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डेरे की कॉलोनियों में लौटने लगे प्रेमी, लगातार दूसरे दिन नाम चर्चा को पहुंचे अनुयायी

हिंसा के बाद डेरे की कॉलोनियों को छोड़कर गए डेरा प्रेमी भी अपने-अपने घरों में लौटने लगे हैं।

Bhaskar news | Last Modified - Nov 06, 2017, 03:33 AM IST

अंबाला.25 अगस्त को पंचकूला में दंगा-फसाद के बाद जिन डेरों को सरकारी आदेशों पर पुलिस ने सील कर दिया था, आखिर अब वह खुलने लगे हैं। शनिवार को भी सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में नामचर्चा हुई। जल्द ही मामले को आगामी कड़ियों से जोड़ने के लिए एसआईटी रोहतक के सुनारिया जेल में बंद डेरा चीफ से पूछताछ करेगी। खास बात यह है कि एसआईटी की अपकमिंग इन्वेस्टिगेशन भी हनीप्रीत की गिरफ्तारी के बाद अटक गई है जबकि अभी अहम आरोपियों की गिरफ्तारी होना बकाया है।क्या है मामला...
- दरअसल, सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने 25 अगस्त को साध्वियों के रेप केस में दोषी ठहराया था।
- कोर्ट के फैसला आते ही पंचकूला में डेरा समर्थकों ने दंगा-फसाद शुरू कर दिया था। इस पर एसआईटी ने करीब 172 केस रजिस्टर्ड किए थे। इनमें से एक केस की जांच के दौरान एसआईटी ने हनीप्रीत को गिरफ्तार किया।
- आरोप था कि हनीप्रीत ने 25 अगस्त को पंचकूला में दंगा फसाद करवाया है और उसके लिए करीब 1.50 करोड़ की रकम भी पंचकूला में भेजी थी।
- केस की जांच के दौरान एसआईटी ने बग्गड़ उर्फ इकबाल सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार करना था, लेकिन आज तक एसआईटी उन्हें पकड़ नहीं पाई, जबकि इस केस से जुड़ी अहम और मजबूत कड़ियां वही लोग हैं।
- हालांकि एसआईटी अपनी जांच के दौरान सिरसा डेरे में पहुंची। मगर उन्हें वहां वह कोई शख्स नहीं मिला, जिनकी लिस्ट उनके पास थी। उस समय डेरे में नामचर्चा चल रही थी जो करीब 100 से 150 लाेग कर रहे थे।
- वहीं, सेंट्रल जेल में कैद हनीप्रीत और सुखदीप की सोमवार को पंचकूला कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से पेशी होगी। उन्हें जेल से बाहर नहीं लाया जाएगा। मगर जेल में लगे सिस्टम से ही उनकी पेशी करवाई जाएगी।
- इससे पहले भी पंचकूला कोर्ट में वर्क सस्पेंड होने के कारण मामले में आगामी तारीख लग गई थी।
अन्य आरोपियों की धरपकड़ कार्रवाई की रफ्तार धीमी
- यह भी पता चला है कि प्रदेश के कई जिलों में डेरे खोल दिए गए हैं, जो 25 अगस्त के बाद सरकारी आदेशों पर सील किए गए थे।
- सूत्रों की मानें तो अब इस मामले में एसआईटी उस दिलचस्पी से काम नहीं कर रही, जितना पहले कर रही थी। केस की रफ्तार भी धीमी गति से आगे बढ़ रही है। कहीं न कहीं, मामले में अन्य आरोपियों की धरपकड़ पर कार्रवाई ढीली पड़ती नजर आ रही है।
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