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टैंपो के पहिए रूके तो घोड़ा गाड़ी, रेहड़ी व रिक्शा वाले के दिन फिरे

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

ईवे बिल के मामले में व्यापारियों को लेकर मिली राहत के बाद भी बहादुरगढ़ के व्यापारियों ने कर विभाग से बचने के लिए नए...
टैंपो के पहिए रूके तो घोड़ा गाड़ी, रेहड़ी व रिक्शा वाले के दिन फिरे
ईवे बिल के मामले में व्यापारियों को लेकर मिली राहत के बाद भी बहादुरगढ़ के व्यापारियों ने कर विभाग से बचने के लिए नए रास्ते निकालने का सिलसिला शुरू कर दिया है जिससे वे आसपास के क्षेत्रों में बिना किसी परेशानी के व्यापार कर सकें। इसके लिए पहले छोटा हाथी जैसे चार पहिया मोटर टैम्पो का इस्तेमाल किया जाता था जो किसी न किसी रूप से कर अधिकारियों के हाथों में चढ़ सकते थे। अब उसके स्थान पर घोड़ागाड़ी व बैलगाड़ी के साथ-साथ रिक्शा आदि का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसके लिए सरकार ने छूट दी हुई है। गौरतलब है कि उद्यमियों व व्यापारियों ने गुरुवार को ई-वे बिल निकालना शुरू किया तो वेबसाइट ठप हो गई थी। इस कारण न रजिस्ट्रेशन हुआ और न ई-वे बिल निकला।

आम बजट देखने के बजाय कारोबारी पूरा दिन ई-वे बिल निकालने में ही माथा पच्ची करते रहे थे पर रात होते होते लोगों को राहत मिली जब इस बिल को शुरू करने की तिथि को आगे बढ़ाने की घोषणा कर दी गई। इस कारण छोटे व्यापारियों ने राहत की सांस ली, जब केंद्र सरकार ने ट्रायल की समय-सीमा और बढ़ा दी। बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रवक्ता मनोज सिंघल ने कहा कि बहादुरगढ़ से रोज एक सौ ट्रक माल बाजार भेजा जाता है। इस कारण अब भी व्यापारियों को पूरी स्थिति के बारे में ठीक से जानकारी की जरूरत है कि राजस्थान पंजाब सरकार ने अपनी कमजोरी पहचान कर पहले ही 2 माह के लिए इसका ट्रायल बढ़ा दिया था।

बहादुरगढ़. घोड़ा गाड़ी वाहनों से माल ढोते हुए।

इस कारण लिया घोड़ा गाड़ियों

का सहारा

ई-वे बिल अभी शुरू नहीं हुआ पर फैक्ट्री और दुकान में इंतजार कर रहे कारोबारियों के सामने खच्चर-रेहड़ी से ही कुछ माल पहुंचाने का विकल्प शुरू हो गया है। अब अगले समय के लिए मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए झोटा-बुग्गी से माल भेजने का सिलसिला शुरू होने जा रहा है।

यह है ई-वे बिल

यह एक टोकन है, जो माल की आवाजाही के लिए ऑनलाइन जनरेट किया जा सकता है। यह देशभर में मान्य होगा। कोई भी माल भेजने वाला व प्राप्त करने वाला और ट्रांसपोर्टर इसे जनरेट कर सकता है। ट्रैकिंग के लिए यूनिक ई-वे बिल नंबर और क्यूआर कोड मिलेगा। अगर ट्रांसपोर्टर के पास प्रिंटेड कॉपी नहीं है तो एसएमएस भी मान्य होगा। सामान्य व्यक्ति भी 50 हजार रुपए से अधिक का माल प्रदेश से बाहर भेजता है या मंगवाता है तो वह भी ई-वे बिल काट सकता है। इसके लिए उसे ई-वे बिल की वेबसाइट पर जाकर पैन नंबर से खुद को पंजीकृत करना होगा।

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