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पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 02:15 AM IST

Bahadurgarh News - शहर में मंगलवार को महिलाऔ ने वट सावित्री व्रत रखा और वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर...

पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की
शहर में मंगलवार को महिलाऔ ने वट सावित्री व्रत रखा और वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर उसमें मोली बांधा और वट वृक्ष के समान पति की दीर्घायु की कामना की। मंदिरों और पार्को के वट वृक्ष की पूजा महिलाओं ने अपनी अपनी परंपराओं के अनुसार की। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट अमावस भी कहते हैं। पंडित प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को सुहागिन महिलाएं यह व्रत रखती है। इस व्रत को सौभाग्य को देने वाला, संतान की प्राप्ति एवं पति को दीर्घायु रखने वाला माना गया है। इसीलिए महिलाएं इस दिन व्रत करती है। यह पूजा प्राचीन काल से चली आ रही है इसी दिन सावित्री ने अपने कठिन तप के बल से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों का रक्षा की थी।

बहादुरगढ़. वट वृक्ष की पूजा करती महिलाएं।

प्रसाद चढ़ाने का है नियम

कथाओं के अनुसार जब यमराज सत्यवान के प्राण ले जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। ऐसे में यमराज ने उन्हें तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने एक वरदान में सौ पुत्रों की माता बनना मांगा और जब यम ने उन्हें ये वरदान दिया तो सावित्री ने कहा कि वे पतिव्रता स्त्री है और बिना पति के मां नहीं बन सकती। यमराज को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने चने के रूप में सत्यवान के प्राण दे दिए। सावित्री ने सत्यवान के मुंह में चना रखकर फूंक दिया, जिससे वे जीवित हो गए। तभी से इस व्रत में चने का प्रसाद चढ़ाने का नियम है।

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