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जो सफल हैं वे अपने हर काम के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं

अगर आपने कभी किसी पर कोई आरोप लगाया है तो इसका ये मतलब है कि अभी तक आपने अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी नहीं ली है। जो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:05 AM IST

जो सफल हैं वे अपने हर काम के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं
अगर आपने कभी किसी पर कोई आरोप लगाया है तो इसका ये मतलब है कि अभी तक आपने अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी नहीं ली है। जो सफल हैं, वे इसलिए सफल हैं कि उन्होंने अपने हर काम के लिए हमेशा खुद को ही जिम्मेदार ठहराया है।

हार्डी का ये 'कंपाउंड इफेक्ट', छोटी और स्मार्ट चीजों की श्रंखला के मजेदार परिणामों पर आधारित है। इनमें से बहुत से तो जरूरी भी नहीं लगते हैं। क्योंकि ये जरूरी नहीं लगते हैं, तो हम इनपर ज्यादा ध्यान ही नहीं देते हैं। एक आदमी जो दौड़ना बंद कर देता है क्योंकि कुछ हफ्तों बाद तक भी उसका वजन कम होता नहीं दिखता है, वो ये नहीं सोच पाता कि अगर 6 महीने तक वो दौड़ना जारी रखता तो सेहत में बदलाव आना शुरू हो जाता। एक महिला जो कुछ ही सालों बाद रिटायरमेंट के लिए सेविंग बंद कर देती है, वो ये नहीं सोचती कि 15 से 20 साल बाद ही पूंजी बड़ी दिखाई देती है। ये कंपाउंडिंग की शक्ति है, जो कुछ समय बाद अपने आप ही पैसा मिलने लगता है और रिटायरमेंट सुखद हो जाता है।

हमारे द्वारा लिए गए छोटे-बड़े निर्णय ही जीवन का निर्माण करते हैं। हार्डी लिखते हैं कि कोई नहीं चाहता कि वो मोटा दिखे, उसका बैंक अकांउट खाली हो जाए या उसका तलाक हो जाए। लेकिन खराब निर्णय लेने के अक्सर यही परिणाम होते हैं। हमें अपनी लॉटरी-विनर मानसिकता त्याग देनी चाहिए जो कहती है कि सफलता केवल किस्मत वालों को ही मिलती है। हार्डी लिखते हैं कि रातों रात मिली सफलता भी सालों की मेहनत और लगन का ही नतीजा होती है, बाकी सब बातें तो दिल बहलाने के लिए हैं। वे लिखते हैं कि हमें अपने बुजुर्गों की नैतिकता को दोबारा समझने की जरूरत है। उन्हें पता होता था कि थोड़ा सा संयम बड़े नतीजे दे सकता है। सफलता की राह मुश्किल है और हतोत्साहित करने वाली भी है।

हार्डी लिखते हैं कि अगर आपने कभी किसी पर किसी चीज का आरोप लगाया है तो इसका ये मतलब है कि आपने अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी नहीं ली है। आपकी कंपनी के साथ जो कुछ भी होता है, अर्थव्यवस्था के साथ, अगर अधिकारी है, तब भी आप ही 100 प्रतिशत खुद के नियंत्रण में होते हैं। ये परेशान करने वाली बात नहीं है, ये तो आजादी है। इस तरह आप केवल वो काम करते हैं जिनके जरिए आप अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें आपसे कम मौके मिले हैं। जो गरीबी में जीते हैं, खराब सड़कें, बिजली व इंटरनेट की कमी से जूझते हैं। हार्डी लिखते हैं, किस्मत तो आपके ही साथ है। आपको केवल उसका फायदा उठाना आना चाहिए। परिस्थितियों और वातावरण को दोष देने का मतलब है अपनी आजादी का अपमान करना।

जो सफल हैं वे इसलिए सफल हैं कि उन्होंने अपने हर काम के लिए खुद को ही जिम्मेदार माना है। स्पोर्ट्स स्टार अपनी हर कैलरी पर, हर लैप पर नजर रखता है। हार्डी लिखते हैं कि जब तक आप चीजों को नापते-तोलते नहीं हैं, तब तक आप उनमें सुधार भी नहीं ला सकते हैं। वे सलाह देते हैं कि सबसे अच्छा है कि एक नोटबुक अपने साथ रखें जिसमें अपना लिया हर निर्णय लिखें। अगर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं तो एक महीने तक इस नोटबुक में हर छोटा-बड़ा खर्चा लिखें। बिना सोचे समझे किए खर्चे इस तरह काफी कम हो जाएंगे और आप कुछ भी खरीदने से पहले दो बार सोचेंगे । अपने समय, पैसे और शक्ति का इस्तेमाल कैसे करना है, ये आपको ही तय करना होगा। अपनी आदतों पर नजर रखने से आप सतर्क रहते हैं और आदतें ही आपको सफल या असफल बनाती हैं।

