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छह दिन में एक चालान तो कैसे रुकेगी ओवरलोडिंग

भास्कर न्यूज| महेंद्रगढ़/आकोदा बैरिकेट के स्थान पर बड़े-बड़े पत्थर है। बिजली के नाम पर चांद की रोशन से काम चला...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:00 AM IST
भास्कर न्यूज| महेंद्रगढ़/आकोदा

बैरिकेट के स्थान पर बड़े-बड़े पत्थर है। बिजली के नाम पर चांद की रोशन से काम चला रहे हैं धोली चेकपोस्ट के ड्यूटी कर्मचारी। बीते एक सप्ताह के दौरान एक ही ओवरलोड वाहन का चालान होना प्रशासन की ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के अभियान की भी पोल खुलकर सामने आ रही है। रोड पर पड़े बड़े-बड़े पत्थरों के कारण जहां छोटे-बड़े यात्री वाहन चालक परेशान हैं। वहीं चेकपोस्ट पर सुविधाओं के अभाव में ड्यूटी कर्मचारी भी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं।

चेकपोस्ट पर नहीं है सुविधा कैसे रोकें ओवरलोड वाहन

धोली चेकपोस्ट पर बिजली के अभाव में अधिकारी परेशान हैं। यहां पर जो भी कर्मचारी ड्यूटी पर आते हैं वे अपनी औपचारिकता पूर्वक ड्यूटी निभाकर चले जाते हैं। ड्यूटी कर्मचारी बताते हैं कि चेकपोस्ट पर सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। पूरी-पूरी रात लाइट नहीं आती, जिससे न तो यहां का इनवर्टर चार्ज होता है, न ही चालान बनाने वाली मशीन चार्ज होती। यहां तक की कई बार तो घंटों तक सीसी टीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते हैं। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें सरकार द्वारा एक खोखा दिया गया है। उसके बाहर एक सर्च लाइट भी होती है, वह भी धोली चेकपोस्ट पर नहीं है। ऐसे में वे रात में गाड़ी रुकवाए तो कौन गाड़ी रोकेगा। ओवरलोड वाहन चालक अंधेरे में कोई भी अप्रिय घटना ड्यूटी कर्मचारियों के साथ कर सकता है।

आकोदा. धोली चेकपोस्ट पर बैरिकेडिंग की जगह पड़ा पत्थरों का ढेर।

सात दिन बाद बना एक चालान : जानकारी के अनुसार बीते 24 मार्च को दिन के समय महेश सुंदर ने दो चालान 49 हजार तथा 3 हजार के बनाए थे। इसके बाद उसी रात को रमेशचन्द ने 8 चालान 274 हजार रुपए के किए थे। इसके आठ दिन बाद शनिवार को ही 7 हजार रुपए का महज एक चालान किया गया। आसपास के लोगों ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से लगता है कि प्रशासन ओवरलोड रोकने के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहा है। उन्हें सरकारी संपत्ति व लोगों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है।

ग्रामीणों का आरोप-ओवरलोड वाहन तोड़ रहे हैं कस्बे के बने नए रोड, इनका आवागमन नहीं रुका तो सीएम से मिलेंगे

कनीना | गांव को कनीना से जोड़ने वाला मेन रोड कनीना-अटेली रोड पर महेंद्रगढ़ कैनाल के साथ से सरकारी अस्पताल तक 3 साल पहले बनाए गए रोड को ओवरलोड वाहनों ने तोड़ डाला। यह मार्ग 40 गांवों उन्हानी, चेलावास, मोहनपुर, नांगल, इसराना, रामबास, भोजावास, मोडियान, मानपुरा, पड़तल, खैराना, खैरानी, नारनौल, अटेली व रसूलपुर सहित राजस्थान को जाने वाले रोड से जोड़ता है। लेकिन अब पुलिस से बचने के लिए ओवरलोड वाहन चालकों ने ये नया रास्ता अख्तियार कर तीन साल पहले सीमेंटेड टाइलों से बनाया गया रोड मात्र 30 दिन में तोड़ डाला। रोड भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर तीन-तीन फीट नीचे धंस गया। इससे कस्बावासियों सहित 40 गांव के लोगों को आने-जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओवरलोड वाहन चालक अब पुलिस की सख्त कार्रवाई देख कस्बे के इस मेनरोड से वाहनों को निकलने में लगे हैं। जिससे ये रोड टूटकर नीचे धंस गया। इसको लेकर कस्बावासियों क्षेत्रवासियों का कहना है कि इतनी भारी संख्या में विभिन्न विभागों से कर्मचारी इन पर नकेल कसने के लिए लगातार कार्रवाई करने में लगे हैं, फिर भी पूर्णता इन पर नकेल नहीं कर पा रहे। इससे यहीं पर ही नहीं पूरे जिले की जनता इस परेशानी से जूझ रही है। इन पर शीघ्र ही नकेल नहीं कसी गई तो वे इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से कर जिला प्रशासन के खिलाफ जांच की मांग करेंगे। सवाल करेंगे कि जिला प्रशासन द्वारा ओवरलोड वाहनों पर नकेल कसने के लिए अलग-अलग जगह करीब 8 नाके व इतनी ही मोबाइल टीम लगाई गई है, लेकिन फिर भी इन पर काबू नहीं पाया जा रहा। यह कहीं न कहीं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। समाजसेवी पंकज यादव, सरजीत सिंह ठेकेदार, नरेंद्र ठेकेदार, सुशील मित्तल, राधेश्याम शर्मा व धर्मपाल डीपी आदि लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ने ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नकेल कसने के लिए पिछले कई दिनों से अभियान चला रखा है। इसके तहत जिले में अलग-अलग जगह 8 नाके लगाए गए हैं। इन पर काबू पाने के लिए इतनी ही मोबाइल टीम गठित की गई हैं। लेकिन फिर भी इन पर जिला प्रशासन काबू पाने में नाकाम साबित हो रहा है। इनकी वीडियो रिकार्डिंग भी है। हां कुछ हद तक अंकुश लगाने में कनीना पुलिस जरूर कामयाब हो रही है।