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बंद स्कूल फिर शुरू करने की मांग

बहादुरगढ़ शिक्षा सभा के पदाधिकारियों के अलावा कई अन्य ने रेलवे रोड स्थित वैश्य आर्य कन्या प्राइमरी स्कूल पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 10, 2018, 02:00 AM IST

बहादुरगढ़ शिक्षा सभा के पदाधिकारियों के अलावा कई अन्य ने रेलवे रोड स्थित वैश्य आर्य कन्या प्राइमरी स्कूल पर तालाबंदी के मामले में सोमवार को एसडीएम जगनिवास को ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्कूल का ताला खोलने की मांग की गई। उनका कहना है कि शिक्षा विरोधी और कानून का सम्मान न करने वाले व्यक्ति का शिक्षा के मंदिर पर ताला लगाकर उसे बंद करना पूर्णतया गलत है। वहीं, ट्रस्ट के अशोक गुप्ता का कहना है कि सरकार ने सभी अध्यापकों को सरकारी दर्जा दिए जाने के बाद दूसरी जगहों पर शिप्ट कर दिया। न ही कोई नियुक्ति हुई। इस कारण स्कूल में स्टाफ नहीं रहा। इस वजह से स्कूल बंद करना पड़ा। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। जो कोर्ट का फैसला होगा उसका सम्मान किया जाएगा।

बहादुरगढ़. एसडीएम को ज्ञापन सौंपते शिक्षा सभा के पदाधिकारी।

5 अप्रैल को स्कूल के गेट पर ताला लगा मिला

नेतृत्व श्रीनिवास गुप्ता ने किया। पदाधिकारियों ने कहा कि वैश्य कन्या पाठशाला लगभग 70 वर्षों से चल रही है। इसमें आसपास की काफी संख्या में लड़कियां शिक्षा ग्रहण करती हैं। 5 अप्रैल को जब अध्यापिकाएं स्कूल के गेट पर पहुंची तो ताला लगा मिला। यह देखकर उन्होंने स्कूल की मुख्याध्यापिका को सूचित किया। इसके बाद प्रबंधन समिति को बताया गया। बाद में पता चला कि महाराजा अग्रसेन ट्रस्ट के पूर्व प्रधान अशोक गुप्ता ने ताला लगाया है। अशोक गुप्ता फिलहाल ट्रस्ट के किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं है। राजस्व रिकार्ड के मुताबिक संबंधित जमीन पर पाठशाला का इंतकाल 70 वर्षों से दर्ज है। सभा से जुड़े लोगों ने बताया कि अशोक गुप्ता का यह कहना कि जब तक नई बॉडी नहीं आती तब तक पुरानी ही काम करेगी। यह सरासर झूठ है। ट्रस्ट में अशोक गुप्ता का कोई भी संवैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसे शिक्षा विरोधी और कानून का सम्मान न करने वाले व्यक्ति का शिक्षा के मंदिर पर ताला लगाना पूर्णतया गलत है। सभा से जुड़े एसके अग्रवाल, सत्यनारायण अग्रवाल, प्रेमचंद बंसल के अलावा कई अन्य ने कहा कि स्कूल को पहले की तरह संचालित रखा जाए। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

सरकार ने इस स्कूल के सभी अध्यापकों को सरकारी नौकरी में शिफ्ट कर दिया है। इस वजह से अब यहां कोई अध्यापक नहीं है। ट्रस्ट की एडोहक कमेटी के साथ कोर्ट में मामला चल रहा है। इस कारण स्कूल चलाने पर अधिक खर्च नहीं किया जा सकता। अदालत के फैसले के बाद नई कमेटी तैयार होगी तो स्कूल चलाने का फैसला किया जाएगा। कुछ प्रभावशाली लोग इस स्कूल की जमीन पर बेशकीमती जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। वे गलत बयानबाजी करके लोगों को सच्चाई नहीं बताकर केवल बच्चों को मोहरा बना रहे हैं। स्कूल पर किसी भी भूमाफिया का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। -अशोक गुप्ता, पक्षकार

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