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जीएसटी के बाद अब ई-वे बिल

जीएसटी के लागू होने के बाद एक फरवरी से अब ई-वे बिल भी लागू हो जाएगा। 50 हजार से ज्यादा के माल को भेजने पर अब ऑनलाइन ई-वे...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:00 AM IST
जीएसटी के बाद अब ई-वे बिल
जीएसटी के लागू होने के बाद एक फरवरी से अब ई-वे बिल भी लागू हो जाएगा। 50 हजार से ज्यादा के माल को भेजने पर अब ऑनलाइन ई-वे बिल जनरेट करना होगा। पहले हाथ से ही बिल बना दिया जाता था। इसमें गड़बड़ी व टैक्स चोरी की संभावना रहती थी। बिक्री कर विभाग के अधिकारी व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को समझाने के लिए बैठकों का दौर शुरू कर चुके हैं। एक फरवरी को जहां बिक्री कर विभाग व्यापारियों पर नजर रखनी शुरू करेंगे, वहीं उन्हें समझाने का सिलसिला भी जारी रखेगी। ई-वे बिल लागू कराने के लिए कर विभाग के अधिकारियों की बैठक में व्यापारियों की छोटी-छोटी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में कर आयुक्त कुलदीप मलिक ने व्यापारियों के सवालों के जवाब दिए।

एईटीओ अजय व इंस्पेक्टर संजय शर्मा ने बताया कि डीलर अपना जीएसटी नंबर डालकर रजिस्टर्ड हो सकेंगे। ट्रांसपोर्टरों को पूरे कागजात देकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। एक फरवरी के बाद बिना ई-वे बिल के बगैर कोई माल पकड़ा जाता है तो संबंधित डीलर व ट्रांसपोर्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनसे नियमानुसार जुर्माना भी वसूल किया जाएगा। चेकिंग के लिए दो टीमें बनाई गई हैं। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल 50 हजार रुपए से ज्यादा है तो सप्लायर आपूर्तिकर्ता को इसकी जानकारी जीएसटीएन पोर्टल में दर्ज करानी होगी।

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इतने दिन ई-वे बिल की वैधता

100 किमी से कम दूरी तक ई-वे बिल की वैधता एक दिन की होगी।

100 किमी से अधिक और 300 किमी से कम की दूरी के लिए 3 दिन

300 किमी से अधिक और 500 किमी से कम दूरी तक के लिए 5 दिन की वैधता होगी।

500 किमी से अधिक और 1000 किमी से कम दूरी के लिए 10 दिन वैधता होगी।

1000 किमी से अधिक दूरी के लिए ई-वे बिल की वैधता 15 दिन होगी।

ये प्रोडक्ट ई-वे बिल से हैं बाहर

1. ई-वे बिल रजिस्टर सप्लायर, बायर और ट्रांसपोर्टर्स जनरेट करेगा।

2. ई-वे बिल एसएमएस के जरिए बनाया और कैंसिल कराया जा सकता है।

3. ई-वे बिल से कॉन्ट्रासेप्टिव, ज्यूडिशियल और नॉन-ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर, न्यूज पेपर, ज्वेलरी, खादी, रॉ सिल्क, इंडियन फ्लैग, ह्यूमन हेयर, काजल, दीये, चेक, म्युनिसिपल वेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, कैरोसिन और करेंसी को बाहर रखा गया है।

6600 व्यापारियों ने जीएसटी के लिए किया था आवेदन

बहादुरगढ़. ई-वे बिल को लेकर व्यापारियों की बैठक लेते बिक्री कर विभाग के अधिकारी।

समझने में लगेगा समय : गुप्ता

बैठक में मंडी व्यापारी प्रधान धनश्याम गुप्ता व मार्केट कमेटी के उपप्रधान व व्यापारी पंकज गर्ग ने भी अपने विचार रखे। इन व्यापारियों ने बताया कि अभी व्यापारियों को समझाने में समय लगेगा। इस कारण कर विभाग बैठकों का दौर जारी रखे है। व्यापारी अभी ई-वे बिल को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।


24 घंटे में जनरेट करना होगा

50 हजार से अधिक मूल्य के माल के परिवहन पर ई-वे बिल अनिवार्य है। अगर किसी गाड़ी में कई व्यापारियों का माल 50 हजार से अधिक का लोड मिलता है तो कार्रवाई होगी। माल ढोने के लिए यदि व्यापारी ई-वे बिल जनरेट नहीं करते हैं तो ट्रांसपोर्टर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। नई व्यवस्था के तहत 24 घंटे में ई-वे बिल जनरेट होगा। माल न ढोने पर बिल कैंसिल होने का प्रावधान भी है। विक्रेता के स्थान से क्रेता के स्थान की दूरी 10 किलोमीटर से अधिक होने पर ई-वे बिल जरूरी है। गोदाम में रखे माल की ई-वे बिल वैधता खत्म होने की दशा में माल की जिम्मेदारी व्यापारी की होगी। व्यापारी अगर ई-वे बिल नहीं देंगे तो उनका माल किसी हाल में बुक नहीं किया जाएगा।

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एक्सीडेंट होने पर नया बिल बनेगा

जिस व्हीकल से सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचाया जा रहा है, वह अगर किसी दुर्घटना का शिकार होता है तो इस सूरत में आपको सामान दूसरे वाहन में ट्रांसफर करने के बाद एक नया बिल जनरेट करना होगा। जब विक्रेता ई-वे बिल को जीएसटीएन पोर्टल पर अपलोड करेंगे तो एक यूनिक ई-वे नंबर ईबीएन जनरेट होगा। यह सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और ग्राहक तीनों के लिए होगा। मान लीजिए अगर किसी एक ट्रक में कई कंपनियों का सामान जा रहा है तो ट्रांसपोर्टर को एक कंसाेलिडेटिड बिल बनाना होगा। इस बिल के अंदर सारी कंपनियों के सामान की अलग-अलग डिटेल होनी चाहिए।

क्रेता व विक्रेता को देनी होगी जानकारी

गुरुवार से शुरू होने वाले ई-वे बिल के अंतर्गत विक्रेता को जानकारी देनी होगी कि वो किस वस्तु को बेच रहा है। वहीं, खरीदने वाले व्यक्ति को जीएसटीएन पोर्टल पर जानकारी देनी होगी कि उसने या तो गुड्स को खरीद लिया है या फिर उसे रिजेक्ट कर दिया है। हालांकि अगर आप कोई जवाब नहीं देते हैं तो यह मान लिया जाएगा कि आपने वस्तु को स्वीकार कर लिया है।

बिना ई-वे बिल के माल पकड़ा जाता है

तो उसके खिलाफ जुर्माने का प्रावधान

अगर कोई माल बिना ई-वे बिल के पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माने का प्रावधान है। अगर ट्रांसपोर्टर व डीलर ई-वे बिल में रजिस्टर्ड है और उसने बिल नहीं लिया है तो टैक्स के बराबर जुर्माना लगाया जाएगा। अगर रजिस्टर्ड नहीं है तो सामान की कीमत का 50 फीसदी जुर्माना लगाया जाएगा। कर विभाग ने जीएसटी की रिटर्न न भरने वाले डीलरों के खिलाफ अब शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। झज्जर में 74 फीसदी व्यापारी ही जीएसटी रिटर्न भर रहे हैं। ऐसे में राज्य कर विभाग के अधिकारियों की ओर से व्यापारियों के पास जाकर रिटर्न न भरने वालों को नोटिस दिया जाएगा। इस समय जिले में 6600 व्यापारियों ने जीएसटी के लिए आवेदन किया था।

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