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अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर पदोन्नति के बाद गए झज्जर, मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर

सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले उन मरीजों को एक बार फिर से परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिन्हें अल्ट्रासाउंड...

Dainik Bhaskar

May 12, 2018, 02:10 AM IST
अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर पदोन्नति के बाद गए झज्जर, मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर
सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले उन मरीजों को एक बार फिर से परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिन्हें अल्ट्रासाउंड जांच करानी होती है। पिछले दो दिन से मरीजों को बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ रहा है या फिर अस्पताल के आसपास निजी सेंटरों का रूख करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड जांच न होने का कारण यह है कि यहां तैनात डाॅक्टर की पदोन्नति हो गई। इसके उन्हें बहादुरगढ़ से डिप्टी सीएमओ झज्जर लगाया गया है। जिसके कारण बहादुरगढ़ के सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर में कोई डाॅक्टर की तैनाती फिलहाल नहीं है। इसके चलते मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है। सबसे ज्यादा दिक्कतें गर्भवती महिलाओं के अलावा सर्जरी व फिजिशियन विभाग में जांच कराने के लिए आने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है।

बता दें कि अस्पताल की दूसरी मंजिल पर कई माह पहले नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुरू की गई थी। इसके लिए एक ही डाॅक्टर की तैनाती यहां पर की हुई थी। डाॅ. विनय देसवाल जो कि सोनोलाजिस्ट तके तौर पर यहां पर मरीजों के अल्ट्रासाउंड जांच करते थे, लेकिन कुछ रोज पूर्व ही उन्हें विभाग की ओर से पदोन्नत किया गया है। उन्हें डिप्टी सीएमओ झज्जर लगाया गया है। यहां से अब वे रिलीव भी हो गए हैं। ऐसे में उनके यहां मौजूद न होने व नए डाॅक्टर की नियुक्ति नहीं होने के चलते अल्ट्रासाउंड जांच का कार्य ठप हो गया है।

ऐसे में अब दर्द से कराहते मरीजों को बैरंग यहां से लौटना पड़ता है। या फिर महंगे रेट पर प्राइवेट सेंटर पर जाना पड़ता है या फिर रोहतक पीजीआईएमएस का रुख करना पड़ता है। इससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ भी पडऩे लगा है।

बहादुरगढ़. बंद पड़ा नागरिक अस्पताल का अल्ट्रासाउंड सेंटर।

हर रोज होती थी 30

मरीजों की जांच

सिविल अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर हर रोज लगभग 30 मरीजों की जांच होती थी। इनमें गर्भवती महिलाओं के अलावा पेट दर्द व अन्य जांच से संबंधित केस ज्यादा आते थे। नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लोग सुबह-सवेरे ही यहां आकर अपना नंबर लगा लेते थे। भीड़भाड़ के चलते कुछ को तो अगले दिन का समय दे दिया जाता था। ऐसे में सुबह से लेकर दोपहर तक यहां पर मरीजों की खूब भीड़ रहती थी।

ड्यूटी लगाने के लिए

लिखा पत्र

अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी एवं एसएमओ डाॅ. विरेंद्र अहलावत से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सोनोलाजिस्ट डाॅ. विनय देसवाल के पदोन्नत होने के बाद यहां पर डाॅक्टर का पद खाली हो गया है। सिविल सर्जन को पत्र लिखकर यहां पर सप्ताह में चार दिन डाॅ. विनय की ही ड्यूटी लगाए जाने के लिए अनुरोध किया है ताकि मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए परेशान न होना पड़े।

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