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एनजीटी की सख्ती के बावजूद दिल्ली से सटे बहादुरगढ़, रोहतक, हिसार में सबसे अधिक अवशेष जला रहे किसान

गेहूं के अवशेष जलाने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) ने हरियाणा में प्रदूषण बढ़ने पर राज्य सरकार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 02:10 AM IST

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    गेहूं के अवशेष जलाने को लेकर

    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) ने हरियाणा में प्रदूषण बढ़ने पर राज्य सरकार को अवशेष नहीं जलाने के सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन इसे लागू कैसा करना है, इसको लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनी। सरकार ने एप भी लाॅन्च किया, अगर कहीं फसल के अवशेष जलते दिखें, तो उस पर सूचना भेजें।

    रिएलिटी जाने तो किसान हर रोज सैकड़ों एकड़ भूमि पर फाने जला रहे हैं। सेटेलाइट डेटा की माने तो हरियाणा में 1570 स्थानों पर क्रॉप बर्निंग के केस सामने आए। इसमें सिर्फ 5 मई को प्रदेश भर के 937 स्थानों पर आग लगी मिली। दिल्ली से हिसार तक करीब 160 किलोमीटर में 325 स्थानों पर क्रॉप बर्निंग के केस मिले। चौकाने वाली बात है कि क्रॉप बर्निंग पर्यावरण व खेतों को तबाह कर ही रही है, हाईवे पर यात्रा करने वालों के लिए भी जानलेवा बन चुकी है। गौर हो कि साल 2017 में 1 अप्रैल से 4 मई तक 2400 स्थानों पर क्राॅप बर्निंग के मामले मिले थे।

    एनएच 9 पर

    325 जगह मिली

    दावा:सेटेलाइट मॉनीटरिंग की मानें तो हरियाणा में 1570 स्थानों पर जले अवशेष

    रिएलिटी चैक: एनएच 9 पर 160 किमी, 3 जिले व 40 गांवों का सफर

    भास्कर रिपोर्टर ने बहादुरगढ़ से हिसार तक एनएच 9 की यात्रा में 325 स्थानों पर आग जली देखी। कुछ खेतों पर तो एक दिन पहले ही आग लगा दी गई, तो कई स्थानों पर देर शाम किसान गेहूं के फानों में आग लगा रहे थे। हाल यह था कि इसकी आग से भूमि पर तो असर पड़ा, साथ ही आग से निकला धुंआ हाईवे पर वाहन चालकों को काफी दिक्कतें पेश करता दिखा। रोहतक से महम की ओर बढ़ते हुए वाहनों को धीमी रफ्तार में जाना पड़ा। एक स्थान पर तो फानो में लगी आग हाईवे किनारे लगे सफेदाें के पेड़ों तक पहुंच गई। हवा के साथ आग के अवशेष वाहनों तक भी पहुंच रहे थे।

    2500 से 15 हजार रुपये जुर्माना

    फसलों के अवशेष जलाने पर प्रशासन 2500 से 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। यही नहीं धारा 144 भी समूचे हरियाणा में लगाई जा चुकी है। फायर बर्निंग रिपोर्ट हर दिन भेजे जाने पर भी कृषि विभाग व प्रदूषण विभाग ने न के बराबर कार्रवाई की है। इसका प्रतिफल यह है कि हवा में कार्बन व सल्फर की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। गेहूं के फानों को खुले रूप से खेतों में जलाने पर कई प्रकार के विषैले पदार्थ निकलते हैं, जो पर्यावरण में मिलकर सभी प्रकार के वन्य जीवों, प्राणियों एवं मनुष्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।

    प्रदेश में इन जिलों में अधिक आग

    एचएसएसी द्वारा हर दिन सेटेलाइट से प्रदेश में फायर बर्निंग के मामलों को मॉनीटर किया जाता है। 4 मई तक के आंकड़ों के अाधार पर प्रदेश में सबसे अधिक रोहतक, झज्जर, पानीपत, जींद, फतेहाबाद, सोनीपत व हिसार में क्रॉप बर्निंग के मामले सामने आए हैं।

    आग

    हकीकत:अवशेष जलाने से सड़कों पर आ रहा धुंआ व आग

    5 मई को फायर बर्निंग वाले टॉप 10 जिले

    जिला केस

    जींद 183

    सोनीपत 96

    पानीपत 94

    फतेहाबाद 80

    कैथल 72

    जिला केस

    हिसार 71

    रोहतक 71

    करनाल 69

    भिवानी 57

    झज्जर 50

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