द कंपाउंड इफेक्ट

डैरन हार्डी

हार्डी का ये 'कंपाउंड इफेक्ट', छोटी और स्मार्ट चीजों की श्रंखला के मजेदार परिणामों पर आधारित है। इनमें से बहुत से तो जरूरी भी नहीं लगते हैं। क्योंकि ये जरूरी नहीं लगते हैं, तो हम इनपर ज्यादा ध्यान ही नहीं देते हैं। एक आदमी जो दौड़ना बंद कर देता है क्योंकि कुछ हफ्तों बाद तक भी उसका वजन कम होता नहीं दिखता है, वो ये नहीं सोच पाता कि अगर 6 महीने तक वो दौड़ना जारी रखता तो सेहत में बदलाव आना शुरू हो जाता। एक महिला जो कुछ ही सालों बाद रिटायरमेंट के लिए सेविंग बंद कर देती है, वो ये नहीं सोचती कि 15 से 20 साल बाद ही पूंजी बड़ी दिखाई देती है। ये कंपाउंडिंग की शक्ति है, जो कुछ समय बाद अपने आप ही पैसा मिलने लगता है और रिटायरमेंट सुखद हो जाता है।

हमारे द्वारा लिए गए छोटे-बड़े निर्णय ही जीवन का निर्माण करते हैं। हार्डी लिखते हैं कि कोई नहीं चाहता कि वो मोटा दिखे, उसका बैंक अकांउट खाली हो जाए या उसका तलाक हो जाए। लेकिन खराब निर्णय लेने के अक्सर यही परिणाम होते हैं। हमें अपनी लॉटरी-विनर मानसिकता त्याग देनी चाहिए जो कहती है कि सफलता केवल किस्मत वालों को ही मिलती है। हार्डी लिखते हैं कि रातों रात मिली सफलता भी सालों की मेहनत और लगन का ही नतीजा होती है, बाकी सब बातें तो दिल बहलाने के लिए हैं। वे लिखते हैं कि हमें अपने बुजुर्गों की नैतिकता को दोबारा समझने की जरूरत है। उन्हें पता होता था कि थोड़ा सा संयम बड़े नतीजे दे सकता है। सफलता की राह मुश्किल है और हतोत्साहित करने वाली भी है।

हार्डी लिखते हैं कि अगर आपने कभी किसी पर किसी चीज का आरोप लगाया है तो इसका ये मतलब है कि आपने अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी नहीं ली है। आपकी कंपनी के साथ जो कुछ भी होता है, अर्थव्यवस्था के साथ, अगर अधिकारी है, तब भी आप ही 100 प्रतिशत खुद के नियंत्रण में होते हैं। ये परेशान करने वाली बात नहीं है, ये तो आजादी है। इस तरह आप केवल वो काम करते हैं जिनके जरिए आप अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें आपसे कम मौके मिले हैं। जो गरीबी में जीते हैं, खराब सड़कें, बिजली व इंटरनेट की कमी से जूझते हैं। हार्डी लिखते हैं, किस्मत तो आपके ही साथ है। आपको केवल उसका फायदा उठाना आना चाहिए। परिस्थितियों और वातावरण को दोष देने का मतलब है अपनी आजादी का अपमान करना।

जो सफल हैं वे इसलिए सफल हैं कि उन्होंने अपने हर काम के लिए खुद को ही जिम्मेदार माना है। स्पोर्ट्स स्टार अपनी हर कैलरी पर, हर लैप पर नजर रखता है। हार्डी लिखते हैं कि जब तक आप चीजों को नापते-तोलते नहीं हैं, तब तक आप उनमें सुधार भी नहीं ला सकते हैं। वे सलाह देते हैं कि सबसे अच्छा है कि एक नोटबुक अपने साथ रखें जिसमें अपना लिया हर निर्णय लिखें। अगर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं तो एक महीने तक इस नोटबुक में हर छोटा-बड़ा खर्चा लिखें। बिना सोचे समझे किए खर्चे इस तरह काफी कम हो जाएंगे और आप कुछ भी खरीदने से पहले दो बार सोचेंगे । अपने समय, पैसे और शक्ति का इस्तेमाल कैसे करना है, ये आपको ही तय करना होगा। अपनी आदतों पर नजर रखने से आप सतर्क रहते हैं और आदतें ही आपको सफल या असफल बनाती हैं।

