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20 वर्ष से कर रहे नई मंडी बनाने का दावा, एक ईंट तक नहीं रखी

बहादुरगढ़ की फतेहगढ़ अनाज मंडी में आढ़त का काम करने वाले आढ़तियों को इस बार भी व्यापार करने में परेशानी का सामना...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 03:05 AM IST
20 वर्ष से कर रहे नई मंडी बनाने का दावा, एक ईंट तक नहीं रखी
बहादुरगढ़ की फतेहगढ़ अनाज मंडी में आढ़त का काम करने वाले आढ़तियों को इस बार भी व्यापार करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हल्की बारिश के बाद किसानों ने बहादुरगढ़ अनाज मंडी की जगह नजफगढ़ व नरेला आदि की मंडियों की तरफ रुख कर लिया है। इससे वे गेहूं की फसल को मौसम से मार से सुरक्षित रखते हुए उसे बेच सके।

गेहूं में नमी आने से किसानों के सामने अपनी फसल को संभालकर रखने का संकट खड़ा हो गया है। इस बार अच्छी फसल की संभावना है। तीन साल पहले प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने मंडी में पहुंचकर यहां किसानों की परेशानी को देखते हुए दावा किया था कि अगली फसल नई मंडी में उतरेगी। न तो नई मंडी के लिए जमीन मिली और न ही पुरानी इस मंडी पर कोई सुविधा। नई अनाज मंडी को बनाने का दावा करते करते 20 साल से भी ज्यादा समय बीत गया, लेकिन अभी तक नई अनाज मंडी के नाम पर कहीं कोई ईंट तक नहीं रखी गई। 100 साल पुरानी अनाज मंडी मेें मुश्किल से ही 20-25 किसान अपनी आवक डाल सकते हैं। क्योंकि अनाज मंडी में जगह ही नहीं है। सीजन के समय जब आढ़ती अपना काम बंद करके दिल्ली या अन्य शहरों का रुख करते हैं तो शासन-प्रशासन उन्हें आश्वासन और वादे करता है। अगले सीजन में गेहूं की आवक नई अनाज मंडी में आएगी। यह कहते-कहते 10 साल कांग्रेस ने बीता दिए।

अब चार साल भाजपा ने निकाल दिए, मगर आज तक नई अनाज मंडी के लिए जमीन तक अधिग्रहण नहीं हो पाई तो अनाज मंडी बनेगी कहां। पिछले कई साल से आवक ज्यादा होती है और फड़ काफी छोटा है। कई बार तो किसानों को अपनी फसल डालने के लिए कई-कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है। इस कारण किसान परेशान होकर सड़क के बीच ही अपना गेहूं डालता है या फिर दिल्ली कूच कर जाता है। सरसों ज्यादा नहीं आती, इस कारण काम चल जाता है, मगर जब गेहूं की आवक शुरू होती है तो फिर आढ़ती और किसान दोनों ही तनाव में रहते हैं। आढ़तियों और किसानों का कहना हैं।

आढ़तियों का कहना है कि काफी लम्बे से सुनते आ रहे हैं कि जल्द ही 40 एकड़ में नई अनाज मंडी बनने जा रही है। कांग्रेस सरकार के दौरान बालौर के पास अनाज मंडी के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो गया था। कुछ किसानों के विरोध के कारण बामडौली गांव में नई अनाज मंडी के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रपोजल तैयार किया। इस कारण जमीन अधिग्रहण का काम बंद हो गया। तब तक किसानों को परेशानी झेेलनी ही पड़ेगी।

बहादुरगढ़. हल्की बूंदाबादी के बाद फसल की लिफ्टिंग का प्रयास शुरू ।

यहां कभी दूसरे प्रदेशों का उतरता था गेहूं

मंडी पूर्व प्रधान धनश्याम दास गुप्ता का कहना है कि यह वह मंडी हैं जहां कभी यूपी, हिसार और भिवानी तक का माल आता था। शहर बढ़ रहा है। किसान भी अपनी पैदावार बहादुुरगढ़ की अनाज मंडी मेंं लेकर आ रहा है, मगर मंडी का दायरा वहीं पुराना जहां न तो किसानों को अनाज डालने की जगह मिलती और न ही ट्रैक्टर खड़े करने की जगह। अनेक किसान मंडी से बाहर अपनी पैदावार ट्रैक्टरों में रखकर कई-कई दिन खड़े रहते हैं। अधिकारी और आढ़ती वहीं जाकर खरीद करते हैंं। कई बार एक किसान की पैदावार दूसरे किसान की पैदावार मेें मिल जाती तो झगड़ा भी हो जाता है। इस कारण जगह का अभाव हमेशा बना रहता है।

मंडी में टीन शेड तक

की व्यवस्था नहीं

अनाज मंडी के प्रमुख आढ़ती घनश्याम दास उर्फ धनू, पवन कुमार, महावीर, हरमिलाप, बबलू ने बताया कि अनाज मंडी में टिनशेड का भी अभाव है, जो किसानों के लिए आने वाले दिनों में समस्या पैदा कर सकता है। क्योंकि टिनशेड के अभाव में किसानों का गेहूं खुले में पड़ा रहता है। इस कारण किसानों की मौसम के बदलते चिंता बढ़ जाती है। अगर सीजन के समय बारिश हो जाती है तो किसान का गेहूं भीग जाता है। भीगे गेहूं का कोई खरीदार नहीं होता।


प्रपोजल अटका

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