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मरने से पहले जवान की अधूरी रह गई यह चाहत, पत्नी से फोन कही थी ये बात

श्रीनगर के बांदीपोरा के बीएसएफ कैंप में हेडकांस्टेबल चंद्रभान वर्मा की मौत की खबर से पूरे गांव में मातम पसर गया।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 29, 2017, 12:33 AM IST

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    चंद्रभान ने मरने से एक दिन पहले पत्नी से फोन पर बात की थी।

    कुरुक्षेत्र.जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में एक आर्मी कैंप में बीएसएफ के हेड कॉन्स्टेबल कुरुक्षेत्र के रहने वाले चंद्रभान (40) की साथी जवान रविंद्र सिंह ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि रविंद्र को हिरासत में ले लिया है। चंद्रभान के घर में मातम पसरा हुआ था। पत्नी बीना देवी बार-बार बेसुध हो रही थी। महिलाएं व अन्य परिवारवाले उसे ढांढस बंधा रहे थे।बीना कह रही थी कि कई दिन से उसके पेट में दर्द है। रात साढ़े नौ बजे चंद्रभान का फोन आया। कहा था कि अपना ख्याल रखना और कल हॉस्पिटल में अच्छे से जांच कराना। उसे क्या पता था कि यह पति के साथ आखिरी बात होगी।

    बेटे से भी हुई थी बात

    - बीना ने बताया कि उसके पति देश के लिए शहीद हुए हैं। चंद्रभान का बेटा यश टेरी संस्थान में 11वीं नॉन मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। जबकि बेटी हीना शहर स्थित सेंट पाल स्कूल में पांचवीं क्लास में पढ़ रही हैं।

    - यश ने बताया पापा रोजाना रात को फोन पर पूरे परिवार से बात करते थे। सोमवार रात साढ़े नौ बजे उनका फोन आया, तो मुझे कहा था, बेटा कल स्कूल से छुट्टी लेकर अपनी मम्मी का अल्ट्रासाउंड करा उन्हें दवा दिला लाना। साथ ही अपना व हीना का ख्याल रहना। दस मिनट बात करने के बाद पापा ने कहा था, कि अब वे ड्यूटी पर हैं, कल बात करेंगे।

    पिता बोले - बच्चों के साथ वक्त बिताना चाहता था बेटा

    - बीएसएफ से असिस्टेंट कमांडेंट के पद से रिटायर्ड 70 साल के पिता हरिचंद ने बताया कि उनका बेटा बच्चों के साथ समय बिताने का इच्छुक था, लेकिन तब उनके के मना करने के कारण वीआरएस नहीं ली।

    - वे यह बताते हुए खुद को कोश रहे थे। कहा कि चंद्रभान ऑफिस ड्यूटी पर था। लिहाजा ज्यादा खतरे वाली बात न होने के चलते उन्होंने मना कर दिया।
    - उन्होंने ही चंद्रभान को कुछ समय और नौकरी करने की सलाह दी थी। पिता कहते हैं कि क्या पता था कि उनका बेटा कभी वहां से लौटेगा ही नहीं। कहा कि बुढ़ापे में यह दिन भी देखना था।
    - पिता को चंद्रभान की बहू व दोनों बच्चों की चिंता सता रही है।

    उन्होंने कहा जब तक वे जीवित हैं, बच्चों की परवरिश में कमी नहीं आने देंगे, लेकिन उनके जाने के बाद बच्चों को कौन देखेगा यह कहकर गुमसुम हो गए।

    बच्चों की पढ़ाई के लिए शहर में लेना था मकान
    - चंद्रभान के बड़े भाई अमृत वर्मा ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए चंद्रभान के बच्चों व अपने परिवार को लेकर शहर में किराए के मकान में रह रहा है।
    - उन्होंने कहा चंद्रभान कह रहा था कि बच्चों की पढ़ाई के लिए एक मकान शहर में ही खरीद लेंगे।
    - मकान खरीदने के लिए बैंक से लोन की व्यवस्था के लिए वह दस दिसंबर को एक महीने की छुट्टी पर आने वाला था।

    पांच साल से बिस्तर पर मां-बोली देश सेवा के लिए बना था बेटा
    - चंद्रभान की 68 साल की मां श्यामा देवी जो पिछले पांच साल से चलने फिरने से लाचार हैं। बेटे की मौत की खबर पर वे अंदर से तो टूट गई, लेकिन हौसला बनाए हुए हैं। कहा कि उसने तीनों बेटों को देश सेवा के लिए तैयार किया था।
    - पति की बीएसएफ में नौकरी के दौरान पूरा देश घूम चुकी हूं। बड़े बेटे अमृत के पांव में दिक्कत के कारण फौज में सिलेक्शन नहीं हो पाया।
    - चंद्रभान व उससे छोटे अजय कुमार को सेना के लिए उसने खुद तैयार किया। उसे अपने बेटे पर गर्व है। हालांकि बात करते-करते उनकी आंखों में आंसू आ गए।

    दो भाइयों का जन्मदिन गणतंत्र दिवस पर
    - हरिचंद बताते हैं कि चंद्रभान का जन्म भी 26 जनवरी 1977 को गणतंत्र के दिन ही हुआ था। वह देश के लिए ही बना था, देश सेवा के लिए ही अमर हो गया।
    - यह भी संयोग ही है चंद्रभान के बड़े भाई अमृत वर्मा का जन्म भी 26 जनवरी का है।


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    चंद्रभान की हत्या साथी जवान ने गोली मारकर कर दी।
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    चंद्रभान की बेटी पांचवी क्लास में पढ़ रही है।
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    कॉन्सटेबल का बेटा नॉन मेडिकल की पढ़ाई कर रह रहा है।
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    कॉन्सटेबल की मां पिछले पांच साल बीमार चल रही है।
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    मां को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है।
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    चंद्रभान ने बीना को इलाज कराने के लिए कहा था।
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    कॉन्सटेबल की मौत की खबर सुन घर में सन्नाटा पसरा है।
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Web Title: Soldier Martyr In Bsf Camp In Kashmir
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