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एेतिहासिक रानी की छतरी के जीर्णोद्धार का काम दो विभागों के बीच अटका, बजट मंजूर, काम शुरू नहीं / एेतिहासिक रानी की छतरी के जीर्णोद्धार का काम दो विभागों के बीच अटका, बजट मंजूर, काम शुरू नहीं

Bhaskar News Network

Jun 17, 2018, 02:00 AM IST

Ballabgarh News - एेतिहासिक रानी की छतरी के जीर्णोद्धार का काम दो विभागों के बीच अटका हुआ है। छतरी व शाही तालाब के जीर्णोद्धार का...

एेतिहासिक रानी की छतरी के जीर्णोद्धार का काम दो विभागों के बीच अटका, बजट मंजूर, काम शुरू नहीं
एेतिहासिक रानी की छतरी के जीर्णोद्धार का काम दो विभागों के बीच अटका हुआ है। छतरी व शाही तालाब के जीर्णोद्धार का काम पहले नगर निगम को करना था। अब पुरातत्व विभाग ने इस पर अपना दावा जताते हुए काम अपनी देख-रेख में किए जाने को कहा है। करीब एक साल पहले सरकार ने छतरी और शाही तालाब के जीर्णोद्धार के लिए 1.50 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। अहम बात यह है कि पैसा मिलने के बाद भी जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हुआ है।

यह है रानी की छतरी का इतिहास : नेशनल हाइवे के पास राजा नाहर सिंह की एेतिहासिक रानी की छतरी है। यहां पर शाही भी तालाब है। तालाब में आगरा नहर से पानी भरा जाता था। रानी यहां पर स्नान करती थी। स्नान के बाद छतरी के ऊपर पूजा अर्चना करती थी। अभी भी छतरी के ऊपर पूजा स्थल बना हुआ है। 1858 में राजा नाहर सिंह शहीद हो गए तो उनके बाद सभी महलों और ऐतिहासिक स्थलों को सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया था। देश आजाद होने के बाद रानी की छतरी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली की तरफ से बाल कल्याण केंद्र शुरू किया गया है।

फरीदाबाद. बल्लभगढ़ स्थित रानी की छतरी। (फाइल फोटो)

8 साल से अटका जीर्णोद्धार का काम

2010 में रानी की छतरी और शाही तालाब की जर्जर हालत को देखते हुए तत्कालीन विधायक शारदा राठौर व नगर निगम ने इसके जीर्णोद्धार की योजना तैयार की थी। इसके लिए निगम के तत्कालीन आयुक्त सीआर राणा ने 10 लाख रुपए भी दे दिए थे। इसके बाद रानी की छतरी और तालाब के जीर्णोद्धार का काम इंटेक संस्था की देख-रेख में शुरू हुआ। ये 10 लाख रुपए खत्म होने के बाद और राशि नहीं मिली तो जीर्णोद्धार का काम बीच में ही छोड़ दिया गया। इससे 10 लाख का जो काम हुआ था, वह भी अब बर्बाद हो गया। इमारत फिर से जर्जर हो गई। इसके बाद विधायक मूलचंद शर्मा ने रानी की छतरी और शाही तालाब के जीर्णोद्धार के लिए 24 अप्रैल 2017 को बल्लभगढ़ की अनाज मंडी में सीएम मनोहर लाल से रैली के दौरान 1.50 करोड़ रुपए देने की मांग की। सीएम ने विधायक की मांग को मानते हुए एेतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए योजना को मंजूरी दे दी।

पूरी की जा रही है प्रक्रिया


बजट मिलने के बाद भी काम नहीं हुआ शुरू

सीएम की घोषणा के बाद नगर निगम को 1.20 करोड़ रुपए मिल गए। निगम को जीर्णोद्धार का काम करना था। परंतु पुरातत्व विभाग ने निगम को जीर्णोद्धार का काम करने से मना कर दिया। नगर निगम ने जीर्णोद्धार का काम शुरू करने के लिए 8 मार्च 2018 को टेंडर छोड़ने की तिथि तय की थी। लेकिन उससे पहले ही पुरातत्व विभाग ने नगर निगम के मुख्य अभियंता डीआर भास्कर को पत्र लिख कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में आती है। छतरी और तालाब को उन्हें सौंप दिया जाए। पत्र के बाद निगम ने टेंडर छोड़ने के लिए प्रक्रिया बंद कर दी। इसके बाद से दोनों विभागों के बीच जीर्णोद्धार का मामला अटका हुआ है।

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