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फर्जी कस्टमर दिखा बैंक से लिया NRI के खाते का यूजर नेम पासवर्ड, उड़ाए 27 लाख, अब गिरफ्तार

बीएपासएक शातिर व्यक्ति ने मई 2014 को एनआरआई राजेंद्र के खाते से 27 लाख उड़ा लिए थे।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 06:50 AM IST
User name of the NRI taken from the bank showing the fake customer

अंबाला। बीएपासएक शातिर व्यक्ति ने मई 2014 को एनआरआई राजेंद्र के खाते से 27 लाख उड़ा लिए थे। वारदात को नेट बैंकिंग के जरिए अंजाम दिया गया। एनआरआई का यूजर नेम पासवार्ड भी उसने बैंक से हासिल किया था। यह खुलासा वारदात के मास्टर माइंड पटियाला निवासी गुरबख्श सिंह ने किया है, जिसे इकनॉमिक सेल ने गिरफ्तार कर कोर्ट से तीन दिन के रिमांड पर लिया है।
दरअसल, पुलिस ने जून माह में कैथ माजरी निवासी विजय कुमार की शिकायत पर जालसाजी का केस दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार उसके एनआरआई भाई राजेंद्र सिंह का कोर्ट रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक में खाता है। किसी ने उसके खाते से मई 2014 को 27 लाख रुपए नेट बैंकिंग के जरिए निकाल लिए हैं। जांच का जिम्मा इकनॉमिक सेल में तैनात एएसआई रमेश कुमार और हेड कांस्टेबल जयपाल को सौंपा गया। जिन्होंने जांच में पाया कि ये रुपए नेट बैंकिंग के जरिए किसी देवेंद्र कुमार के खाते में ट्रांसफर हुए हैं। इसलिए पहले पुलिस ने देवेंद्र को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खेल के मास्टर माइंड का खुलासा हुआ।


रूपेश को राजेंद्र बनाकर हासिल किया पासवर्ड | साजिशके तहत गुरबख्श सिंह अपने साथ रूपेश नाम के युवक को बैंक ले गया। वहां उसने बैंक कर्मचारी से रूपेश को राजेंद्र बताकर मिलवाया। साथ ही कहा कि राजेंद्र को अपने खाते के इस्तेमाल के लिए नेट बैंकिंग का यूजर नेम और पासवर्ड चाहिए, जिसे कर्मचारी ने तुरंत जारी कर दिया।


फिरदेवेंद्र के खाते में ट्रांसफर किया पैसा: यूजरनेम पासवर्ड लेने के बाद गुरबक्श सिंह ने नेट बैकिंग के जरिए राजेंद्र के खाते से 27 लाख किसी देवेंद्र सिंह के खाते में ट्रांसफर किए। बाद में इस खेल से जुड़े लाेगों ने रुपए आपस में बांट लिए। अब पुलिस रूपेश की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है। मगर पता चला है कि वह कनाडा चला गया है।


ये है मामला: कैथमाजरी निवासी विजय कुमार ने जनवरी माह में पुलिस को शिकायत सौंपी थी। आरोप था कि अगस्त 2011 में उसके छोटे भाई राजेंद्र कुमार ने पीएनबी में सेविंग खाता खोला था, जिसमें उसे नॉमिनी बनाया था। खाते में उसी दिन 25.40 लाख रुपए जमा करवाए गए। इसके बाद उसका भाई जर्मन चला गया। भाई से पता चला कि एक से तीन मई 2014 तक उनके खाते से 27 लाख रुपए आॅनलाइन ट्रांसफर किए गए हैं। जब वह फ्रॉड की जानकारी लेने बैंक पहुंचे। वहां मैनेजर एसबी पांडेय ने कोई जानकारी नहीं दी। उल्टा उन्हें जर्मनी से पॉवर ऑफ अटार्नी लाने काे कहा। भाई से संपर्क करके उसने अटार्नी मंगवाई। उसे जर्मन से अंग्रेजी में ट्रांसलेट करवाया और फिर कॉपी बैंक को सौंपी। विजय का कहना है कि मामले में बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता।
अब इन दो कारणों पर होगी जांच
1.गुरबख्श को कैसे पता चला कि एनआरआई राजेंद्र के खाते में 27 लाख रुपए हैं और उसने एक बार खाता खोलने के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं किया और राजेंद्र के खाते पर नेट बैंकिंग की सुविधा नहीं है।
2. बैंक ने नेट बैंकिंग का यूजर नेम पासवर्ड जारी करने से पहले शिनाख्त क्यों नहीं की। रूपेश नाम के युवक को राजेंद्र कैसे समझ लिया। जब भाई विजय ने इसकी जानकारी दी तो बैंक ने लापरवाही क्यों बरती।
^पुलिस ने लाखों के फ्रॉड पर मामला दर्ज कर मास्टर माइंड को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच चल रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। रमेशकुमार, एएसआई, इकनॉमिक सेल, अम्बाला।

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