हार्डी का ये 'कंपाउंड इफेक्ट', छोटी और स्मार्ट चीजों की श्रंखला के मजेदार परिणामों पर आधारित है। इनमें से बहुत से तो जरूरी भी नहीं लगते हैं। क्योंकि ये जरूरी नहीं लगते हैं, तो हम इनपर ज्यादा ध्यान ही नहीं देते हैं। एक आदमी जो दौड़ना बंद कर देता है क्योंकि कुछ हफ्तों बाद तक भी उसका वजन कम होता नहीं दिखता है, वो ये नहीं सोच पाता कि अगर 6 महीने तक वो दौड़ना जारी रखता तो सेहत में बदलाव आना शुरू हो जाता। एक महिला जो कुछ ही सालों बाद रिटायरमेंट के लिए सेविंग बंद कर देती है, वो ये नहीं सोचती कि 15 से 20 साल बाद ही पूंजी बड़ी दिखाई देती है। ये कंपाउंडिंग की शक्ति है, जो कुछ समय बाद अपने आप ही पैसा मिलने लगता है और रिटायरमेंट सुखद हो जाता है।

हमारे द्वारा लिए गए छोटे-बड़े निर्णय ही जीवन का निर्माण करते हैं। हार्डी लिखते हैं कि कोई नहीं चाहता कि वो मोटा दिखे, उसका बैंक अकांउट खाली हो जाए या उसका तलाक हो जाए। लेकिन खराब निर्णय लेने के अक्सर यही परिणाम होते हैं। हमें अपनी लॉटरी-विनर मानसिकता त्याग देनी चाहिए जो कहती है कि सफलता केवल किस्मत वालों को ही मिलती है। हार्डी लिखते हैं कि रातों रात मिली सफलता भी सालों की मेहनत और लगन का ही नतीजा होती है, बाकी सब बातें तो दिल बहलाने के लिए हैं। वे लिखते हैं कि हमें अपने बुजुर्गों की नैतिकता को दोबारा समझने की जरूरत है। उन्हें पता होता था कि थोड़ा सा संयम बड़े नतीजे दे सकता है। सफलता की राह मुश्किल है और हतोत्साहित करने वाली भी है।

हार्डी लिखते हैं कि अगर आपने कभी किसी पर किसी चीज का आरोप लगाया है तो इसका ये मतलब है कि आपने अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी नहीं ली है। आपकी कंपनी के साथ जो कुछ भी होता है, अर्थव्यवस्था के साथ, अगर अधिकारी है, तब भी आप ही 100 प्रतिशत खुद के नियंत्रण में होते हैं। ये परेशान करने वाली बात नहीं है, ये तो आजादी है। इस तरह आप केवल वो काम करते हैं जिनके जरिए आप अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें आपसे कम मौके मिले हैं। जो गरीबी में जीते हैं, खराब सड़कें, बिजली व इंटरनेट की कमी से जूझते हैं। हार्डी लिखते हैं, किस्मत तो आपके ही साथ है। आपको केवल उसका फायदा उठाना आना चाहिए। परिस्थितियों और वातावरण को दोष देने का मतलब है अपनी आजादी का अपमान करना।

जो सफल हैं वे इसलिए सफल हैं कि उन्होंने अपने हर काम के लिए खुद को ही जिम्मेदार माना है। स्पोर्ट्स स्टार अपनी हर कैलरी पर, हर लैप पर नजर रखता है। हार्डी लिखते हैं कि जब तक आप चीजों को नापते-तोलते नहीं हैं, तब तक आप उनमें सुधार भी नहीं ला सकते हैं। वे सलाह देते हैं कि सबसे अच्छा है कि एक नोटबुक अपने साथ रखें जिसमें अपना लिया हर निर्णय लिखें। अगर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं तो एक महीने तक इस नोटबुक में हर छोटा-बड़ा खर्चा लिखें। बिना सोचे समझे किए खर्चे इस तरह काफी कम हो जाएंगे और आप कुछ भी खरीदने से पहले दो बार सोचेंगे । अपने समय, पैसे और शक्ति का इस्तेमाल कैसे करना है, ये आपको ही तय करना होगा। अपनी आदतों पर नजर रखने से आप सतर्क रहते हैं और आदतें ही आपको सफल या असफल बनाती हैं।

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