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140 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, 25 टन कचरा सड़क पर

लंबित मांगों को लेकर नगर परिषद के सफाई कर्मियों के हड़ताल के दूसरे दिन शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए...

Dainik Bhaskar

May 11, 2018, 02:10 AM IST
140 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, 25 टन कचरा सड़क पर
लंबित मांगों को लेकर नगर परिषद के सफाई कर्मियों के हड़ताल के दूसरे दिन शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए है। गुरुवार को जहां पूरा जिला प्रशासन शहर के साथ लगते गांव परनाला में मौजूद था पर तब भी शहर में सड़कों पर फैले 25 टन कूड़े के उठान को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया। नप सफाई के काम पर 70 लाख रुपए प्रति माह खर्च कर रही है पर वहीं ठेकेदार के सफाई कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। नप ने अभी ठेकेदार को इस मामले में एक भी नोटिस नहीं दिया है जिससे वह और सफाई कर्मचारियों क तैनाती करके कम से कम डीसी के जाने के मार्ग पर तो सफाई करवा दे। यह तो तब हाल है जब सफाई का ठेका इसी तरह से आगे बढ़ने के लिए जुगाड़ लगाए जा रहे है।

राहगीरों का निकलना दूभर

शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर के कारण प्रशासन के स्वच्छता अभियान की पोल भी खुलती नजर आई। सफाई कर्मियों के धरना-प्रदर्शन व हड़ताल के चलते शहर के अधिकांश वार्डों में सड़कों, गलियों के नुक्कड़ पर कूड़ा ही कूड़ा बिखरा नजर आया। हवाओं के तेज झोकों के चलते पॉलीथिन की थैलियां भी नालियोंं में रूकावट पैदा करती रही। यही नहीं बेसहारा पशु कूड़े में दिनभर मुहं मारते फिरते रहे। जिसके कारण आसपास का क्षेत्र दूषित नजर आया।

बृहस्पतिवार को जिला उपायुक्त का गांव परनाला में रात्रि प्रवास कार्यक्रम है, लेकिन उसके बाद भी स्वच्छता अभियान को लेकर नगर परिषद की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया। जगह-जगह सड़कों पर बड़े-बड़े कूड़े के ढेर लगे दिखाई दिए। लाइन पार क्षेत्र के अलावा शहर के अनेक वार्डों, रेलवे रोड, नाहरा-नाहरी रोड समेत कई अन्य प्रमुख मार्गों पर दिनभर कूड़ा सड़ता रहा। जिससे आसपास के दुकानदारों व यहां रहने वाले लोगों का जीना दुश्वार हो गया। रेलवे रोड की स्थिति तो यह थी कि वेस्ट जुआ ड्रेन पुल किनारे कूड़ा लगभग आधी सड़क तक के बीचोंबीच बिखरा पड़ा रहा। राहगीरों का यहां से निकलना दूभर हो गया। हर कोई मुहं पर कपड़ा रखकर यहां से जल्दी निकलने में लगा रहा।

बहादुरगढ़. शहर में सड़कों पर लगे कूड़े के ढेर।

सफाई कर्मियों ने मांगों को लेकर दूसरे दिन भी की नारेबाजी

बेरी | नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल दूसरे दिन भी गुरुवार काे जारी रही। उन्होंने नगर पालिका बेरी के मेन गेट में धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यहां सभा में जिला सचिव प्रदीप ने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करेंगे, ठेकेदारी प्रथा बंद करेंगे, लेकिन सरकार ने समस्याओं का समाधान नहीं किया। वादा कर कर्मचारियों के हकों को भूल गई। इसको कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उपप्रधान कुलदीप ने कहा कि प्रदेश में मांगों को लेकर कर्मचारी हड़ताल पर हैं। तीन दिन तक कोई भी कर्मचारी काम पर नहीं जाएगा। अगर सरकार फिर भी मांगें पूरी नहीं करती है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मांगों को सरकार हल्के में ले रही है। कर्मचारी अपने हकों के लिए सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। नेताओं ने कहा कि जब तक मांगों का समाधान नहीं किया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल में सर्वकर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राकेश दुजाना, भूपेन्द्र, अनिल, सूरजभान शर्मा, जगबीर, अनिता, धर्मेंद्र, तारावती, रीना, रीटा, सतबीर, सुनीता, विनोद, मनोज, सतीश, पिंकी, शीला महिला कर्मचारी मौजूद रहीं।

नगर पालिका से जुड़े 126 कच्चे कर्मचारी हड़ताल पर, आज प्रदर्शन का आखिरी दिन

झज्जर. मांगों को लेकर नगर पािलका के कर्मचारी धरने पर बैठे हुए।

भास्कर न्यूज | झज्जर

नगर पालिका से जुड़े कच्चे सफाई कर्मचारी गुरुवार को दूसरे दिन भी काम छोड़ हड़ताल पर रहे। कुल 126 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ये सभी अपने को पक्का किए जाने की मांग कर रहे हैं। मांग पूरी न होने तक सफाई कर्मचारी अफसरों की कोठियों और लघु सचिवालय में भी सफाई करने नहीं जा रहे।

बता दें कि नगर पालिका ने सभी 19 वार्डों की सफाई के लिए 126 कर्मचारी डीसी रेट पर लगाए हैं। इनके वेतन के रूप में नपा हर माह करीब 25 लाख रुपए का खर्च करती है। कच्चे कर्मचारी इससे पहले भी अपने पक्का होने की मांग को लेकर हड़ताल करते रहे हैं। अब इस बार तीन दिन की हड़ताल शुरू की है। हालांकि नपा ने इसके अलावा साढ़े नौ लाख रुपए घर-घर कचरा उठाने का ठेका दिया है। लिहाजा कुछ पक्के कर्मचारी और कुछ ठेके के कर्मचारियों की वजह से कचरा उठाया जा रहा है। कर्मचारियों की हड़ताल का कुछ खास असर नहीं पड़ रहा है। कच्चे कर्मचारियों की हड़ताल शुरू करने वाले कर्मचारी यूनियन के प्रधान आशीष बोहत ने भी माना कि भले ही कच्चे कर्मचारियों की हड़ताल का सफाई व्यवस्था में असर न पड़ रहा हो, लेकिन उनकी लड़ाई कर्मचारियों की भलाई के लिए है। यूनियन प्रधान ने कहा कि ये कर्मचारियों की एकजुटता ही है कि वे हड़ताल के दौरान अफसरों की कोठियों पर काम करने नहीं गए। बताया गया कि अभी कच्चे कर्मचारी को 11 हजार 195 रुपए मिलते हैं,अब सभी अपने को एक समान काम एक समान वेतन के तहत पक्के कर्मचारियों की तरह वेतन की मांग कर रहे हैं। अभी पक्के कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति और बेसिक ग्रेड के तहत 20 से 30 हजार रुपए तक वेतन मिलता है।

140 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, 25 टन कचरा सड़क पर
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