मचाएं, पैदल हो तो राइट हैंड साइड चलें

3.स्नैचिंग पर तुरंत शोर मचाएं और आरोपियों के व्हीकल का नंबर नोट करें। अगर आप पैदल हैं, तो रॉन्ग साइड चलें, यानि लेफ्ट नहीं राइट हैंड साइड।

2.

कोर्ट ट्रायल के दौरान स्नैचर्स कर लेते हैं सेटिंग

चार सालों में 39 स्नैचर कोर्ट से हो गए बाइज्जत बरी

स्नैचर पकड़े़ जाते हैं और कोर्ट से बच निकलते हैं, क्योंकि स्नैचिंग के शिकार लोग उन्हें पहचानने से ही इनकार कर देते हैं। 4 सालाें के दौरान 39 केस कोर्ट से बाइज्जत बरी हो गए। अधिकतर केस विचाराधीन हैं। जो बरी हुए, उनमें से ज्यादातर में प्रभावित लोगों से सेटिंग कर ली। कोर्ट में शिनाख्त न होने पर स्नैचरों को फायदा मिल जाता है।

39% कन्विक्शन रेट

महिलाएं ही टारगेट, सीनियर सिटीजन भी...

54 महिलाएं हैं स्नैचिंग की 64 वारदातों में

11 महिलाएं 60 साल से ज्यादा उम्र की

23 महिलाएं 35-60 साल की

20 महिलाएं 18-35 साल की

2014 में 64 स्नैचिंग

2017 में 67 केस

चेहरा छिपाने वालों से बनाकर रखें दूरी

4.जिन्होंने चेहरा ढका होता है, उनसे बात करने में परहेज करें, भले ही वो रास्ता ही पूछ रहे हों। हेलमेट पहनने वालों से बात करने से भी बचेंं।

इसके दो कारण हैं...

1. स्नैचिंग का शिकार हुए ज्यादातर लोग कोर्ट में स्नैचर को पहचानने से इनकार कर देते हैं। गवाही से पहले ही इन्हें स्नैच किया हुआ सामान मिल जाता है। और फिर वह गवाही न देने को राजी हो जाते हैं।

2. स्नैचर आमतौर पर चेहरा ढककर वारदात करते हैं। वहीं, पुलिस लोगों से बयान करवाती है कि वह सामने आने पर स्नैचर की पहचान कर सकते हैं। जब चेहरा ही ढका होता है तो प्रभावित भी उसे कैसे पहचान सकता है।

84% महिलाएं शिकार

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