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राष्ट्रपति ने किया गीता शोध केंद्र का शिलान्यास, स्वामी ने गिनाया संस्थान पर 140 करोड़ का खर्च

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गीता ज्ञान संस्थानम में भगवद् गीता शोध केंद्र एवं संदर्भ ग्रंथालय का शिलान्यास करने पहुंचे।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 26, 2017, 08:00 AM IST

राष्ट्रपति ने किया गीता शोध केंद्र का शिलान्यास, स्वामी ने गिनाया संस्थान पर 140 करोड़ का खर्च

कुरुक्षेत्र। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को गीता ज्ञान संस्थानम में भगवद् गीता शोध केंद्र एवं संदर्भ ग्रंथालय का शिलान्यास करने पहुंचे। स्वामी ज्ञानानंद के सानिध्य में आयोजित इस समारोह में काव्या और पारनिका ने तिलक लगाकर राष्ट्रपति का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के दौरान ही स्वामी ज्ञानानंद ने राष्ट्रपति को संस्थान में आने वाले खर्च का विवरण भी सुना दिया। ज्ञानानंद महाराज ने राष्ट्रपति को बताया कि गीता ज्ञान संस्थानम में विश्व भर में गीता पर हुए शोध को संकलित किया जाएगा।

मकसद है कि गीता के एक-एक शब्द पर विस्तृत शोध हो। इस प्रोजेक्ट पर 100 करोड़ रुपए खर्च होगा। जबकि शोध केन्द्र और ग्रंथालय पर करीब 40 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसे बनाने का लक्ष्य दो वर्ष रखा गया है। यानी उन्होंने सार्वजनिक रूप से पूरे संस्थान पर 140 करोड़ रुपए खर्च होने की योजना बताई। जबकि अभी संस्थान को शहर के बीचोबीच 9 एकड़ जमीन दिए जाने को लेकर सवाल उठ ही रहे हैं। वहीं, इसके नक्शे को लेकर भी केडीबी और थानेसर नप एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैँ। उधर, गीता जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में इंटरनेशनल गीता सेमिनार में राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने तो ज्ञानानंद को राज्य के आध्यात्मिक गुरु का दर्जा भी दे दिया। प्रो. सोलंकी ने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद राज्य के आध्यात्मिक गुरु हैं। इस बात को सुनकर मंच पर मौजूद स्वामी ज्ञानानंद के चेहरे के भावों पर सभी लोगों की नजर रही।

राज्यपाल ने कहा कि पहले गीता महोत्सव एक ही जिले तक सिमटकर रह जाता था। यह गीता का सम्मान नहीं था। हरियाणा की संस्कृति को गीता से जाना जा सकता है। इसलिए गीता उत्सव के आयोजन पूरे प्रदेश और देश में होने चाहिए। हालांकि गीता महोत्सव के मुख्य आयोजनों का शुभारंभ शनिवार को राष्ट्रपति ने किया। लेकिन सेमिनार में राज्यपाल प्रो. सोलंकी ने कहा कि गीता महोत्सव के शिल्प सरस मेले का उद्घाटन तो वे 17 नवंबर कर चुके हैं। यह तीन दिसंबर तक चलेगा। उद्घाटन पर राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, हिमाचल के राज्यपाल आचार्य डा. देवव्रत, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गुजरात से आचार्य सभा के राष्ट्रीय महासचिव परमात्मा नंद, कथावाचक संजीव कृष्ण शास्त्री, पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा, कविता जैन, कृष्ण पंवार, विधायक सुभाष सुधा, डॉ. पवन सैनी, समीर पाल सरो, केडीबी सचिव अमित अग्रवाल, डीसी सुमेधा कटारिया, केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा मौजूद रहे।

राष्ट्रपति को भेंट की गीता
सेमिनार में केडीबी सरकार की तरफ से प्रशासन ने राष्ट्रपति को भव्य गीता भी भेंट की। उक्त गीता वेजीटेबल इंक से हैंडमेड पेपर पर लिखी हुई है। बताया जाता है कि उक्त गीता की कीमत करीब 40 हजार रुपए है।

पुरुषोत्तमपुरा बाग में रखी महोत्सव की नींव
राष्ट्रपतिने करीब सवा एक बजे विधिवत छह दिवसीय गीता महोत्सव का शुभारंभ किया। 25 से 30 नवंबर तक महोत्सव चलेगा। इस दौरान 30 नवंबर को 18 हजार विद्यार्थियों के साथ वैश्विक गीता पाठ, ध्वनि और प्रकाश शो, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला द्वारा 12 से ज्यादा राज्यों के कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, इंटरनेशनल गीता सेमिनार, विराट संत सम्मेलन, ब्रह्मसरोवर की महाआरती, गीता शोभायात्रा आदि प्रमुख आयोजन होंगे।

आज महोत्सव का शेड्यूल
गीतामहोत्सव में रविवार 26 नवंबर को सुबह 10 बजे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, सुबह 10 बजे सदाचार स्थल के पास मेला ग्राउंड में संतों द्वारा श्रीमदभगवद गीता का पाठ, सुबह 11 बजे पुरुषोत्तमपुरा बाग में एनजेडसी सी के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम को साढ़े पांच बजे पुरुषोत्तमपुरा बाग में महाआरती, छह बजे ब्रह्मसरोवर पर मल्टी मीडिया शो, साढ़े छह बजे मेला ग्राउंड में सोनाली शर्मा द्वारा कत्थक प्रस्तुति, नलिनी शर्मा द्वारा गेम ऑफ डाइस की प्रस्तुति होगी।

संदेश बताने को सुनाई कहानियां
भागवतने कहा कि चन्द्रगुप्त मौर्य के समय जब तक आवश्यकता थी वे मंत्री के रूप में कार्य करते रहे। एक बार उनसे मिलने कुछ लोग आए तो वे सरकारी कार्यों के लिए दीए का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने अपना दीया बंद कर दिया और दूसरा दीया जलाया। तब चाणक्य से पूछा तो उन्होंने कहा कि वह सरकारी कार्यों के लिए दीए का इस्तेमाल कर रहे थे, अब दूसरे दीए से आपका कार्य करूंगा, यह मेरा धर्म कर्तव्य है। कहा कि मनुष्य अपने कर्मों से पहचाना जाता है, जब पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को फांसी पर चढऩा था तो उससे ठीक पहले प्रात: वे कसरत कर रहे थे तो उनसे पूछा गया कि कल तो आपको फांसी पर चढ़ना है तो उन्होंने कहा कि यह कसरत मैं मेरी आवश्यकता के लिए कर रहा हूं। प्रतिदिन यह समय मेरे लिए कसरत के लिए निर्धारित है।

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Web Title: rashtrapati ne kiyaa gaitaa shodh kendr ka shilaanyaas, svaami ne gainaayaa snsthaan par 140 karoड़ ka khrch
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