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सरिये के दाम 15 रुपए बढ़ने से आरयूबी का काम रुका

शहरी क्षेत्र का लाइन पार क्षेत्र से जुड़ाव करने के लिए बनने वाले रेलवे अंडरपास आरयूबी का काम 15 दिनों से बंद है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 04, 2018, 02:05 AM IST

शहरी क्षेत्र का लाइन पार क्षेत्र से जुड़ाव करने के लिए बनने वाले रेलवे अंडरपास आरयूबी का काम 15 दिनों से बंद है। निर्माण कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सरिये के दाम एकदम से ज्यादा बढ़ जाने के कारण कुछ दिनों के लिए काम रोका गया है। जल्द ही काम दोबारा शुरू किया जाएगा। वहीं, घरों के निर्माण की लागत भी बढ़ गई है। चार माह पहले जब इस अंडरब्रिज का काम शुरू हुआ था तब सरिये के दाम 35 रुपए किलो थे। उसके बाद सरिये के दाम 50 रुपए किलो तक पहुंच गए। इस बीच खुदाई का काम पूरा हो गया। अब पिलर बनाने का समय आया तो इस दाम पर सरिया खरीदने पर 10 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ता देख काम रोका गया। अब सरियों के दाम में कमी आई है व 45 रुपए किलो के हिसाब से बाजार में हैं। इस रेलवे अंडर-पास के निर्माण पर करीब 31 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी। सीएम मनोहरलाल द्वारा झज्जर आगमन के दौरान इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया था, जिसके बाद आरयूबी निर्माण कार्य शुरू हो गया था। रेलवे अंडर-पास के बनने से लाइन पार क्षेत्र के लोगों के साथ ही बहादुरगढ़ शहरी क्षेत्र का सीधा जुड़ाव होगा और लोगों को लाइन पार क्षेत्र में आने जाने में किसी भी रूप से परेशानी नहीं होगी। इसे डेढ़ साल में तैयार किया जाना है। पर निर्माण सामग्री में इसी तरह से उछाल आता रहा तो शहर के अन्य निर्माण कार्य भी प्रभावित हो सकते है। निर्माण कंपनी के प्रभारी जसबीर ने बताया कि काम शुरू करने के साथ ही सरिये के दामों में बढ़ोतरी होती गई। इस कारण कुछ समय से काम बंद करना पड़ा है। अब सरिये के दामों में कुछ कमी आई है तो काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

निर्माण सामग्री के रेट बढ़ने के कारण विकास कार्यों में आई बाधा

बहादुरगढ़. रेलवे अंडर पास के लिए खुदाई का कार्य रुका पड़ा।

सभी निर्माण सामग्रियों के

बढ़े दाम

सीमेंट और सरिया कारोबारी मुकेश बंसल ने बताया कि चार महीने में तेजी से दोनों सामग्री के दाम बढ़ गए। चीन में रॉ मटेरियल का उत्पादन प्रभावित होने से सरिये में तेजी आई। सीमेंट फैक्ट्रियों में उपयोग में आने वाले पेंटकोक को कोयले की जगह उपयोग में लिया जाता है। इस पर सरकार ने पूर्व में रोक लगा दी थी। इस वजह से भाव बढ़ गए। अब फिर से अनुमति दे दी है। मकान बनाने में भी पचास हजार की अधिक मार हो रही है। मकान बनाने की सोच रहे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए ये सपना अब और महंगा हो गया है।

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